सज्जाद गनी लोन पिता की 24वीं पुण्यतिथि पर श्रीनगर में नजरबंद, पार्टी ने बताया 'अलोकतांत्रिक'

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सज्जाद गनी लोन पिता की 24वीं पुण्यतिथि पर श्रीनगर में नजरबंद, पार्टी ने बताया 'अलोकतांत्रिक'

सारांश

पिता की 24वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने की तैयारी कर रहे पीपल्स कॉन्फ्रेंस चेयरमैन सज्जाद गनी लोन को श्रीनगर में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने इसे 'अलोकतांत्रिक' बताया। 21 मई की तारीख कश्मीर की राजनीतिक स्मृति में दो बड़ी हत्याओं की वजह से दर्ज है।

मुख्य बातें

सज्जाद गनी लोन को 21 मई 2026 को श्रीनगर में नजरबंद किया गया, जो उनके पिता अब्दुल गनी लोन की 24वीं पुण्यतिथि है।
पीपल्स कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने इस नजरबंदी को 'अलोकतांत्रिक' बताया।
अब्दुल गनी लोन की हत्या 21 मई 2002 को ईदगाह मैदान, श्रीनगर में आतंकवादियों ने की थी।
मीरवाइज मौलाना मोहम्मद फारूक की हत्या भी 21 मई 1990 को नगीन, श्रीनगर में हुई थी; 2010 में एक दोषी ठहराया गया और 2023 में दो और गिरफ्तार।
सज्जाद गनी लोन जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंदवाड़ा से मौजूदा विधायक हैं।

पीपल्स कॉन्फ्रेंस (PC) के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन को 21 मई 2026 को उनके पिता अब्दुल गनी लोन की 24वीं पुण्यतिथि पर श्रीनगर में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी के प्रवक्ता ने इस कदम को 'अलोकतांत्रिक' करार दिया और प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया।

नजरबंदी की पृष्ठभूमि

अब्दुल गनी लोन की हत्या 21 मई 2002 को श्रीनगर के ईदगाह मैदान में आतंकवादियों ने की थी। वे उस दिन वरिष्ठ अलगाववादी नेता मीरवाइज मौलाना मोहम्मद फारूक को श्रद्धांजलि देने वहाँ पहुँचे थे। उनके बेटे सज्जाद गनी लोन इस पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी में थे, जब उन्हें नजरबंद किया गया।

अब्दुल गनी लोन: राजनीतिक विरासत

अब्दुल गनी लोन ने 1967 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में राज्य विधानसभा में प्रवेश कर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1978 में उन्होंने 'पीपल्स कॉन्फ्रेंस' की स्थापना की — एक कश्मीरी संगठन जो कश्मीर में 'आंतरिक स्वायत्तता' की बहाली के लिए समर्पित था। उनकी हत्या के बाद उनके पुत्र सज्जाद गनी लोन ने पार्टी की बागडोर संभाली।

मीरवाइज फारूक: एक और दुखद इतिहास

मीरवाइज मौलाना मोहम्मद फारूक की हत्या 21 मई 1990 को श्रीनगर स्थित उनके नगीन आवास पर आतंकवादियों ने की थी। मात्र 19 वर्ष की आयु में वे हजरतबल दरगाह से पवित्र अवशेष के गायब होने को लेकर हुए आंदोलन में नेता के रूप में उभरे थे। उन्होंने 'ऑल जम्मू एंड कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी' (ACC) के गठन में अहम भूमिका निभाई और उसके अध्यक्ष बने। 2010 में हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी को उनकी हत्या का दोषी ठहराया गया, और 2023 में पुलिस ने इस मामले में दो और आतंकवादियों को गिरफ्तार किया — जिनमें वह व्यक्ति भी शामिल था जो मीरवाइज के बेडरूम में घुसा और उन पर गोली चलाई थी।

विरासत की अगली पीढ़ी

मीरवाइज मौलाना मोहम्मद फारूक के बाद उनके पुत्र मीरवाइज उमर फारूक मुख्य मौलवी और ACC के अध्यक्ष बने। उसी तरह अब्दुल गनी लोन के बाद सज्जाद गनी लोन ने पार्टी की कमान संभाली। सज्जाद गनी लोन फिलहाल 90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। यह नजरबंदी ऐसे समय में आई है जब कश्मीर घाटी में राजनीतिक गतिविधियों पर प्रशासनिक नजर बनी हुई है।

आगे की स्थिति

पीपल्स कॉन्फ्रेंस ने इस नजरबंदी के खिलाफ आवाज उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस कदम पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। घाटी में इस घटनाक्रम पर राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों की हत्याएँ इसी दिन हुईं। इस पृष्ठभूमि में श्रद्धांजलि देने जा रहे एक निर्वाचित विधायक को नजरबंद करना प्रशासनिक सतर्कता और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच की पुरानी तनातनी को फिर से सामने लाता है। सवाल यह है कि क्या ऐसी पुण्यतिथियों पर राजनीतिक नेताओं की आवाजाही पर रोक एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है या एक चुनिंदा राजनीतिक संदेश — और इसका जवाब प्रशासन ने अभी तक नहीं दिया है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सज्जाद गनी लोन को नजरबंद क्यों किया गया?
सज्जाद गनी लोन को 21 मई 2026 को श्रीनगर में उनके पिता अब्दुल गनी लोन की 24वीं पुण्यतिथि के अवसर पर नजरबंद किया गया। प्रशासन की ओर से नजरबंदी का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अब्दुल गनी लोन कौन थे?
अब्दुल गनी लोन कश्मीर के वरिष्ठ राजनेता थे जिन्होंने 1967 में राजनीति में कदम रखा और 1978 में पीपल्स कॉन्फ्रेंस की स्थापना की। 21 मई 2002 को श्रीनगर के ईदगाह मैदान में आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी थी।
पीपल्स कॉन्फ्रेंस ने इस नजरबंदी पर क्या कहा?
पीपल्स कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने सज्जाद गनी लोन की नजरबंदी को 'अलोकतांत्रिक' बताया और इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया।
21 मई कश्मीर की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है?
21 मई को कश्मीरी राजनीति में दो बड़ी हत्याओं की वजह से याद किया जाता है — 21 मई 1990 को मीरवाइज मौलाना मोहम्मद फारूक और 21 मई 2002 को अब्दुल गनी लोन की आतंकवादियों द्वारा हत्या। दोनों नेताओं के परिवार आज भी कश्मीरी राजनीति में सक्रिय हैं।
सज्जाद गनी लोन वर्तमान में किस पद पर हैं?
सज्जाद गनी लोन पीपल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन हैं और 90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा विधायक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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