21 मई: राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस, राजीव गांधी की शहादत से जुड़ा यह दिन क्यों है खास

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21 मई: राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस, राजीव गांधी की शहादत से जुड़ा यह दिन क्यों है खास

सारांश

21 मई सिर्फ एक तारीख नहीं — यह उस त्रासदी की याद है जिसने भारत को झकझोर दिया था। श्रीपेरंबदूर में 1991 के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या के बाद से यह दिन आतंकवाद के खिलाफ राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बन गया है।

मुख्य बातें

भारत में हर वर्ष 21 मई को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है।
यह दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि है, जिनकी 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर, तमिलनाडु में आत्मघाती हमले में हत्या हुई थी।
देशभर के सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में आतंकवाद विरोधी शपथ दिलाई जाती है।
राजीव गांधी ने 40 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री पद संभाला और 401 सीटों का ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया।
उनकी प्रमुख विरासतों में IT नीति (1984) , जवाहर नवोदय विद्यालय , इग्नू , मतदान आयु 18 वर्ष और दल-बदल विरोधी कानून (1985) शामिल हैं।

भारत में हर वर्ष 21 मई को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है। यह दिन देशवासियों को आतंकवाद के खतरों के प्रति सचेत करने, युवा पीढ़ी को हिंसा और कट्टरपंथ की राह से दूर रखने तथा समाज में शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाने के लिए समर्पित है।

राजीव गांधी की पुण्यतिथि से जुड़ी है यह तारीख

यह दिवस पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि से अविभाज्य रूप से जुड़ा है। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस दुखद घटना के बाद भारत सरकार ने प्रतिवर्ष इस तिथि को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ आतंकवाद के विनाशकारी दुष्परिणामों को न भूलें।

देशभर में शपथ और जागरूकता कार्यक्रम

इस अवसर पर देशभर के सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक संस्थानों में आतंकवाद विरोधी शपथ दिलाई जाती है। नागरिक यह संकल्प लेते हैं कि वे हिंसा, घृणा और आतंकवाद की शक्तियों का हर स्तर पर विरोध करेंगे और देश की एकता तथा अखंडता को सुदृढ़ बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएंगे।

शहीदों को श्रद्धांजलि का दिन

राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है — यह उन वीर सैनिकों, सुरक्षाकर्मियों और निर्दोष नागरिकों को स्मरण करने का पवित्र अवसर भी है, जिन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राण न्योछावर किए। यह दिन यह भी याद दिलाता है कि आतंकवाद किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की नहीं, बल्कि समूची मानवता की समस्या है।

राजीव गांधी: पायलट से प्रधानमंत्री तक का सफर

पेशेवर पायलट के रूप में अपनी जिंदगी जी रहे राजीव गांधी न तो सत्ता के आकांक्षी थे और न ही राजनीति में उनकी रुचि थी। परंतु नियति ने उनके लिए अलग राह चुनी। 1980 में छोटे भाई संजय गांधी की विमान दुर्घटना में असामयिक मृत्यु और फिर 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही अंगरक्षकों द्वारा हत्या ने उन्हें राजनीति में आने पर विवश किया। मात्र 40 वर्ष की आयु में उन्होंने भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और उसके बाद हुए आम चुनावों में उनकी पार्टी को इतिहास का सर्वाधिक बहुमत — 401 सीटें — प्राप्त हुईं।

राजीव गांधी की विरासत: तकनीक, शिक्षा और लोकतंत्र

राजीव गांधी का दृष्टिकोण परंपरागत राजनीति से सर्वथा भिन्न था। उन्होंने सैम पित्रोदा के साथ मिलकर संचार क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए और घर-घर तक टेलीफोन की पहुँच सुनिश्चित की। सॉफ्टवेयर नीति (1984) के माध्यम से भारत के आईटी उद्योग को पहली बार एक ठोस आधार मिला। उन्होंने 61वें संविधान संशोधन (1988) के जरिए मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की, जिससे करोड़ों युवाओं को लोकतंत्र में भागीदारी का अधिकार मिला। वंचित वर्गों के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) की स्थापना और कामकाजी वर्ग के लिए इग्नू की नींव उनकी दूरदर्शिता की मिसाल है। 1985 में दल-बदल विरोधी कानून (52वाँ संशोधन) लाकर उन्होंने राजनीतिक स्थिरता को भी मजबूती दी।

आतंकवाद विरोधी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि शांति और एकता के लिए संघर्ष कभी समाप्त नहीं होता — और इस संघर्ष में हर नागरिक की भूमिका अपरिहार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या यह दिन सिर्फ शपथ-समारोह तक सीमित रह गया है। जिस उद्देश्य से इसकी शुरुआत हुई थी — युवाओं को कट्टरपंथ से दूर रखना और आतंकवाद के विरुद्ध सामाजिक चेतना जगाना — उसके लिए ठोस और निरंतर कार्यक्रमों की कमी स्पष्ट दिखती है। राजीव गांधी की विरासत — चाहे वह आईटी क्रांति हो, शिक्षा सुधार हो या युवा मताधिकार — आज भी प्रासंगिक है, परंतु उनके नाम पर मनाए जाने वाले इस दिवस को केवल स्मरण से आगे बढ़कर नीति-संचालित जागरूकता अभियान का रूप लेना चाहिए।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
भारत में हर वर्ष 21 मई को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है। यह दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि है, जिनकी 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी।
21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में क्या हुआ था?
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान एक आत्मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। यह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक त्रासदियों में से एक मानी जाती है।
आतंकवाद विरोधी दिवस पर क्या-क्या कार्यक्रम होते हैं?
इस दिन देशभर के सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक संस्थानों में आतंकवाद विरोधी शपथ दिलाई जाती है। नागरिक हिंसा, घृणा और आतंकवाद के विरोध तथा देश की एकता-अखंडता की रक्षा का संकल्प लेते हैं।
राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के रूप में कौन-से प्रमुख कार्य किए?
राजीव गांधी ने सॉफ्टवेयर नीति (1984) के जरिए भारत के आईटी उद्योग की नींव रखी, सैम पित्रोदा के साथ संचार क्रांति लाए, जवाहर नवोदय विद्यालय और इग्नू की स्थापना की। उन्होंने 61वें संविधान संशोधन (1988) से मतदान आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की और 1985 में दल-बदल विरोधी कानून लागू किया।
राजीव गांधी कितनी उम्र में प्रधानमंत्री बने और उन्हें कितना बहुमत मिला?
राजीव गांधी ने मात्र 40 वर्ष की आयु में भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद हुए आम चुनावों में उन्हें भारतीय राजनीतिक इतिहास का सर्वाधिक बहुमत — 401 सीटें — प्राप्त हुईं।
राष्ट्र प्रेस
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