सज्जाद गनी लोन पिता की 24वीं पुण्यतिथि पर श्रीनगर में नजरबंद, पार्टी ने बताया 'अलोकतांत्रिक'
सारांश
मुख्य बातें
पीपल्स कॉन्फ्रेंस (PC) के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन को 21 मई 2026 को उनके पिता अब्दुल गनी लोन की 24वीं पुण्यतिथि पर श्रीनगर में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी के प्रवक्ता ने इस कदम को 'अलोकतांत्रिक' करार दिया और प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया।
नजरबंदी की पृष्ठभूमि
अब्दुल गनी लोन की हत्या 21 मई 2002 को श्रीनगर के ईदगाह मैदान में आतंकवादियों ने की थी। वे उस दिन वरिष्ठ अलगाववादी नेता मीरवाइज मौलाना मोहम्मद फारूक को श्रद्धांजलि देने वहाँ पहुँचे थे। उनके बेटे सज्जाद गनी लोन इस पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी में थे, जब उन्हें नजरबंद किया गया।
अब्दुल गनी लोन: राजनीतिक विरासत
अब्दुल गनी लोन ने 1967 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में राज्य विधानसभा में प्रवेश कर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1978 में उन्होंने 'पीपल्स कॉन्फ्रेंस' की स्थापना की — एक कश्मीरी संगठन जो कश्मीर में 'आंतरिक स्वायत्तता' की बहाली के लिए समर्पित था। उनकी हत्या के बाद उनके पुत्र सज्जाद गनी लोन ने पार्टी की बागडोर संभाली।
मीरवाइज फारूक: एक और दुखद इतिहास
मीरवाइज मौलाना मोहम्मद फारूक की हत्या 21 मई 1990 को श्रीनगर स्थित उनके नगीन आवास पर आतंकवादियों ने की थी। मात्र 19 वर्ष की आयु में वे हजरतबल दरगाह से पवित्र अवशेष के गायब होने को लेकर हुए आंदोलन में नेता के रूप में उभरे थे। उन्होंने 'ऑल जम्मू एंड कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी' (ACC) के गठन में अहम भूमिका निभाई और उसके अध्यक्ष बने। 2010 में हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी को उनकी हत्या का दोषी ठहराया गया, और 2023 में पुलिस ने इस मामले में दो और आतंकवादियों को गिरफ्तार किया — जिनमें वह व्यक्ति भी शामिल था जो मीरवाइज के बेडरूम में घुसा और उन पर गोली चलाई थी।
विरासत की अगली पीढ़ी
मीरवाइज मौलाना मोहम्मद फारूक के बाद उनके पुत्र मीरवाइज उमर फारूक मुख्य मौलवी और ACC के अध्यक्ष बने। उसी तरह अब्दुल गनी लोन के बाद सज्जाद गनी लोन ने पार्टी की कमान संभाली। सज्जाद गनी लोन फिलहाल 90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। यह नजरबंदी ऐसे समय में आई है जब कश्मीर घाटी में राजनीतिक गतिविधियों पर प्रशासनिक नजर बनी हुई है।
आगे की स्थिति
पीपल्स कॉन्फ्रेंस ने इस नजरबंदी के खिलाफ आवाज उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस कदम पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। घाटी में इस घटनाक्रम पर राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है।