आर्टिकल 370 बहाली की मांग 'आपत्तिजनक': संजय निरुपम ने सोज के बयान पर कांग्रेस से माँगा स्पष्टीकरण
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 16 जुलाई को मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के जम्मू-कश्मीर में आंतरिक स्वायत्तता और आर्टिकल 370 की बहाली की माँग को 'बेहद आपत्तिजनक' करार दिया। उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की माँग की कि क्या पार्टी अपने वरिष्ठ नेता के इस बयान से सहमत है।
सोज के बयान पर निरुपम की कड़ी प्रतिक्रिया
निरुपम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को किसी भी प्रकार की विशेष आंतरिक स्वायत्तता देने का सवाल ही नहीं उठता। उनके अनुसार, जब कांग्रेस सत्ता में थी तब उसने आर्टिकल 370 हटाने से परहेज किया, जिससे अलगाववादी सोच को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि अब जब यह अनुच्छेद हट चुका है और जम्मू-कश्मीर देश की मुख्यधारा से जुड़ रहा है, ऐसे में आंतरिक स्वायत्तता की माँग उठाना न केवल अनुचित है, बल्कि देश की एकता के विरुद्ध भी है।
निरुपम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और अन्य राज्यों की तरह ही उसका देश में समान स्थान है। इसलिए वहाँ आर्टिकल 370 को दोबारा लागू करने या किसी विशेष आंतरिक स्वायत्तता की बात स्वीकार नहीं की जा सकती।'
मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित बयान पर आपत्ति
निरुपम ने मौलाना जर्जिस अंसारी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के बारे में दिए गए कथित विवादित बयान की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों हिंदुओं के आराध्य हैं और उनके बारे में इस प्रकार के दावे पूरी तरह अनुचित हैं। उनके अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का अस्तित्व उस काल का है जब इस्लाम का उदय भी नहीं हुआ था। निरुपम ने कहा कि किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व के बारे में भ्रामक या विवादित टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं।
ओटीटी सेंसरशिप पर सरकार के कदम का समर्थन
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सेंसर बोर्ड प्रमाणन अनिवार्य किए जाने की संभावित चर्चा पर निरुपम ने सरकार के इस संभावित कदम का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि सिनेमाघरों में दिखाई जाने वाली फिल्मों, नाटकों और विज्ञापन फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड का प्रमाणपत्र अनिवार्य है, जबकि ओटीटी प्लेटफॉर्म अब भी इस नियामक व्यवस्था से बाहर हैं।
उन्होंने हाल ही में 'सतलुज' फिल्म को लेकर उठे विवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि ओटीटी पर आने वाली सामग्री की भी समीक्षा होनी चाहिए, ताकि देशहित के विरुद्ध, भ्रामक या अश्लील सामग्री पर रोक लगाई जा सके।
कुणाल कामरा विवाद पर तीखी टिप्पणी
कॉमेडियन कुणाल कामरा पर निरुपम ने आरोप लगाया कि वे कॉमेडी की आड़ में राजनीतिक प्रचार करते हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के चलते कामरा के खिलाफ विधानसभा की विशेषाधिकार समिति कार्रवाई कर रही है। निरुपम ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की टिप्पणियाँ जारी रहीं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नियामक सीमाओं को लेकर बहस तेज़ हो रही है। निरुपम के इन बयानों ने एक साथ कई संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को केंद्र में ला दिया है, जिन पर आने वाले दिनों में और तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ सकती हैं।