राष्ट्रीय एकता दिवस: सरदार पटेल के रिश्तेदार ने मोदी को बताया 'दूरदर्शी', लौह पुरुष से की तुलना
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय एकता दिवस, 31 अक्टूबर 2026 के अवसर पर भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के रिश्तेदार भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजरात में हुई एक निजी मुलाकात का विवरण सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं उनके परिवार को याद किया और व्यक्तिगत रूप से मुलाकात का इंतजाम किया — एक ऐसा कदम जो उनके लिए अप्रत्याशित था।
एक्स पर साझा की मुलाकात की यादें
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुलाकात का विस्तृत विवरण साझा किया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने 'सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें याद करेंगे।' उनके इस कथन में आश्चर्य और कृतज्ञता दोनों स्पष्ट रूप से झलकती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की इस बात के लिए विशेष रूप से प्रशंसा की कि उन्होंने सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण में योगदान को मान्यता दी, जबकि सरदार पटेल भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसकी पूर्ववर्ती राजनीतिक विचारधारा से संबंधित नहीं थे।
सरदार पटेल की सार्वजनिक जवाबदेही का किस्सा
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने एक प्रसंग सुनाया जो सरदार पटेल के चरित्र को रेखांकित करता है। उनके अनुसार, बारडोली सत्याग्रह में भाग लेने वाले सरदार पटेल के एक आजीवन मित्र जब दिल्ली आए, तो पटेल ने उनका अपने आवास पर हार्दिक स्वागत किया और दो दिनों तक स्वयं उन्हें राजधानी दिखाई।
परंतु जब मित्र के लौटने का समय आया, तो सरदार पटेल ने उनके लिए निजी टैक्सी किराए पर बुलवाई। इस पर उनकी पुत्री मणिबेन ने अचरज से पूछा कि सरकारी गाड़ी का उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता। सरदार पटेल का उत्तर था: 'गाड़ी सरकार की है और जनता के पैसे का एक भी रुपया निजी कामों पर खर्च नहीं किया जाएगा।'
यह प्रसंग सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के प्रति सरदार पटेल की असमझौतावादी नीति को दर्शाता है — एक ऐसी मिसाल जो आज भी प्रासंगिक मानी जाती है।
मोदी और पटेल: समानता का दावा
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने सरदार पटेल के सिद्धांतों और प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली के बीच समानता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 'सरदार पटेल का उतना सम्मान शायद ही किसी ने किया होगा, जितना नरेंद्र भाई ने किया है।' उनके अनुसार, 'पीएम मोदी भी सरदार पटेल की तरह ही दूरदर्शी हैं।'
गौरतलब है कि यह तुलना उस व्यक्ति की ओर से की जा रही है जो सरदार पटेल के परिवार से संबंध रखते हैं, और जिनकी पटेल के प्रति निष्ठा राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक है।
राष्ट्रीय एकता दिवस का संदर्भ
भारत प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाता है — यह सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। स्वतंत्रता के बाद 500 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में एकीकृत करने में उनकी भूमिका के कारण उन्हें 'भारत के लौह पुरुष' की उपाधि दी गई। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा — के निर्माण के माध्यम से पटेल को श्रद्धांजलि दी है।
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय एकता दिवस पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं और सरदार पटेल की विरासत पर एक बार फिर राष्ट्रीय बहस तेज़ हुई है। आने वाले दिनों में इस प्रसंग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है।