17 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अनुच्छेद 370 बहाली की मांग: कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज बोले — 'मुस्लिम बहुल राज्य का विश्वास नहीं तोड़ा जा सकता'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अनुच्छेद 370 बहाली की मांग: कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज बोले — 'मुस्लिम बहुल राज्य का विश्वास नहीं तोड़ा जा सकता'

सारांश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज ने अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करते हुए कहा कि मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर ने धर्मनिरपेक्षता के भरोसे भारत में विलय किया था — और यह विश्वास नहीं तोड़ा जा सकता। उन्होंने क्षेत्रीय दलों से शांतिपूर्ण एकजुट आंदोलन की अपील की।

मुख्य बातें

वरिष्ठ कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने 2 जुलाई को श्रीनगर में अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग की।
सोज ने कहा कि केंद्र सरकार के पास अनुच्छेद 370 निरस्त करने का संवैधानिक अधिकार नहीं था।
उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस , PDP , अपनी पार्टी और कांग्रेस से एकजुट शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की।
सोज उन 117 हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल थे जिन्होंने PM मोदी और शहबाज शरीफ को भारत-पाक शत्रुता समाप्त करने के लिए पत्र लिखा था।
उन्होंने कहा कि युद्ध नहीं, संवाद ही दोनों देशों के बीच समाधान का एकमात्र रास्ता है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज ने 2 जुलाई को श्रीनगर में अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करते हुए कहा कि एक मुस्लिम-बहुसंख्यक राज्य ने हिंदू-बहुसंख्यक देश में जो विश्वास के आधार पर विलय स्वीकार किया था, उसे केंद्र सरकार नहीं तोड़ सकती। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), अपनी पार्टी और कांग्रेस से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को इस 'विश्वासघात' का अहसास कराएं।

सोज का मुख्य तर्क: विश्वास और धर्मनिरपेक्षता

सोज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने भारत में इसलिए विलय का विकल्प चुना था क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जो सहिष्णुता में विश्वास रखता है। उनके अनुसार, अनुच्छेद 370 इस क्षेत्र की आंतरिक स्वायत्तता का प्रतीक था और केंद्र सरकार के पास इसे निरस्त करने का संवैधानिक अधिकार नहीं था।

उन्होंने कहा, 'एक मुस्लिम बहुल राज्य ने हिंदू बहुल देश में विश्वास के आधार पर विलय स्वीकार किया था, जिसे केंद्र ने तोड़ दिया है। यदि वे सोचते हैं कि सैन्य और अर्धसैनिक बलों का उपयोग करके लोगों को जबरदस्ती चुप करा सकते हैं, तो यह अज्ञानता है और यह गलत है।'

भारत-पाकिस्तान संवाद पर सोज का पक्ष

गौरतलब है कि सोज उन 117 हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल थे जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ को दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त करने के लिए पत्र लिखा था। सोज ने कहा, 'मैं उन लोगों में से हूं जो मानते हैं कि युद्ध का कोई उद्देश्य नहीं होता। अंततः, संवाद ही एकमात्र रास्ता है।'

उन्होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी युद्धों के बाद अंततः समझौतों पर पहुँचा गया। उनके अनुसार, 'युद्ध के माहौल में बातचीत संभव नहीं है' और पाकिस्तान के साथ संवाद फिर से शुरू किया जाना चाहिए।

क्षेत्रीय दलों से एकजुटता की अपील

सोज ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा और सभी प्रमुख क्षेत्रीय दलों — नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP, अपनी पार्टी — से अनुरोध किया कि वे संयुक्त रूप से केंद्र सरकार से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे केंद्र को समझाएं कि अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया जाए।

यह ऐसे समय में आया है जब 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्वायत्तता का सवाल बार-बार उठता रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2023 में केंद्र के इस फैसले को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था।

आगे की राह

सोज ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग संविधान के दायरे में शांतिपूर्ण राजनीतिक आंदोलन की है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि वह जम्मू-कश्मीर पर अपना निर्णय थोपने के बजाय क्षेत्र की जनता और राजनीतिक प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित करे। यह देखना होगा कि क्या विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट मंच बना पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक दबाव की रणनीति है। विपक्षी दलों की एकजुटता की अपील पुरानी है, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के सत्ता में आने के बाद भी केंद्र से टकराव की सीमित गुंजाइश देखी गई है। भारत-पाकिस्तान संवाद पर 117 हस्ताक्षरकर्ताओं वाले पत्र को लेकर सोज की भूमिका उन्हें मुख्यधारा कांग्रेस की लाइन से अलग खड़ा करती है, जो इस विषय पर सावधानी बरतती है। असली सवाल यह है कि क्या यह बयान राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है या व्यक्तिगत पक्ष — और कांग्रेस नेतृत्व इससे कितनी दूरी बनाए रखेगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैफुद्दीन सोज ने अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग क्यों की?
सोज का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर ने भारत में विलय धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता के भरोसे किया था, और अनुच्छेद 370 उस आंतरिक स्वायत्तता का प्रतीक था। उनके अनुसार केंद्र सरकार के पास इसे निरस्त करने का संवैधानिक अधिकार नहीं था।
अनुच्छेद 370 क्या था और इसे कब हटाया गया?
अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्त दर्जा देता था। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को इसे निरस्त कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2023 में इस फैसले को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया।
सोज किस पत्र पर हस्ताक्षरकर्ता थे?
सोज उन 117 लोगों में शामिल थे जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त कर संवाद बहाल करने की अपील करते हुए पत्र लिखा था।
सोज ने किन दलों से एकजुट होने की अपील की?
उन्होंने जम्मू-कश्मीर विधानसभा और नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP, अपनी पार्टी तथा कांग्रेस से मिलकर केंद्र सरकार पर अनुच्छेद 370 बहाली के लिए शांतिपूर्ण दबाव बनाने की अपील की।
भारत-पाकिस्तान संवाद पर सोज का क्या रुख है?
सोज का मानना है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है और दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू होनी चाहिए। उन्होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि युद्ध के बाद भी अंततः समझौतों पर ही पहुँचा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले