राम मंदिर चढ़ावा विवाद: नितिन नवीन का अखिलेश पर पलटवार — 'मगरमच्छ के आंसू बहाने वालों को आस्था पर बोलने का हक नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 4 जुलाई 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी पर अखिलेश के बयान को नवीन ने 'मगरमच्छ के आंसू' करार दिया और कहा कि जो लोग वर्षों तक भगवान राम और राम मंदिर के प्रति दुर्भावना रखते रहे, उन्हें आस्था से जुड़े मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं।
नितिन नवीन का बयान — मुख्य बातें
नवीन लखनऊ प्रवास के दौरान एक चाय की दुकान और हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को भगवान राम की आस्था से जुड़े मामलों से दूर रहना चाहिए। उनका स्पष्ट संकेत सपा और अखिलेश यादव की ओर था, जिन्होंने राम मंदिर चढ़ावे में 'डकैती' का आरोप लगाया था।
नवीन ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि जनता के बीच अभी से BJP की जीत की चर्चा शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' संकल्प से पहले ही 'विकसित प्रदेश' बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
योगी और टीम पर जताया भरोसा
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष और पूरी पार्टी टीम की सराहना करते हुए कहा कि सभी मिलकर उत्तर प्रदेश को 'उत्तम प्रदेश' बनाने के लिए काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश देश का नेतृत्व करने वाला राज्य बनकर उभर रहा है।
अखिलेश यादव के आरोप — पृष्ठभूमि
इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर BJP पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे में 'डकैती' हो रही है और धर्म के नाम पर चढ़ावे के बंटवारे का विवाद सामने आने से पूरे मामले का पर्दाफाश हो गया है।
अखिलेश ने कहा, 'जो शातिर सेंध लगाकर, बोरी भरकर सुरंग के रास्ते बहुत दूर निकल गए हैं, वे याद रखें कि जहां भूमिगत रास्ता खत्म होगा, वहां सत्य उनके पापों की सजा देने के लिए इंतजार कर रहा होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम से करोड़ों लोगों की श्रद्धा और आस्था को गहरी ठेस पहुंची है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावे का यह विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव की पृष्ठभूमि में राजनीतिक रूप से संवेदनशील मोड़ पर आया है। सपा और BJP दोनों ही इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से जनता के सामने रख रहे हैं। विभिन्न धार्मिक संगठन भी कथित तौर पर इस मुद्दे पर आपस में चर्चा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गहरा हो सकता है।