2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रक्षा भूमि पर 250 मेगावाट सौर ऊर्जा पार्क: राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी, सीतापुर में बनेगा पहला बड़ा प्रोजेक्ट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रक्षा भूमि पर 250 मेगावाट सौर ऊर्जा पार्क: राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी, सीतापुर में बनेगा पहला बड़ा प्रोजेक्ट

सारांश

रक्षा भूमि पर सौर ऊर्जा — यह सिर्फ पर्यावरण की बात नहीं, रणनीतिक आत्मनिर्भरता की भी है। सीतापुर की 850 एकड़ खाली ज़मीन पर 250 मेगावाट का यह पार्क रक्षा प्रतिष्ठानों को ग्रिड से मुक्त करने की दिशा में पहला ठोस कदम है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में 250 मेगावाट सौर ऊर्जा पार्क को स्वीकृति दी।
परियोजना 850 एकड़ खाली रक्षा भूमि पर विकसित होगी और इसमें बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी शामिल होगी।
यह रक्षा भूमि पर विकसित होने वाली पहली बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है।
परियोजना का विकास NTPC द्वारा प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के ज़रिए किया जाएगा।
इसमें रक्षा मंत्रालय , सेना मुख्यालय और रक्षा संपदा महानिदेशालय के बीच समन्वय सुनिश्चित होगा।
परियोजना भविष्य की रक्षा क्षेत्र सौर परियोजनाओं के लिए मानक मॉडल बनेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर स्थित पूर्व छावनी क्षेत्र की रक्षा भूमि पर 250 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह रक्षा भूमि पर विकसित होने वाली अपनी तरह की पहली बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है, जो रक्षा प्रतिष्ठानों को स्वच्छ और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराएगी।

परियोजना का स्वरूप और विस्तार

यह परियोजना लगभग 850 एकड़ खाली रक्षा भूमि पर विकसित की जाएगी। इसमें बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System) भी शामिल होगी, जो बिजली आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करेगी। यह ढाँचा पारंपरिक ग्रिड बिजली पर रक्षा प्रतिष्ठानों की निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से कम करेगा।

विकास और क्रियान्वयन की प्रक्रिया

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि परियोजना का विकास राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) द्वारा प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के ज़रिए किया जाएगा, ताकि रक्षा प्रतिष्ठानों को सबसे किफायती दर पर बिजली मिल सके। इस पूरी प्रक्रिया में रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और रक्षा संपदा महानिदेशालय के बीच घनिष्ठ समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक लाभ

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना से रक्षा बलों को दीर्घकालिक ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित होगी और सरकारी खजाने पर बिजली खरीद का बोझ भी दीर्घकाल में कम होगा। गौरतलब है कि खाली पड़ी रक्षा भूमि के सर्वोत्तम उपयोग की दिशा में यह पहल एक नई मिसाल कायम करती है।

पर्यावरणीय और राष्ट्रीय महत्व

यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मज़बूती देगी। रक्षा मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय स्थिरता का संगम बताया है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद सीतापुर का यह सौर ऊर्जा पार्क रक्षा भूमि पर स्थापित देश की सबसे महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल होगा। साथ ही यह भविष्य में रक्षा क्षेत्र में विकसित होने वाली सौर ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए एक मानक मॉडल के रूप में काम करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी। भारत में बड़े सरकारी ऊर्जा प्रोजेक्ट अक्सर निविदा और भूमि-समन्वय की जटिलताओं में उलझ जाते हैं। NTPC को प्रतिस्पर्धी निविदा से जोड़ना सही दिशा है, लेकिन रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और रक्षा संपदा महानिदेशालय के बीच तीन-स्तरीय समन्वय की ज़रूरत बताती है कि प्रशासनिक पेचीदगियाँ कम नहीं हैं। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो देशभर में खाली पड़ी लाखों एकड़ रक्षा भूमि के लिए यह एक परिवर्तनकारी मिसाल बन सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीतापुर में रक्षा भूमि पर बनने वाला सौर ऊर्जा पार्क क्या है?
यह उत्तर प्रदेश के सीतापुर स्थित पूर्व छावनी क्षेत्र की लगभग 850 एकड़ खाली रक्षा भूमि पर विकसित होने वाली 250 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना है। इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंजूरी दी है और यह रक्षा भूमि पर अपनी तरह की पहली बड़ी सौर परियोजना होगी।
इस परियोजना को कौन विकसित करेगा?
परियोजना का विकास राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) द्वारा प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इसका उद्देश्य रक्षा प्रतिष्ठानों को सबसे किफायती दर पर बिजली उपलब्ध कराना है।
इस सौर पार्क से रक्षा क्षेत्र को क्या फायदा होगा?
यह परियोजना रक्षा प्रतिष्ठानों को स्वच्छ और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराएगी और पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम करेगी। दीर्घकाल में सरकारी बिजली खरीद खर्च में उल्लेखनीय बचत होने की उम्मीद है।
परियोजना में बैटरी भंडारण प्रणाली क्यों शामिल की गई है?
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System) को शामिल करने से बिजली आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित होगी, खासकर तब जब सौर उत्पादन कम हो। यह रक्षा प्रतिष्ठानों की ऊर्जा सुरक्षा को और मज़बूत बनाएगा।
क्या यह परियोजना भविष्य की रक्षा ऊर्जा परियोजनाओं के लिए मॉडल बनेगी?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना पूरी होने के बाद भविष्य में रक्षा क्षेत्र में विकसित होने वाली सौर ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए एक मानक मॉडल के रूप में काम करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह देशभर की खाली रक्षा भूमि के उपयोग की दिशा में एक नई राह खोलेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले