रेणुकास्वामी हत्या केस: बेंगलुरु कोर्ट ने YouTube, Facebook, Instagram और X को नोटिस जारी किए
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु की 59वीं सत्र अदालत ने 7 अक्टूबर 2026 को रेणुकास्वामी हत्या मामले की सुनवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद YouTube, Facebook, Instagram और X को सीधे नोटिस जारी कर ऐसे वीडियो तत्काल हटाने का निर्देश दिया। यह पहला अवसर है जब किसी ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सीधे पक्षकार बनाते हुए नोटिस भेजे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
हाई-प्रोफाइल रेणुकास्वामी हत्या मामले में प्रमुख आरोपियों में कन्नड़ अभिनेता दर्शन थुगुदीपा और कई अन्य शामिल हैं। इस मामले में आरोपी संख्या 14, प्रदोष एस. राव, को सरकारी गवाह का दर्जा दिया गया है। वे मजिस्ट्रेट के समक्ष कई पन्नों का गोपनीय इकबालिया बयान दर्ज करा रहे थे।
यह ऐसे समय में आया है जब अदालती कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और उसके प्रसार को लेकर न्यायपालिका की चिंताएँ देशभर में बढ़ रही हैं। प्रदोष राव के बयान दर्ज होने के दौरान की कुछ क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आ गईं, जिसे अदालत ने गंभीर उल्लंघन माना।
अदालत का आदेश और कार्रवाई
अदालत ने बुधवार को नोटिस जारी करने के साथ ही पुलिस को निर्देश दिया कि वह सुनवाई की रिकॉर्डिंग कर उसे प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आरंभ करे। विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं जो सुनवाई की रिकॉर्डिंग कर उसे वायरल करते पाए जाएँ।
अदालत के आदेश के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने ऐसे वीडियो हटाना शुरू कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बंद या प्रतिबंधित अदालती कार्यवाही से जुड़े कंटेंट को होस्ट करने पर प्लेटफॉर्म्स को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
यह आदेश क्यों अलग है
गौरतलब है कि अब तक ऐसे मामलों में पुलिस संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेजती थी और कंटेंट अपलोड करने वालों पर मुकदमा दर्ज करती थी। लेकिन इस बार 59वीं सत्र अदालत ने सीधे प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर एक नई मिसाल कायम की है। आलोचकों का कहना है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स की बढ़ती तादाद कोर्ट रूम को 'कंटेंट' की तरह देखने लगी है, जो न्याय प्रक्रिया की गोपनीयता के लिए गंभीर खतरा है।
यह Nवीं ऐसी घटना नहीं है जब भारतीय अदालतों को सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के प्रसार से जूझना पड़ा हो, लेकिन ट्रायल कोर्ट द्वारा प्लेटफॉर्म्स को सीधे नोटिस जारी करना न्यायिक हस्तक्षेप का एक नया और सख्त रूप है।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका
आरोप है कि कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स ने बंद अदालती कार्यवाही के हिस्सों को रिकॉर्ड कर अपने चैनलों पर अपलोड किया। प्रदोष राव के गोपनीय इकबालिया बयान से जुड़े क्लिप वायरल होने के बाद अदालत ने इसे न केवल प्रक्रिया का उल्लंघन माना, बल्कि गवाह की सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर बताया।
आगे क्या होगा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अदालत के नोटिस का जवाब देना होगा। पुलिस कंटेंट अपलोड करने वाले इन्फ्लुएंसर्स की पहचान कर उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करेगी। दर्शन थुगुदीपा और अन्य आरोपियों से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई आगे भी बेंगलुरु की 59वीं सत्र अदालत में जारी रहेगी, और यह स्पष्ट है कि कोर्ट अब डिजिटल मीडिया के हस्तक्षेप को लेकर कोई ढील देने के मूड में नहीं है।