30 जुलाई 2026
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राजद एमएलसी सुनील सिंह के खिलाफ पटना में पोस्टर, ₹16.5 लाख गबन का कथित आरोप

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राजद एमएलसी सुनील सिंह के खिलाफ पटना में पोस्टर, ₹16.5 लाख गबन का कथित आरोप

सारांश

राजद के एमएलसी सुनील सिंह के खिलाफ पटना में पोस्टर लगाकर ₹16.5 लाख गबन का कथित आरोप लगाया गया है। पार्टी में लालू के बेटे-बेटी समेत कई नेता इस नियुक्ति से नाराज हैं, और पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम ने पद से इस्तीफा भी दे दिया।

मुख्य बातें

13 जून को पटना की सड़कों पर राजद एमएलसी सुनील सिंह के खिलाफ पोस्टर लगाए गए।
पोस्टर में एफआईआर नंबर 305 का हवाला देकर यादव समाज की महिला से कथित तौर पर ₹16.5 लाख गबन का आरोप।
पोस्टर में सुनील सिंह के पुत्र यशस्वी और उनकी पत्नी पर भी कथित आरोपों का उल्लेख।
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव और पुत्री रोहिणी आचार्या ने नियुक्ति पर सवाल उठाए।
पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम ने पार्टी पदों से इस्तीफा दिया; राजद ने इस्तीफा अस्वीकार किया।
पोस्टर लगाने वाले संगठन या व्यक्ति की पहचान अब तक अज्ञात है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नवनिर्वाचित एमएलसी सुनील सिंह के खिलाफ 13 जून को पटना की सड़कों पर विवादास्पद पोस्टर लगाए गए, जिनमें उन पर ₹16.5 लाख के कथित गबन और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। पोस्टर लगाने वाले संगठन या व्यक्ति की पहचान अब तक सामने नहीं आई है।

पोस्टर में क्या लिखा गया

पटना की सड़कों के किनारे लगाए गए इन पोस्टरों में सुनील सिंह को व्यंग्यात्मक लहजे में 'बिहार के नटवरलाल' कहते हुए एमएलसी बनने पर 'बधाई' दी गई है। पोस्टर में एफआईआर नंबर 305 का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि यादव समाज की एक महिला से कथित तौर पर ₹16.5 लाख की राशि का गबन किया गया। पोस्टर में सुनील सिंह के साथ उनके पुत्र यशस्वी और उनकी पत्नी की तस्वीरें भी लगाई गई हैं, और उन पर भी गबन तथा धोखाधड़ी के कथित आरोपों का जिक्र किया गया है।

राजद में उभरा असंतोष

यह विवाद राजद द्वारा सुनील कुमार सिंह को एमएलसी चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद से ही शुरू हो गया था। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव और पुत्री रोहिणी आचार्या ने भी इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए। गौरतलब है कि पार्टी के भीतर से ही इस नियुक्ति का विरोध होना राजद के लिए असामान्य स्थिति है।

पूर्व मंत्री का इस्तीफा

असंतोष इतना गहरा रहा कि पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम ने पार्टी के पदों से इस्तीफा दे दिया। हालाँकि पार्टी ने उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महागठबंधन बिहार में अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहा है।

आगे क्या होगा

पोस्टर में उल्लिखित एफआईआर की पृष्ठभूमि और उसकी वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। राजद नेतृत्व की ओर से इस पोस्टर विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर इस पर है कि क्या यह आंतरिक असंतोष पार्टी की एकता को और प्रभावित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही अस्वीकार कर दिया गया हो, संकेत देता है कि असंतोष सतही नहीं है। महागठबंधन के लिए यह वह समय है जब बिहार की राजनीति में विपक्षी एकजुटता की परीक्षा हो रही है, और इस तरह का आंतरिक टकराव उसकी साख को नुकसान पहुँचा सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में राजद एमएलसी सुनील सिंह के खिलाफ क्या आरोप लगाए गए हैं?
पटना की सड़कों पर लगाए गए पोस्टरों में सुनील सिंह पर एफआईआर नंबर 305 के तहत यादव समाज की एक महिला से कथित तौर पर ₹16.5 लाख के गबन और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। ये आरोप कथित हैं और पोस्टर लगाने वाले की पहचान अभी तक सामने नहीं आई है।
राजद में सुनील सिंह की एमएलसी नियुक्ति पर विवाद क्यों है?
राजद द्वारा सुनील कुमार सिंह को एमएलसी प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष उभरा। लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव और पुत्री रोहिणी आचार्या ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए, और पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम ने पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया।
क्या शिवचन्द्र राम का इस्तीफा राजद ने स्वीकार किया?
नहीं, राजद ने पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम का इस्तीफा अस्वीकार कर दिया है। हालाँकि उनके इस्तीफे की घटना पार्टी के भीतर गहरे असंतोष की ओर इशारा करती है।
पटना में लगाए गए पोस्टर किसने लगाए?
पोस्टर लगाने वाले संगठन, व्यक्ति या राजनीतिक दल की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। पोस्टर पर कोई नाम या संगठन का उल्लेख नहीं किया गया है।
तेज प्रताप यादव और रोहिणी आचार्या ने इस मामले में क्या कहा?
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव और पुत्री रोहिणी आचार्या ने सुनील सिंह को एमएलसी प्रत्याशी बनाए जाने के पार्टी के फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए। उनकी आपत्तियों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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