सालार जंग संग्रहालय की 75वीं वर्षगांठ: विक्रमार्क बोले — यह हैदराबाद की आत्मा और गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत प्रमाण
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने 14 जून 2026 को सालार जंग संग्रहालय, हैदराबाद को शहर की आत्मा और धार्मिक सौहार्द का जीवंत प्रतीक घोषित किया। वे संग्रहालय की 75वीं वर्षगांठ और इसके संस्थापक सालार जंग तृतीय मीर यूसुफ अली खान की 137वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने संग्रहालय को केवल एक इमारत नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक धरोहर बताया।
समारोह में कौन-कौन रहे उपस्थित
इस विशेष आयोजन में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, मंत्री पोन्नम प्रभाकर, और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) विधायक मीर ज़ुल्फेकार अली सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। समारोह ने हैदराबाद की बहु-सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर रेखांकित किया।
सालार जंग तृतीय की दूरदर्शिता को सराहा
विक्रमार्क ने सालार जंग तृतीय को एक असाधारण दूरदर्शी व्यक्तित्व बताया, जिन्होंने विश्व सभ्यता के सार को संजोने का अभूतपूर्व कार्य किया। उन्होंने कहा कि जहाँ लोग सामान्य वस्तुएँ भी भूल जाते हैं, वहीं सालार जंग तृतीय ने अपने व्यक्तिगत संसाधनों से लगभग 43,000 दुर्लभ कलाकृतियाँ संकलित कर पूरी एक सभ्यता को संरक्षित कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संग्रह महज वस्तुओं का ढेर नहीं, बल्कि कला के प्रति उनकी गहरी आस्था और समर्पण का परिणाम है — जो आज सार्वजनिक धरोहर बन चुका है।
धार्मिक एकता का अद्वितीय उदाहरण
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि संग्रहालय में हिंदू देवी-देवताओं की कांस्य मूर्तियाँ, कुरान की प्रतियाँ, ईसा मसीह की मदोना प्रतिमाएँ और बौद्ध कलाकृतियाँ एक ही छत के नीचे मौजूद हैं — जो धार्मिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन अनुष्ठानिक कलाकृतियों का उल्लेख किया जिनमें भगवान विष्णु के दस अवतारों को कुरान की आयतों के साथ जोड़ा गया है — जिसे उन्होंने 'गंगा-जमुनी तहजीब' का जीवंत प्रमाण बताया।
मूसी नदी और पर्यटन विकास की योजना
विक्रमार्क ने मूसी नदी को हैदराबाद की स्मृतियों की धारा बताते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे साफ करके लंदन की टेम्स और पेरिस की सीन की तर्ज पर एक आधुनिक नदी-तट परियोजना के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। इस परियोजना में सालार जंग संग्रहालय को पुनर्जीवित नदी तट का प्रमुख आकर्षण बनाया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार पुराने शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों — चारमीनार, गोलकुंडा किला, कुतुब शाही मकबरे, चौमहल्ला पैलेस और फलकनुमा पैलेस — को सालार जंग संग्रहालय से जोड़ने की योजना पर भी काम कर रही है। रात्रि पर्यटन, गाइडेड टूर और बेहतर परिवहन सुविधाओं को भी बढ़ावा देने की बात कही गई।
हैदराबाद: इतिहास और आधुनिकता का संगम
विक्रमार्क ने जोर देकर कहा कि हैदराबाद केवल इतिहास, चारमीनार और बिरयानी तक सीमित नहीं है — यह शहर साइबर टावर्स और अत्याधुनिक तकनीक का वैश्विक केंद्र भी बन चुका है। उनके अनुसार, सालार जंग संग्रहालय इसी दोहरी पहचान का प्रतीक है — जहाँ अतीत और भविष्य एक साथ साँस लेते हैं। आने वाले वर्षों में इस संग्रहालय को एक विश्वस्तरीय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।