रामदास आठवले का बड़ा बयान: भारत में बांग्लादेश जैसा सत्ता परिवर्तन संभव नहीं, संविधान है ढाल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका की तर्ज पर भारत में आंदोलन के ज़रिये अचानक सत्ता परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के नागपुर संबोधन का समर्थन करते हुए दिया।
भागवत के बयान को मिला समर्थन
आठवले ने कहा कि मोहन भागवत ने नागपुर से देश को संबोधित करते हुए महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें गहरी हैं और डॉ. बीआर अंबेडकर का संविधान देश की सबसे बड़ी ढाल है। आठवले के अनुसार, भारत में राजनीतिक बदलाव केवल तभी होता है जब कोई पार्टी मतदाताओं से जनादेश और बहुमत हासिल करती है।
विरोध-प्रदर्शन की सीमाएँ
आठवले ने स्वीकार किया कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि केवल प्रदर्शन के बल पर किसी सरकार को नहीं पलटा जा सकता। उन्होंने कहा, 'आंदोलन करने वालों को शांति से आंदोलन करना चाहिए, गलत विषय पर आंदोलन करने से कुछ नहीं होगा।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देशों में सत्ता-परिवर्तन की घटनाओं को लेकर भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
राहुल गांधी और संजय राउत पर निशाना
आठवले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे लोगों में भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत के एक्स पोस्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें यूरोप में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का ज़िक्र था। आठवले ने कहा कि राउत सत्ता से बाहर होने के कारण भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने नीट विवाद का हवाला देते हुए कहा कि सीजेपी के आंदोलन के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुए, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ और पेपर लीक मामले में कठोर कानून भी बना — यह लोकतांत्रिक दबाव की सही मिसाल है।
भारत-न्यूज़ीलैंड व्यापार समझौते का स्वागत
आठवले ने भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गति देगा और बेरोज़गारों के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा, 'न्यूज़ीलैंड में बहुत से भारतीय रहते हैं, इसलिए यह समझौता और भी अहम है।' आठवले ने इस तरह के समझौते अन्य देशों के साथ भी किए जाने की वकालत की।
दशहरे पर आठवले का संदेश
आठवले ने देशवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह पर्व ऐतिहासिक और क्रांतिकारी महत्व रखता है। उन्होंने नवरात्रि के दौरान मुंबई, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली में गरबा-डांडिया के आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की जोशीली भागीदारी देश की सांस्कृतिक जीवंतता की निशानी है। आगे के दिनों में राजनीतिक बहस के और तेज़ होने की संभावना है, खासकर जब विपक्ष लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के सवाल पर सरकार को घेरने की कोशिश जारी रखे।