10 जुलाई 2026
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सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में पटना में एनडीए की अहम बैठक, विकसित बिहार के रोडमैप पर मंथन

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सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में पटना में एनडीए की अहम बैठक, विकसित बिहार के रोडमैप पर मंथन

सारांश

बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने पटना में एनडीए के पाँचों घटक दलों की अहम बैठक बुलाई — जिला अध्यक्षों से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक सब एक मंच पर। एजेंडा साफ है: अधूरे विकास कार्यों की समीक्षा, जमीनी सुझाव और विकसित बिहार की दिशा में गठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 10 जुलाई 2026 को पटना में एनडीए के पाँचों घटक दलों की संयुक्त बैठक बुलाई।
बैठक में एनडीए के सभी जिला अध्यक्ष, प्रदेश नेता, केंद्रीय मंत्री और बिहार सरकार के मंत्री शामिल हुए।
मुख्य एजेंडा: अधूरे विकास कार्यों की समीक्षा, धीमे सेक्टरों को गति देना और जमीनी सुझावों के आधार पर नीति-निर्माण।
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि सम्राट चौधरी सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले 100 दिन पूरे कर लिए हैं।
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने सरकार और संगठन के समन्वय को विकसित बिहार की कुंजी बताया।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 10 जुलाई 2026 को पटना में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें गठबंधन के पाँचों सदस्य दलों के जिला अध्यक्ष, प्रदेश नेता, केंद्रीय मंत्री और बिहार सरकार के मंत्री एकत्रित हुए। बैठक का केंद्रीय एजेंडा राज्य में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा, अधूरी परियोजनाओं को गति देना और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के सुझाव लेकर आगे की नीति तय करना रहा।

बैठक का उद्देश्य और संरचना

राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, 'यह सभी के लिए मिलने और इस पर चर्चा करने का मौका है कि सरकार बिहार में विकास को और कैसे तेज कर सकती है, सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक और अच्छे से कैसे पहुंचाया जा सकता है और किन सुझावों को शामिल किया जा सकता है।' बैठक में एनडीए के सभी घटक दलों के जिला अध्यक्ष, राज्य-स्तरीय नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष भाग ले रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने बैठक से पहले मीडिया को बताया, 'बिहार में एनडीए की सरकार है और सरकार और संगठन दोनों मिलकर एक विकसित बिहार बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। ऐसी बैठकें ज़रूरी योजनाओं पर चर्चा करने और उन्हें आकार देने के लिए होती हैं।'

विकास कार्यों की समीक्षा पर ज़ोर

मंत्री जमा खान ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह बैठक विशेष रूप से उन क्षेत्रों की समीक्षा के लिए बुलाई है जहाँ विकास कार्य अभी भी अधूरे हैं। उन्होंने कहा, 'चर्चा उन सेक्टरों पर केंद्रित होगी जहाँ काम धीमा रहा है और उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाने होंगे।' मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने भी बताया कि हर जिले की समस्याओं को सुना जाएगा और संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए जाएँगे।

मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि पहले नीतीश कुमार के नेतृत्व में और बाद में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए सरकार लगातार राज्य के विकास के लिए काम कर रही है। उन्होंने सरकार और संगठन के बीच समन्वय को अनिवार्य बताते हुए कहा कि संगठन के सुझाव नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

मंत्री संजय कुमार पासवान ने इसे 'अपनी तरह की पहली बैठक' बताते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री खुद पार्टी के कार्यकर्ता रहे हैं, इसलिए वे कैडर की भावनाओं को समझते हैं। आज सभी जिला अध्यक्षों को अपने विचार रखने का सही मंच दिया गया है।' वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के एमएलसी अशरफ अंसारी ने इसे 'रूटीन मामला' करार दिया और कहा कि जिला अध्यक्षों की ऐसी बैठकें पहले भी होती रही हैं।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष एवं मंत्री संतोष कुमार सुमन ने मुख्यमंत्री की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले जिला अध्यक्ष अपने सामने आने वाले मुद्दे सीधे उठा सकेंगे और सुझाव दे सकेंगे।

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, 'सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले 100 दिन पूरे कर लिए हैं। नीतीश कुमार की शानदार विरासत को आगे बढ़ाते हुए इस बैठक में सभी से सुझाव लिए जाएँगे।'

सरकार-संगठन समन्वय का संदेश

केंद्रीय राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी और मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने भी बैठक की अहमियत पर ज़ोर दिया। अरुण शंकर प्रसाद ने कहा, 'ऐसी बैठकों में अलग-अलग मुद्दे और चिंताएँ सामने आती हैं और उनके आधार पर पार्टी और एनडीए नीतियाँ बनाते हैं।' मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने इसे लोकतंत्र की असली खूबसूरती का प्रतीक बताया।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में आकार लेने लगी हैं और एनडीए गठबंधन अपनी एकजुटता और विकास-केंद्रित छवि को मज़बूत करने में जुटा है। आगे की बैठकों में जिला-स्तरीय समस्याओं के समाधान की कार्ययोजना तैयार किए जाने की उम्मीद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में एनडीए की बैठक क्यों बुलाई गई?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह बैठक बिहार में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा, अधूरी परियोजनाओं को गति देने और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से सुझाव लेने के लिए बुलाई। बैठक का उद्देश्य सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है।
इस एनडीए बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
बैठक में एनडीए के पाँचों घटक दलों के जिला अध्यक्ष, प्रदेश नेता, केंद्रीय मंत्री और बिहार सरकार के मंत्री शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, राजभूषण चौधरी और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
विकसित बिहार के लिए इस बैठक में क्या चर्चा हुई?
बैठक में उन सेक्टरों पर विशेष चर्चा हुई जहाँ विकास कार्य धीमे रहे हैं या अधूरे हैं। जिला अध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएँ और सुझाव रखने का अवसर दिया गया, जिनके आधार पर आगे की नीति तय की जाएगी।
सम्राट चौधरी सरकार ने अब तक कितने दिन पूरे किए हैं?
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार, सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले 100 दिन पूरे कर लिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए काम जारी है।
क्या यह एनडीए की पहली ऐसी बैठक है?
नेताओं की राय इस पर अलग-अलग रही। मंत्री संजय कुमार पासवान ने इसे 'अपनी तरह की पहली बैठक' बताया, जबकि एलजेपी (रामविलास) के एमएलसी अशरफ अंसारी ने कहा कि जिला अध्यक्षों की बैठकें पहले भी होती रही हैं और यह कोई नई बात नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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