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कबीर जयंती 2025: दिल्ली CM रेखा गुप्ता समेत नेताओं ने किया नमन, बताया समाज सुधार का अमर प्रकाश

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कबीर जयंती 2025: दिल्ली CM रेखा गुप्ता समेत नेताओं ने किया नमन, बताया समाज सुधार का अमर प्रकाश

सारांश

कबीर जयंती पर राजनीति एक स्वर में बोली — दिल्ली CM रेखा गुप्ता से लेकर BJP नेता नरोत्तम मिश्रा तक, सभी ने 15वीं सदी के संत-कवि को सामाजिक समरसता और सत्य के प्रतीक के रूप में याद किया। जातिगत भेदभाव और पाखंड के विरोध में कबीर का संदेश आज भी उतना ही तीखा है।

मुख्य बातें

28 जून को संत कबीर दास जी की जयंती पर देशभर के नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कबीर को 'सत्य, मानवता और समाज सुधार का अग्रदूत' बताया।
BJP नेता नरोत्तम मिश्रा ने कबीर के प्रसिद्ध दोहे 'ऐसी वाणी बोलिए...' का उल्लेख किया।
छत्तीसगढ़ के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और पटपड़गंज विधायक रविंदर सिंह नेगी ने भी श्रद्धांजलि दी।
विभिन्न दलों के नेताओं ने कबीर के अंधविश्वास-विरोधी और समानता के संदेश को आज के समाज के लिए प्रासंगिक बताया।

संत कबीर दास जी की जयंती पर रविवार, 28 जून को देशभर के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आज के समाज के लिए भी उतना ही प्रासंगिक बताया। नई दिल्ली से लेकर छत्तीसगढ़ तक, विभिन्न दलों के नेताओं ने कबीर के संदेश — सत्य, प्रेम और सामाजिक समरसता — को अपनी श्रद्धांजलि का केंद्र बनाया।

दिल्ली मुख्यमंत्री की श्रद्धांजलि

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट कर संत कबीर दास जी को नमन किया। उन्होंने लिखा, 'सत्य, मानवता और समाज सुधार के अग्रदूत, संत कबीर दास जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। कबीर जी की अमर वाणी समाज को अंधविश्वास और आडंबरों से दूर रहकर सत्य, प्रेम, समानता एवं मानवीय मूल्यों के पथ पर चलने की प्रेरणा देती है। उनके विचार सदैव समाज में सद्भाव, समरसता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते रहेंगे।'

विधायक और मंत्री का संदेश

पटपड़गंज विधायक रविंदर सिंह नेगी ने भी संत कबीर दास जी को उनकी जयंती पर नमन करते हुए कहा, 'महान कवि एवं समाज सुधारक संत कबीर दास जी के प्रकटोत्सव की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई।' छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी कबीर के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि उनका संदेश आज भी समाज को सत्य, प्रेम, समानता और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

भाजपा नेताओं ने किया दोहों का स्मरण

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता नरोत्तम मिश्रा ने एक्स पर पोस्ट कर कबीर दास जी के प्रसिद्ध दोहे — 'ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय॥' — का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'संत कबीर की वाणी केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कालजयी दिशा है। उनके दोहे हमें अंधविश्वास, पाखंड, जातिगत भेदभाव और संकीर्णता से ऊपर उठकर सत्य, प्रेम, करुणा, समानता और मानवीय मूल्यों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।' गौरतलब है कि मिश्रा ने कबीर को 'सत्य के अनवरत साधक और सामाजिक कुरीतियों के प्रखर विरोधी' के रूप में याद किया।

BJP नेता बीएल वर्मा ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए संत कबीर दास जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया और उनकी अमर वाणी को समाज के लिए मार्गदर्शक बताया।

कबीर का ऐतिहासिक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सामाजिक समरसता और जातिगत समानता पर बहस तेज है। 15वीं सदी के संत-कवि कबीर दास ने अपने दोहों और साखियों के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता, जाति-भेद के विरोध और आत्मचिंतन का संदेश दिया था — जो आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है। उनकी जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जाती है।

आगे का परिप्रेक्ष्य

विभिन्न दलों के नेताओं का एक स्वर में कबीर को नमन करना यह दर्शाता है कि उनकी विरासत राजनीतिक सीमाओं से परे है। आने वाले समय में सरकारी और सामाजिक संस्थाओं द्वारा कबीर के संदेश को शिक्षा और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल करने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विचारणीय यह है कि जिस कबीर ने जाति-व्यवस्था और धार्मिक आडंबर को सबसे तीखे शब्दों में ललकारा, उन्हें उन्हीं राजनीतिक दलों द्वारा याद किया जाता है जो जातिगत समीकरणों पर टिके हैं। कबीर का स्मरण यदि केवल एक्स-पोस्ट तक सीमित रहे और नीतिगत स्तर पर सामाजिक समानता की दिशा में ठोस कदम न उठाए जाएँ, तो यह श्रद्धांजलि प्रतीकात्मक ही रहेगी। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उद्धरणों की भरमार में यह सवाल चूक जाती है कि कबीर के विचारों को व्यवहार में उतारने की जवाबदेही किसकी है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संत कबीर दास जयंती कब और क्यों मनाई जाती है?
संत कबीर दास जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो इस वर्ष 28 जून को पड़ी। 15वीं सदी के संत-कवि कबीर दास ने अपने दोहों और साखियों के माध्यम से जाति-भेद, अंधविश्वास और धार्मिक पाखंड का विरोध किया था, इसलिए उन्हें समाज सुधार के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
कबीर जयंती पर किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
28 जून 2025 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, BJP नेता नरोत्तम मिश्रा और बीएल वर्मा, छत्तीसगढ़ के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, तथा पटपड़गंज विधायक रविंदर सिंह नेगी समेत कई नेताओं ने एक्स पर पोस्ट कर संत कबीर दास जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
नरोत्तम मिश्रा ने कबीर का कौन-सा दोहा उद्धृत किया?
BJP नेता नरोत्तम मिश्रा ने कबीर दास जी का प्रसिद्ध दोहा 'ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय॥' उद्धृत किया। उन्होंने इसके माध्यम से कबीर को सामाजिक कुरीतियों के प्रखर विरोधी और सत्य के साधक के रूप में याद किया।
दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने कबीर जयंती पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा कि कबीर जी की अमर वाणी समाज को अंधविश्वास और आडंबरों से दूर रहकर सत्य, प्रेम, समानता एवं मानवीय मूल्यों के पथ पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कबीर को 'सत्य, मानवता और समाज सुधार का अग्रदूत' बताया।
आज के दौर में कबीर दास के विचार क्यों प्रासंगिक हैं?
कबीर दास ने जाति-भेद, धार्मिक कट्टरता और सामाजिक असमानता के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी, जो आज भी भारतीय समाज की चुनौतियाँ हैं। नेताओं ने उनके संदेश को सद्भाव, समरसता और नैतिक जागरूकता के लिए मार्गदर्शक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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