सारा अली खान को केदारनाथ में दर्शन के लिए एफिडेविट जमा करना होगा, नए नियम से हलचल
सारांश
Key Takeaways
- श्रद्धालुओं को एफिडेविट देना होगा
- गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित
- सारा अली खान को भी नियम का पालन करना होगा
- नए नियम से दर्शन प्रक्रिया में बदलाव संभव
- आस्था के प्रमाण के लिए शपथ पत्र उपलब्ध होगा
मुंबई, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन इस बार यात्रा प्रारंभ होने से पहले एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। अब इन धामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को अपनी आस्था को प्रमाणित करने के लिए एफिडेविट देना होगा। इस निर्णय के बाद सबसे अधिक चर्चा बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के इर्द-गिर्द घूम रही है।
इस पर बद्री-केदार मंदिर कमेटी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यदि सारा अली खान भी केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए आती हैं, तो उन्हें भी सनातन धर्म में अपनी आस्था का एफिडेविट देना होगा। तभी उन्हें मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिलेगी।
असल में, बद्री-केदार मंदिर समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित कई मंदिरों में गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित रहेगा। हेमंत द्विवेदी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से हो, सनातन धर्म में अपनी आस्था व्यक्त करता है और इसके लिए शपथ पत्र प्रस्तुत करता है, तो उसे मंदिर में दर्शन की अनुमति दी जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सारा अली खान जैसी कोई प्रमुख हस्ती केदारनाथ आती हैं, और सनातन में अपनी आस्था प्रकट करती हैं तथा एफिडेविट देती हैं, तो उन्हें दर्शन से रोका नहीं जाएगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि सारा अली खान का केदारनाथ से विशेष संबंध है। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत फिल्म 'केदारनाथ' से की थी, जिसकी शूटिंग भी इसी क्षेत्र में हुई थी। इसके बाद से वह समय-समय पर केदारनाथ आती रहती हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए उनकी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं।
सारा अली खान के अलावा, जैकलीन फर्नांडिस भी केदारनाथ दर्शन कर चुकी हैं। वह वर्ष 2023 में केदारनाथ गई थीं। वहीं, 2024 में फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरुचा ने भी केदारनाथ का दौरा किया। टीवी स्टार हिना खान भी केदारनाथ का दौरा कर चुकी हैं।
नए नियम के तहत, मंदिर परिसर में ही श्रद्धालुओं को शपथ पत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे भरकर वे अपनी आस्था का प्रमाण दे सकेंगे। इसके बाद ही उन्हें मंदिर में प्रवेश मिलेगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद दर्शन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।