रितु श्योराण को चरखी दादरी में सम्मान, मंत्री पंवार बोले — कबड्डी में हरियाणा का दबदबा
सारांश
मुख्य बातें
एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता कबड्डी खिलाड़ी रितु श्योराण को 2 अक्टूबर 2026 को चरखी दादरी में एक विशेष समारोह में कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने सम्मानित किया। इस अवसर पर रितु ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने की खुशी साझा करते हुए कहा कि यह सफलता कोच और विशेषज्ञों की रणनीति पर टिकी थी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कबड्डी अभी ओलंपिक और कॉमनवेल्थ खेलों का हिस्सा नहीं है, इसलिए एशियाई खेल उनके करियर का सबसे बड़ा मंच रहा है।
रितु श्योराण के विचार और आभार
रितु श्योराण ने कहा कि एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना उनका निर्धारित लक्ष्य था और उन्होंने इसे हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने इस सफलता का श्रेय कोचिंग स्टाफ, फेडरेशन और उन सभी पदाधिकारियों को दिया जो कबड्डी को लगातार समर्थन देते रहे हैं। मंत्री कृष्ण लाल पंवार और कुलदीप दलाल सहित अन्य लोगों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस सहयोग से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
2030 कॉमनवेल्थ खेलों पर निगाह
भविष्य की तैयारियों को लेकर रितु श्योराण ने कहा कि 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों के लिए पूरी टीम जी-तोड़ मेहनत करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि आने वाले वर्षों में कबड्डी को कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर जगह मिलती है, तो भारतीय टीम वहाँ भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगी। बेटियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई हो या खेल — हर क्षेत्र में शत-प्रतिशत मेहनत ज़रूरी है और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
हरियाणा की कबड्डी में भूमिका
मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कार्यक्रम में हरियाणा के खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि एशियाई स्तर पर भारत के प्रदर्शन में हरियाणा की निर्णायक भूमिका रही है। उनके अनुसार, भारतीय महिला कबड्डी टीम की 12 खिलाड़ियों में से 6 हरियाणा से हैं, जबकि पुरुष टीम की 12 में से 8 खिलाड़ी हरियाणा के हैं। उन्होंने महिला कबड्डी टीम की लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलता का भी उल्लेख किया और स्वर्गीय जनार्दन गहलोत के योगदान को याद किया।
हरियाणा सरकार की खेल नीति
राज्य सरकार की खेल नीति की जानकारी देते हुए मंत्री पंवार ने बताया कि एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले हरियाणा के खिलाड़ियों को ₹3 करोड़ की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। इसके अलावा, ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता को ₹7 करोड़ और क्लास-वन नौकरी, रजत पदक विजेता को ₹4 करोड़ और कांस्य पदक विजेता को ₹2.5 करोड़ देने की नीति लागू है। यह नीति राज्य के खिलाड़ियों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए एक मज़बूत प्रोत्साहन का काम करती है।
गौरतलब है कि हरियाणा देश में प्रति-व्यक्ति सर्वाधिक ओलंपिक और एशियाई पदक देने वाले राज्यों में से एक है। रितु श्योराण जैसी खिलाड़ियों की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही नीतिगत समर्थन और पारिवारिक प्रोत्साहन के साथ ग्रामीण पृष्ठभूमि से भी विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।