मनसे नेता संदीप देशपांडे बोले — भारत में बांग्लादेश-नेपाल जैसी अराजकता नहीं, चुनाव से बदलेगी सत्ता
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारत एक सच्चा लोकतांत्रिक देश है और यहाँ सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव प्रक्रिया के ज़रिए होगा — बांग्लादेश या नेपाल जैसी सड़क-आंदोलन की अराजकता से नहीं। उन्होंने यह बात शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे की उस टिप्पणी के जवाब में कही, जिसमें ठाकरे ने कहा था कि जो सरकार नागरिकों से मतदान और विरोध-प्रदर्शन के अधिकार छीन ले, उसे बदल देना चाहिए।
वडाला ईआरओ कार्यालय में मतदाता सूची विवाद
देशपांडे ने बताया कि मनसे का एक प्रतिनिधिमंडल वडाला ईआरओ (Electoral Registration Officer) कार्यालय पहुँचा क्योंकि एसआईआर (Special Intensive Revision) के दौरान पार्टी के एक पदाधिकारी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
उन्होंने कहा, 'हमने ईआरओ को पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र — सभी ज़रूरी दस्तावेज़ दिखाए। अधिकारी ने कहा कि वे सबूतों से संतुष्ट हैं और हमें फॉर्म 6 भरने को कहा।' देशपांडे ने आपत्ति जताई कि फॉर्म 6 केवल नए मतदाताओं के लिए होता है, जिसमें यह घोषणा करनी होती है कि 'मैं पहले कभी मतदाता नहीं रहा।' उन्होंने कहा, 'मैं विधानसभा, लोकसभा और नगर निगम — तीनों चुनावों में मतदाता था। ऐसी झूठी घोषणा करना संभव नहीं।'
सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर देशपांडे ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया, 'एक ओर अभिजीत दिपके को हिरासत में लेकर कनॉट प्लेस जाने से रोका गया, वहीं कांग्रेस के लोगों को जाने दिया गया लेकिन सीजेपी के लोगों को रोका गया। यह विपक्ष को बाँटने की रणनीति है।' उन्होंने कहा कि भाजपा कुछ को अनुमति देकर और कुछ को रोककर विपक्षी एकता तोड़ना चाहती है, लेकिन उनका मानना है कि यह रणनीति सफल नहीं होगी।
उद्धव ठाकरे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया
ठाकरे की 'सरकार बदलने' वाली टिप्पणी पर देशपांडे ने तीन तरीकों का उल्लेख किया — पहला, चुनाव के ज़रिए; दूसरा, बांग्लादेश-नेपाल शैली के जन-आंदोलन से; और तीसरा, 'भाजपा की तरह' दूसरे दलों के जनप्रतिनिधियों को खरीदकर।
उन्होंने स्पष्ट किया, 'हम पहले तरीके में विश्वास करते हैं। उंगली पर लगने वाला स्याही का निशान ही सत्ता बदलेगा। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने भी जिस लोकतंत्र की कल्पना की थी, वह मतपत्र पर टिका था।' उन्होंने जोड़ा कि भारत एक सच्चा लोकतांत्रिक देश है और यहाँ के नागरिक लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं।
आगे का राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विभिन्न राजनीतिक दल मतदाता सूची की गुणवत्ता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष है, जो आगामी चुनावी मौसम में एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है।