रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का कार्यकाल एक साल बढ़ा, अब 31 अक्टूबर 2027 तक पद पर रहेंगे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाते हुए उन्हें 31 अक्टूबर 2027 तक पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया। यह फैसला उनके निर्धारित दो साल के कार्यकाल की समाप्ति से महज एक सप्ताह पहले आया है, जो 31 अक्टूबर 2026 को पूरी होने वाली थी। रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में उनके उल्लेखनीय योगदान को इस विस्तार की मुख्य वजह बताया जा रहा है।
सिंह की भूमिका और उपलब्धियाँ
केरल कैडर के 1989 बैच के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी सिंह ने 1 नवंबर 2024 को गिरिधर अरमाने के स्थान पर देश के 40वें रक्षा सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था। शांत स्वभाव और दृढ़ निश्चय के लिए जाने जाने वाले सिंह ने रक्षा मंत्रालय में त्वरित निर्णय लेने की संस्कृति विकसित करने के साथ-साथ पारंपरिक मिसाइल निर्माण को निजी क्षेत्र के लिए खोलने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में सुधारों को भी तेज़ी से आगे बढ़ाया, जिसे सरकार ने इस असाधारण विस्तार का मुख्य आधार बताया है। गौरतलब है कि अगस्त 2024 में इस पद पर उनकी नियुक्ति के समय ही उनकी सेवा अवधि सेवानिवृत्ति के पश्चात भी अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई थी।
DRDO का अतिरिक्त प्रभार
सिंह 31 मई 2026 से रक्षा सचिव के दायित्व के अतिरिक्त रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO के अध्यक्ष का प्रभार भी संभाल रहे हैं। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के मई के आदेश के तहत उन्हें यह दोहरी ज़िम्मेदारी तब सौंपी गई जब समीर वी. कामत — जो 25 अगस्त 2022 से DRDO के प्रमुख थे — का कार्यकाल पूर्ण हुआ। यह व्यवस्था किसी नियमित प्रमुख की नियुक्ति होने तक अथवा अगले आदेश तक जारी रहने की बात कही गई थी। तब से अब तक DRDO का कोई नियमित प्रमुख नियुक्त नहीं किया गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ: पहले के रक्षा सचिवों से तुलना
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सिंह के पूर्ववर्तियों की नियुक्ति-शैली पर नज़र डालें तो एक स्पष्ट पैटर्न उभरता है। अजय कुमार और गिरिधर अरमाने सामान्य सेवानिवृत्ति पर पद छोड़ गए। आरके माथुर और जी. मोहन कुमार ने सेवानिवृत्ति आयु के बाद भी दो साल का निर्धारित कार्यकाल पूरा किया। संजय मित्रा को 2019 में अपने दो साल के निर्धारित कार्यकाल के बाद केवल तीन महीने का विस्तार प्राप्त हुआ था। इस प्रकार सिंह ऐसे पहले रक्षा सचिव बनने जा रहे हैं जिन्हें इतने लंबे समय — पूरे एक साल — के लिए विस्तार दिया गया है, जो इस पद के इतिहास में अभूतपूर्व है।
रक्षा नीति पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा खरीद नीति में बड़े बदलावों के बीच घरेलू उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। सिंह का विस्तारित कार्यकाल नीति-निरंतरता सुनिश्चित करेगा, खासतौर पर DRDO के चल रहे सुधार कार्यक्रम और निजी क्षेत्र को रक्षा उत्पादन में शामिल करने की मुहिम में। आगामी महीनों में DRDO के नियमित प्रमुख की नियुक्ति पर भी सबकी नज़रें रहेंगी।