देहरादून में 'रन फॉर योग' दौड़, CM पुष्कर सिंह धामी बोले — देवभूमि है योग साधना की जननी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर 19 जून 2026 को 'रन फॉर योग' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं इस दौड़ में भाग लिया और कहा कि यह आयोजन केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज निर्माण का सशक्त अभियान है।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'रन फॉर योग' एक स्वस्थ जीवन, सकारात्मक सोच और योग को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह की ऊर्जा और उत्साह को स्वस्थ जीवन के प्रति गंभीरता का प्रमाण बताया।
धामी ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल दौड़ना नहीं है — बल्कि नशा मुक्त जीवन, अनुशासित दिनचर्या और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लेना भी है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
देवभूमि और योग की परंपरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि सदियों से ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है। गंगा और यमुना की निर्मल धाराएँ, हिमालय की दिव्य पर्वत श्रृंखलाएँ और समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा मानवता को प्रकृति, स्वास्थ्य और आत्मिक संतुलन के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि इसीलिए योग की सनातन परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने में उत्तराखंड हमेशा देश के अग्रणी राज्यों में रहा है।
योग — विज्ञान और जीवन पद्धति
धामी ने योग को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली एक वैज्ञानिक जीवन पद्धति है। उन्होंने श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण के उद्धरण का संदर्भ देते हुए कहा कि जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में संतुलन और समभाव बनाए रखना ही योग है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब विश्व तनाव, अवसाद और अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग भारत की सनातन ज्ञान परंपरा का प्रतीक बनकर संपूर्ण मानवता को स्वस्थ और सुखी जीवन का मार्ग दिखा रहा है।
वैश्विक पहचान और आगे की राह
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योगाभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने ऋषि-मुनियों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व दिए गए इस दिव्य ज्ञान को आधुनिक जीवन की चुनौतियों का समाधान बताया।
इस आयोजन ने 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले देहरादून में योग के प्रति जन-जागरूकता को नई ऊँचाई दी है और आने वाले वर्षों में ऐसे आयोजनों के विस्तार की उम्मीद जगाई है।