बिहार: सारण में तटबंध टूटने से 48 गाँव बाढ़ में डूबे, NH-722 पर पानी; 24,725 लोग प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के सारण जिले में 1 अक्टूबर 2026 को मकेर प्रखंड में तटबंध टूटने के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। तेज़ जलप्रवाह ने मकेर की सभी पंचायतों और अमनौर प्रखंड की कुछ पंचायतों को अपनी चपेट में ले लिया है, जबकि NH-722 पर पानी चढ़ जाने से आवागमन बाधित हो गया है। प्रशासनिक आँकड़ों के अनुसार, 18 पंचायतों के 48 गाँव और लगभग 24,725 लोग तथा 4,220 परिवार इस बाढ़ से प्रभावित हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मकेर प्रखंड में तटबंध टूटने के बाद पानी का बहाव परसा प्रखंड की ओर भी हो रहा है। इसके अतिरिक्त, पानापुर प्रखंड में भी एक स्थान पर तटबंध क्षतिग्रस्त होने से पानी तेज़ी से फैल रहा है। दो अलग-अलग स्थानों पर तटबंध टूटने से राहत एवं बचाव कार्यों पर दबाव बढ़ गया है।
गौरतलब है कि NH-722 पर जलभराव से जिले की संपर्कता आंशिक रूप से बाधित हो गई है, जिससे प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुँचाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार के कई जिले मानसून की भारी बारिश के बाद नदियों के बढ़ते जलस्तर से जूझ रहे हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं। जिलाधिकारी के अनुसार, रात से ही प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का काम निरंतर जारी है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 2 टीमें और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 3 टीमें (पानापुर में 2 और मुख्य प्रभावित क्षेत्र में 1) तैनात की गई हैं। इसके अलावा, SDRF के लगभग 40 सदस्यों वाली एक अतिरिक्त टीम भी बचाव कार्य में लगाई गई है।
प्रशासन ने राहत अभियान के लिए प्रभावित इलाकों में 33 नावें और 1 बोट एंबुलेंस उपलब्ध कराई है। राज्य सरकार के पशु विकास विभाग के सचिव और निदेशक भी प्रभावित क्षेत्र में कैंप करके स्थानीय प्रशासन को दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
आम जनता पर असर और राहत व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 5 चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं और पशु चिकित्सा के लिए भी अलग शिविर की व्यवस्था की गई है। एक राहत केंद्र में करीब 50 लोगों के रहने की व्यवस्था है।
भोजन के लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों में 14 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं — पानापुर में 2, तरैया में 3, अमनौर में 1, मकेर में 5 और परसा में 3। बुधवार को इन रसोइयों के माध्यम से करीब 5,000 लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई। मकेर में ज़रूरतमंद परिवारों के बीच 950 पॉलिथीन शीट का वितरण किया जा चुका है और पशुपालकों के लिए पशु चारे की भी व्यवस्था की जा रही है।
विशेषज्ञ और प्रशासन क्या कहते हैं
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता सभी प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और उनके लिए भोजन, चिकित्सा तथा अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। उन्होंने लोगों से प्रशासन और बचाव दलों का सहयोग करने की अपील की है।
प्रशासन ने लोगों को पानी में अनावश्यक रूप से न जाने और नदी व तटबंध के संवेदनशील क्षेत्रों में आवागमन से बचने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं और आवश्यकतानुसार मेडिकल कैंप बढ़ाए जा रहे हैं।
क्या होगा आगे
प्रशासन के अनुसार, जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों पर निरंतर नज़र रखी जा रही है। आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव संसाधनों को और बढ़ाया जाएगा। पंचायत स्तर पर भी सामुदायिक रसोई बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में परसा प्रखंड की अधिक पंचायतें भी प्रभावित हो सकती हैं।