उत्तराखंड की सपना राणा को जर्मनी में नर्सिंग नौकरी, ₹3,30,000 मासिक वेतन; सीएम धामी से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
टिहरी गढ़वाल की सपना राणा ने उत्तराखंड सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत जर्मन भाषा प्रशिक्षण हासिल कर जर्मनी के हैमबर्ग शहर के प्रतिष्ठित शॉन क्लीनिक हॉस्पिटल में नर्स के रूप में नियुक्ति पाई है। उन्हें 3,060 यूरो (लगभग ₹3,30,000) प्रतिमाह का वेतन मिलेगा। 24 जून 2025 को सपना राणा ने देहरादून स्थित सीएम आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की।
कैसे मिली यह उपलब्धि
सपना राणा ने अपनी स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, पोखाल, टिहरी गढ़वाल से और नर्सिंग की पढ़ाई स्टेट नर्सिंग कॉलेज, देहरादून से पूरी की। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार की योजना के अंतर्गत संचालित जर्मन भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया और भाषा परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। यह प्रशिक्षण कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अधीन गठित विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा संचालित किया जाता है।
मुख्यमंत्री धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विदेश रोजगार प्रकोष्ठ के माध्यम से राज्य के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 65 युवाओं को जापान में सेवायोजित किया जा चुका है और वर्तमान में जापान व जर्मनी दोनों देशों के लिए भाषा प्रशिक्षण जारी है।
कैबिनेट मंत्री का बयान
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि जर्मनी में नर्सिंग क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रकोष्ठ द्वारा जर्मन भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सपना राणा इस प्रशिक्षण का लाभ उठाकर जर्मनी में नर्स के रूप में चयनित होने वाली उत्तराखंड की प्रमुख उदाहरणों में से एक बन गई हैं।
आम जनता पर असर
यह उपलब्धि उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों की उन युवतियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित स्थानीय रोजगार के बीच अपना भविष्य तलाश रही हैं। गौरतलब है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में पलायन एक बड़ी चुनौती रही है — ऐसे में वैश्विक रोजगार योजना के तहत मिल रहे अवसर इस समस्या के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम माने जा रहे हैं। इस अवसर पर सचिव सी. रविशंकर भी उपस्थित रहे।
क्या होगा आगे
विदेश रोजगार प्रकोष्ठ जापान और जर्मनी के अलावा अन्य देशों में भी रोजगार के अवसर तलाशने की दिशा में काम कर रहा है। सपना राणा की सफलता इस योजना की व्यावहारिकता को रेखांकित करती है और उम्मीद है कि आने वाले महीनों में और युवाओं को इसी तरह के अवसर मिलेंगे।