12 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: आदित्य साहू बोले — कांग्रेस को सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: आदित्य साहू बोले — कांग्रेस को सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं

सारांश

राम मंदिर चढ़ावे पर उठे विवाद के बीच झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस को आईना दिखाया — रामजन्मभूमि हलफनामे से लेकर प्राण प्रतिष्ठा के बहिष्कार तक, साहू ने कांग्रेस के पूरे इतिहास को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि इस पार्टी को राम मंदिर पर सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं।

मुख्य बातें

झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने 12 जुलाई को रांची से जारी बयान में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
साहू के अनुसार, कांग्रेस ने रामजन्मभूमि विवाद में न्यायालय में हलफनामे के ज़रिए भगवान राम को काल्पनिक पात्र बताया था।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शिरकत नहीं की थी।
उत्तर प्रदेश सरकार राम मंदिर चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है और संबंधितों पर त्वरित कार्रवाई का दावा किया गया है।
साहू ने सोमनाथ मंदिर उद्घाटन का हवाला देते हुए कांग्रेस पर सनातन संस्कृति के प्रति उदासीनता का ऐतिहासिक आरोप लगाया।

झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने 12 जुलाई को रांची से जारी बयान में कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो पार्टी भगवान राम के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लगाती रही हो, उसे अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। यह बयान उस समय आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे की अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

कांग्रेस पर आरोप: अतीत का इतिहास उठाया

साहू ने आरोप लगाया कि रामजन्मभूमि विवाद के दौरान कांग्रेस ने न्यायालय में दाखिल हलफनामे में भगवान राम को काल्पनिक पात्र बताया था और उनके जन्मस्थान पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस कारसेवकों पर गोली चलाए जाने का समर्थन करती रही है।

उन्होंने कहा कि वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति में डूबी यह पार्टी आज राम मंदिर को लेकर घड़ियाली आंसू बहा रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस का यह रुख उसकी राजनीतिक मंशा को उजागर करता है।

सुप्रीम कोर्ट फैसले और प्राण प्रतिष्ठा का संदर्भ

साहू ने स्मरण दिलाया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा रामजन्मभूमि पर रामलला के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बाद भी कांग्रेस ने उसका स्वागत नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रण मिलने के बावजूद कांग्रेस के शीर्ष नेताओं — जिनमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल हैं — ने कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया।

सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक संदर्भ

साहू ने सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने उस समय के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पर उद्घाटन समारोह में शामिल न होने का दबाव बनाया था, हालांकि राष्ट्रपति अपने निर्णय पर कायम रहे और समारोह में भाग लिया। उनके अनुसार, कांग्रेस का सनातन संस्कृति के प्रति यही उदासीन रवैया उसके इतिहास की पहचान रही है।

चढ़ावा विवाद पर जांच और सरकार की कार्रवाई

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं के संदर्भ में साहू ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पूरे मामले की गंभीरता से जांच करा रही है और जिन लोगों की भूमिका सामने आ रही है, उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह राम मंदिर की चिंता छोड़कर अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता करे।

आगे क्या

चढ़ावा विवाद की जांच जारी है और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कार्रवाई की प्रतीक्षा है। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक तकरार आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी चढ़ावे की अनियमितताओं की जांच, से ध्यान हटाती है। गौरतलब है कि जांच की घोषणा तो हुई है, लेकिन उसकी पारदर्शिता और समयसीमा पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। राम मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक संस्थान में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, चाहे किसी भी दल की ओर से उठाए जाएं, स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं — न कि राजनीतिक पलटवार की।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद उठा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच शुरू की है और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
आदित्य साहू ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने रामजन्मभूमि विवाद में न्यायालय में हलफनामे के ज़रिए भगवान राम को काल्पनिक पात्र बताया था, कारसेवकों पर गोली चलाने का समर्थन किया और प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार किया। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राम मंदिर के किसी भी मुद्दे पर सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं है।
क्या कांग्रेस नेता अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे?
साहू के अनुसार, सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने आमंत्रण मिलने के बावजूद अयोध्या राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हिस्सा नहीं लिया। कांग्रेस ने उस समय यह निर्णय सार्वजनिक रूप से लिया था।
सोमनाथ मंदिर का संदर्भ इस विवाद में क्यों उठाया गया?
आदित्य साहू ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पर सोमनाथ मंदिर उद्घाटन में न जाने का दबाव बनाया था। यह उदाहरण उन्होंने कांग्रेस की सनातन संस्कृति के प्रति ऐतिहासिक उदासीनता साबित करने के लिए दिया।
राम मंदिर चढ़ावा जांच में अब तक क्या हुआ है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने चढ़ावे की अनियमितताओं की जांच शुरू की है और जिन लोगों की भूमिका सामने आ रही है उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई का दावा किया गया है। हालांकि जांच की विस्तृत प्रगति या किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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