रणदीप हुड्डा वॉकथॉन 2026 में बोले — रोज़ 45 मिनट पैदल चलना सबसे बेहतर व्यायाम
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता रणदीप हुड्डा ने 19 जुलाई 2026 को मुंबई में आयोजित वॉकथॉन 2026 में शिरकत करते हुए कहा कि पैदल चलना सबसे सरल और असरदार व्यायाम है। आयकर विभाग, मुंबई द्वारा 167वें आयकर दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद स्वास्थ्य, फिटनेस और कर-जागरूकता का संदेश आम लोगों तक पहुँचाना था।
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए
वॉकथॉन में रणदीप हुड्डा के अलावा अभिनेता विजय वर्मा, आकाश शिंदे और गॉडफ्रे परेरा भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आयकर विभाग ने इस आयोजन के ज़रिए फिटनेस और नागरिक कर्तव्य — दोनों को एक मंच पर लाने की कोशिश की।
रणदीप हुड्डा का फिटनेस मंत्र
मीडिया से बातचीत में रणदीप हुड्डा ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में जिम, खेल और तरह-तरह के व्यायाम आज़माए हैं, लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि वॉकिंग सबसे टिकाऊ और प्रभावी विकल्प है। उन्होंने कहा, 'अगर कोई अन्य एक्सरसाइज नहीं कर सकता, तो रोज़ाना आधे घंटे से 45 मिनट की पैदल सैर भी स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है।'
हुड्डा ने बताया कि नियमित वॉक से शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटती है और हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है। उन्होंने यह भी सुझाया कि वॉक के दौरान हार्ट रेट को नियंत्रित रखना ज़रूरी है, ताकि व्यायाम का पूरा फायदा मिल सके।
167वें आयकर दिवस का महत्व
रणदीप हुड्डा ने बताया कि 167वाँ आयकर दिवस हर वर्ष 24 जुलाई को मनाया जाता है और यह दिन 1860 में भारत में आयकर व्यवस्था की नींव रखे जाने की याद में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन फिटनेस के साथ-साथ नागरिकों में कर-जागरूकता बढ़ाने का भी काम करते हैं।
'स्वातंत्र्यवीर सावरकर' और नेशनल अवॉर्ड
कार्यक्रम के दौरान हुड्डा ने अपनी फिल्म 'स्वातंत्र्यवीर सावरकर' के लिए मिले नेशनल अवॉर्ड पर खुशी और आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के जीवन और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर उनके लिए अत्यंत विशेष रहा। इस प्रोजेक्ट में उन्होंने अभिनय के साथ-साथ लेखन, निर्देशन और निर्माण की ज़िम्मेदारी भी उठाई — जिसे वे अपने करियर की सबसे गर्व की बात मानते हैं।
आगे की राह
आयकर विभाग के इस तरह के जन-जागरूकता अभियान आने वाले वर्षों में और विस्तृत होने की संभावना है। वॉकथॉन जैसे आयोजन न केवल स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ाते हैं, बल्कि आम नागरिकों को कर-प्रणाली से जोड़ने का एक सकारात्मक प्रयास भी हैं।