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सैनिकों के लिए आयुष उपचार: प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखा पत्र, मिलिट्री अस्पतालों में OPD का प्रस्ताव

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सैनिकों के लिए आयुष उपचार: प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखा पत्र, मिलिट्री अस्पतालों में OPD का प्रस्ताव

सारांश

आयुष राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर देश के सभी मिलिट्री और फील्ड अस्पतालों में आयुष OPD शुरू करने का प्रस्ताव रखा है — यह पहल सशस्त्र बलों की आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में पारंपरिक भारतीय उपचार पद्धतियों को जोड़ने की दिशा में एक नई शुरुआत हो सकती है।

मुख्य बातें

आयुष राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने 22 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा।
प्रस्ताव में देश के सभी मिलिट्री और फील्ड अस्पतालों में आयुष ओपीडी और उपचार सेवाएं शुरू करने की माँग है।
फिलहाल रक्षा मंत्रालय के केवल चुनिंदा संस्थानों में ही आयुष सुविधा उपलब्ध है।
प्रस्तावित लाभ क्षेत्र: रोकथाम-आधारित देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन, पुनर्वास और समग्र स्वास्थ्य ।
आयुष मंत्रालय ने दोनों मंत्रालयों के बीच MoU की संभावना भी जताई है।

केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने 22 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर देश के सभी मिलिट्री और फील्ड अस्पतालों में आयुष ओपीडी और आयुष-आधारित उपचार सेवाएं शुरू करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा है। यह पहल सशस्त्र बलों की मौजूदा आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

प्रस्ताव का मूल आधार

जाधव ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (AFMS) पहले से ही सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है और उसके पास आधुनिक चिकित्सा का सुदृढ़ ढाँचा मौजूद है। उनका तर्क है कि यदि इस ढाँचे के साथ आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक पद्धतियों को जोड़ा जाए, तो सैनिकों को समग्र और बहु-आयामी उपचार का लाभ मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत केवल कुछ चुनिंदा संस्थानों में ही आयुष सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि अधिकांश मिलिट्री और फील्ड अस्पतालों में यह सुविधा अनुपलब्ध है।

किन क्षेत्रों में होगा लाभ

प्रस्ताव के अनुसार आयुष सेवाओं के विस्तार से सैनिकों को विशेष रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों में लाभ मिलने की संभावना है — रोकथाम-आधारित स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन, पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) और समग्र स्वास्थ्य। जाधव के अनुसार ये सेवाएं वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होंगी और मौजूदा एलोपैथिक उपचार की पूरक बनेंगी, न कि उसका विकल्प।

आयुष मंत्रालय की तैयारी

जाधव ने रक्षा मंत्रालय को भरोसा दिलाया है कि आयुष मंत्रालय इस योजना को लागू करने के लिए तकनीकी सहयोग, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और संस्थागत सहायता देने को पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर दोनों मंत्रालयों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं, जिससे सहयोग को संस्थागत रूप दिया जा सके।

व्यापक संदर्भ और महत्व

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार आयुष को मुख्यधारा की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ने पर लगातार जोर दे रही है। गौरतलब है कि सरकार पहले ही सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष इकाइयाँ स्थापित करने की दिशा में कदम उठा चुकी है। सशस्त्र बलों में इसका विस्तार इस नीतिगत दिशा की स्वाभाविक अगली कड़ी मानी जा सकती है।

रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब यह देखना होगा कि मंत्रालय इस पहल पर किस दिशा में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सफलता क्रियान्वयन की बारीकियों पर निर्भर करेगी — विशेषकर इस बात पर कि आयुष सेवाएं एलोपैथिक उपचार की पूरक बनती हैं या उनके साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है। सशस्त्र बलों में योग और आयुर्वेद की स्वीकार्यता पहले से है, लेकिन फील्ड अस्पतालों में प्रशिक्षित आयुष कर्मियों की उपलब्धता और बुनियादी ढाँचे की कमी एक बड़ी चुनौती होगी। रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया और MoU की शर्तें ही तय करेंगी कि यह पहल केवल एक पत्र बनकर रह जाती है या ज़मीन पर बदलाव लाती है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतापराव जाधव ने राजनाथ सिंह को क्या प्रस्ताव दिया है?
आयुष राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर देश के सभी मिलिट्री और फील्ड अस्पतालों में आयुष ओपीडी और आयुष-आधारित उपचार सेवाएं शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य सैनिकों को आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय उपचार पद्धतियों का भी लाभ दिलाना है।
अभी सेना के अस्पतालों में आयुष सेवाओं की क्या स्थिति है?
फिलहाल रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत केवल कुछ चुनिंदा संस्थानों में ही आयुष उपचार की सुविधा उपलब्ध है। अधिकांश मिलिट्री और फील्ड अस्पतालों में अभी तक यह सेवा नहीं पहुँची है।
सैनिकों को आयुष उपचार से क्या फायदा होगा?
प्रस्ताव के अनुसार सैनिकों को रोकथाम-आधारित स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन, पुनर्वास और समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष लाभ मिल सकता है। ये सेवाएं मौजूदा एलोपैथिक उपचार की पूरक होंगी।
क्या दोनों मंत्रालयों के बीच कोई समझौता होगा?
जाधव ने अपने पत्र में संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर आयुष मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह प्रस्ताव सरकार की किस बड़ी नीति का हिस्सा है?
यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत आयुष को मुख्यधारा की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। सरकार पहले से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष इकाइयाँ स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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