17 जुलाई 2026
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आर्टिकल 370 बहाली की मांग 'आपत्तिजनक': संजय निरुपम ने सोज के बयान पर कांग्रेस से माँगा स्पष्टीकरण

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आर्टिकल 370 बहाली की मांग 'आपत्तिजनक': संजय निरुपम ने सोज के बयान पर कांग्रेस से माँगा स्पष्टीकरण

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज की आर्टिकल 370 बहाली और जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता देने की माँग को 'बेहद आपत्तिजनक' करार देते हुए कांग्रेस से सार्वजनिक स्पष्टीकरण माँगा। साथ ही उन्होंने ओटीटी सेंसरशिप, भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित बयान और कुणाल कामरा विवाद पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 16 जुलाई को मुंबई में कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के आर्टिकल 370 बहाली और जम्मू-कश्मीर को विशेष आंतरिक स्वायत्तता देने की माँग को 'बेहद आपत्तिजनक' बताया।
निरुपम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और उसे किसी भी प्रकार की विशेष स्वायत्तता देने का सवाल ही नहीं उठता।
मौलाना जर्जिस अंसारी के भगवान श्रीकृष्ण पर कथित विवादित बयान की निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणियाँ अस्वीकार्य हैं।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सेंसर बोर्ड प्रमाणन अनिवार्य किए जाने के संभावित कदम का समर्थन किया; 'सतलुज' फिल्म विवाद का हवाला दिया।
कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा की विशेषाधिकार समिति की कार्रवाई का समर्थन किया; भविष्य में भी कार्रवाई की चेतावनी दी।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 16 जुलाई को मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के जम्मू-कश्मीर में आंतरिक स्वायत्तता और आर्टिकल 370 की बहाली की माँग को 'बेहद आपत्तिजनक' करार दिया। उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की माँग की कि क्या पार्टी अपने वरिष्ठ नेता के इस बयान से सहमत है।

सोज के बयान पर निरुपम की कड़ी प्रतिक्रिया

निरुपम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को किसी भी प्रकार की विशेष आंतरिक स्वायत्तता देने का सवाल ही नहीं उठता। उनके अनुसार, जब कांग्रेस सत्ता में थी तब उसने आर्टिकल 370 हटाने से परहेज किया, जिससे अलगाववादी सोच को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि अब जब यह अनुच्छेद हट चुका है और जम्मू-कश्मीर देश की मुख्यधारा से जुड़ रहा है, ऐसे में आंतरिक स्वायत्तता की माँग उठाना न केवल अनुचित है, बल्कि देश की एकता के विरुद्ध भी है।

निरुपम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और अन्य राज्यों की तरह ही उसका देश में समान स्थान है। इसलिए वहाँ आर्टिकल 370 को दोबारा लागू करने या किसी विशेष आंतरिक स्वायत्तता की बात स्वीकार नहीं की जा सकती।'

मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित बयान पर आपत्ति

निरुपम ने मौलाना जर्जिस अंसारी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के बारे में दिए गए कथित विवादित बयान की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों हिंदुओं के आराध्य हैं और उनके बारे में इस प्रकार के दावे पूरी तरह अनुचित हैं। उनके अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का अस्तित्व उस काल का है जब इस्लाम का उदय भी नहीं हुआ था। निरुपम ने कहा कि किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व के बारे में भ्रामक या विवादित टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं।

ओटीटी सेंसरशिप पर सरकार के कदम का समर्थन

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सेंसर बोर्ड प्रमाणन अनिवार्य किए जाने की संभावित चर्चा पर निरुपम ने सरकार के इस संभावित कदम का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि सिनेमाघरों में दिखाई जाने वाली फिल्मों, नाटकों और विज्ञापन फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड का प्रमाणपत्र अनिवार्य है, जबकि ओटीटी प्लेटफॉर्म अब भी इस नियामक व्यवस्था से बाहर हैं।

उन्होंने हाल ही में 'सतलुज' फिल्म को लेकर उठे विवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि ओटीटी पर आने वाली सामग्री की भी समीक्षा होनी चाहिए, ताकि देशहित के विरुद्ध, भ्रामक या अश्लील सामग्री पर रोक लगाई जा सके।

कुणाल कामरा विवाद पर तीखी टिप्पणी

कॉमेडियन कुणाल कामरा पर निरुपम ने आरोप लगाया कि वे कॉमेडी की आड़ में राजनीतिक प्रचार करते हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के चलते कामरा के खिलाफ विधानसभा की विशेषाधिकार समिति कार्रवाई कर रही है। निरुपम ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की टिप्पणियाँ जारी रहीं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नियामक सीमाओं को लेकर बहस तेज़ हो रही है। निरुपम के इन बयानों ने एक साथ कई संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को केंद्र में ला दिया है, जिन पर आने वाले दिनों में और तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

धार्मिक भावनाएँ, ओटीटी नियमन और अभिव्यक्ति की सीमाएँ। गौरतलब है कि सैफुद्दीन सोज का बयान कांग्रेस की आधिकारिक स्थिति नहीं है, फिर भी निरुपम ने पूरी पार्टी को कठघरे में खड़ा किया — यह चुनावी ध्रुवीकरण की परिचित रणनीति है। ओटीटी सेंसरशिप के समर्थन और कुणाल कामरा पर टिप्पणी को जोड़कर देखें तो यह स्पष्ट है कि शिवसेना अभिव्यक्ति-नियंत्रण की सत्ता-पक्षीय लाइन को मज़बूत करने में जुटी है — जिस पर मुख्यधारा की मीडिया अक्सर पर्याप्त सवाल नहीं उठाती।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने सैफुद्दीन सोज के किस बयान पर आपत्ति जताई?
कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने जम्मू-कश्मीर में आंतरिक स्वायत्तता और आर्टिकल 370 की बहाली की माँग की थी। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने इसे 'बेहद आपत्तिजनक' बताते हुए कांग्रेस से पूछा कि क्या पार्टी इस बयान से सहमत है।
क्या जम्मू-कश्मीर को दोबारा विशेष दर्जा मिल सकता है?
संजय निरुपम के अनुसार जम्मू-कश्मीर को किसी भी प्रकार की विशेष आंतरिक स्वायत्तता देने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर देश की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और वह अन्य राज्यों की तरह ही भारत का अभिन्न अंग है।
कुणाल कामरा के खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के चलते कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ विधानसभा की विशेषाधिकार समिति कार्रवाई कर रही है। मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और कामरा को समिति के समक्ष पेश होना पड़ रहा है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सेंसर बोर्ड प्रमाणन को लेकर निरुपम का क्या रुख है?
संजय निरुपम ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सेंसर बोर्ड प्रमाणन अनिवार्य किए जाने के संभावित सरकारी कदम का समर्थन किया। उन्होंने 'सतलुज' फिल्म विवाद का हवाला देते हुए कहा कि ओटीटी सामग्री की भी समीक्षा होनी चाहिए ताकि देशहित-विरोधी, भ्रामक या अश्लील सामग्री पर रोक लगाई जा सके।
भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित बयान को लेकर निरुपम ने क्या कहा?
निरुपम ने मौलाना जर्जिस अंसारी के भगवान श्रीकृष्ण पर कथित विवादित बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों हिंदुओं के आराध्य हैं और किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व के बारे में भ्रामक या विवादित टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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