रामगढ़ सब-रजिस्ट्रार हत्याकांड: जमीन विवाद में 7 आरोपी गिरफ्तार, खून सना ईंट-डंडा बरामद
सारांश
मुख्य बातें
रामगढ़ जिले के मांडू थाना क्षेत्र के बलसगरा गांव में 30 जून को हुई जमीन विवाद से जुड़ी हत्या के मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक बालेश्वर पटेल, जो गिरिडीह में सब-रजिस्ट्रार के पद पर तैनात थे, पर विवादित जमीन का निरीक्षण करने के दौरान हमला किया गया था, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल खून से सना ईंट का टुकड़ा और बांस का डंडा भी बरामद कर लिया है।
घटना का विवरण
रामगढ़ पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत ने बुधवार, 1 जुलाई को पत्रकारों को बताया कि बालेश्वर पटेल हूल दिवस के अवकाश पर अपने गांव आए थे। 30 जून की सुबह वे बलसगरा गांव में करीब 11 डिसमिल की विवादित जमीन पर बोरिंग और समरसेबल पंप का निरीक्षण करने गए थे। इसी दौरान उन पर हमला किया गया और गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पत्नी रीता देवी के बयान के आधार पर मांडू थाना में हत्या का मामला दर्ज किया गया। गौरतलब है कि यह जमीन विवाद लंबे समय से चला आ रहा था, जो अंततः एक सरकारी अधिकारी की जान लेने तक पहुँच गया।
एसआईटी गठन और गिरफ्तारियाँ
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी लुणायत के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। एसआईटी ने तकनीकी साक्ष्यों, वीडियो फुटेज, स्थानीय लोगों से पूछताछ और गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में संतोष कुमार साव उर्फ पंपम, साधु साव उर्फ ज्ञानी, शकुंतला देवी, रूबी कुमारी, विनय कुमार, पूजा कुमारी और लक्ष्मी देवी उर्फ डॉली कुमारी शामिल हैं। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
फॉरेंसिक जांच और बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल खून से सना ईंट का टुकड़ा और बांस का डंडा बरामद किया है। वैज्ञानिक जांच के लिए रांची से फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। एसपी के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और अनुसंधान के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि एफएसएल रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है। इस मामले ने झारखंड में जमीन विवादों से जुड़ी हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर एक बार फिर ध्यान खींचा है, जहाँ एक सरकारी अधिकारी की इस तरह की परिस्थितियों में हत्या असाधारण रूप से गंभीर मानी जा रही है।