कबीर जयंती 2026: गडकरी, नीतीश कुमार, रेखा गुप्ता समेत नेताओं ने संत कबीर दास को किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
29 जून 2026 को संत कबीर दास जयंती के अवसर पर देशभर के राजनेताओं ने महान संत-कवि को श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन उल्लेखनीय नामों में शामिल रहे जिन्होंने इस अवसर पर संत कबीर के जीवन-दर्शन को याद किया।
नेताओं की श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, 'संत कबीर दास जी के जयंती दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। कबीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।' राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने एक्स पर अपनी पोस्ट में संत कबीर को हिंदी साहित्य के भक्ति काल का महान कवि बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों का विरोध किया। उन्होंने जोड़ा, 'संत कबीर का जीवन दर्शन और उनकी काव्य रचना प्रेरणादायक है और हम सभी के लिए अनुकरणीय है।'
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा कि कबीर जी की अमर वाणी समाज को अंधविश्वास और आडंबरों से दूर रहकर 'सत्य, प्रेम, समानता और मानवीय मूल्यों के पथ पर चलने की प्रेरणा देती है।' उन्होंने कहा कि संत कबीर के विचार सदैव समाज में सद्भाव, समरसता और नैतिक मूल्यों को मज़बूत करते रहेंगे।
राजस्थान और बिहार के मुख्यमंत्रियों का संदेश
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संत कबीर दास को भक्ति आंदोलन का अग्रदूत और सामाजिक समरसता का प्रखर प्रवक्ता बताया। उन्होंने लिखा, 'उनकी अमर वाणी और जीवन दर्शन ने समाज को सदैव समानता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। मानवता को सर्वोपरि मानने का उनका संदेश आज भी समरस एवं जागरूक समाज के निर्माण में पथप्रदर्शक है।'
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संत कबीर को 'संत परंपरा के महान संत, समाज सुधारक और निर्गुण भक्ति धारा के प्रणेता' बताते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कबीर के दोहे, विचार और मानवता का संदेश आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करता है।
संत कबीर दास: एक परिचय
संत कबीर दास हिंदी साहित्य के भक्तिकाल के सर्वाधिक प्रभावशाली कवियों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में जाति-भेद, धार्मिक आडंबर और सामाजिक असमानता के विरुद्ध तीखी आवाज़ मिलती है। उनके दोहे और साखियाँ आज भी भारतीय समाज में उतनी ही प्रासंगिक मानी जाती हैं जितनी सदियों पहले थीं। गौरतलब है कि कबीर जयंती प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है।
राजनीतिक एकता का प्रतीक
यह उल्लेखनीय है कि विभिन्न दलों के नेताओं ने एक साथ इस अवसर पर श्रद्धांजलि दी — जो संत कबीर की विचारधारा की व्यापक स्वीकार्यता को रेखांकित करता है। केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर नेताओं का यह सामूहिक स्मरण सामाजिक समरसता के उनके संदेश को समकालीन राजनीतिक विमर्श से जोड़ने का प्रयास भी है।