17 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चंदौली में स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ साड़ी-सिल्क बैग से बनीं आत्मनिर्भर, ODOP योजना बनी बदलाव की कड़ी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चंदौली में स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ साड़ी-सिल्क बैग से बनीं आत्मनिर्भर, ODOP योजना बनी बदलाव की कड़ी

सारांश

चंदौली की महिलाएँ ODOP और NRLM की बदौलत साड़ी फैक्ट्री और सिल्क बैग निर्माण से आत्मनिर्भर बन रही हैं — अब वे 11 से अधिक लोगों को रोज़गार देती हैं और बच्चों को पढ़ा पा रही हैं। यह ज़मीनी बदलाव दिखाता है कि सरकारी योजनाएँ कागज़ से ज़मीन पर कैसे उतरती हैं।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के चंदौली में स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ ODOP और NRLM योजनाओं के तहत साड़ी व सिल्क बैग निर्माण कर रही हैं।
एक साड़ी फैक्ट्री इकाई से 11 लोग सीधे जुड़े हुए हैं।
'गोपाल आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह' सिल्क बैग बनाकर स्थानीय प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाती है।
जरी-जरदोज़ी के काम ने महिलाओं को न केवल आय दी, बल्कि बच्चों की शिक्षा में निवेश का सामर्थ्य भी दिया।
NRLM की बैठकों और स्टॉल के ज़रिए उत्पाद व्यापक बाज़ार तक पहुँच रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाएँ अब केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं — वे साड़ी निर्माण और सिल्क बैग तैयार करके न सिर्फ खुद कमाई कर रही हैं, बल्कि दूसरों को भी रोज़गार दे रही हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। यह बदलाव 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर और भी चर्चा में आया, जब इन महिलाओं ने अपनी आत्मनिर्भरता की कहानियाँ साझा कीं।

साड़ी फैक्ट्री से जुड़ीं महिलाओं की कहानी

चंदौली की एक लाभार्थी महिला के अनुसार, साड़ी बनाने की इकाई से 11 लोग सीधे जुड़े हुए हैं — वे न सिर्फ खुद साड़ियाँ तैयार करती हैं, बल्कि अन्य कारीगरों से भी काम करवाती हैं। एक महिला ने बताया, 'पहले हम खाली बैठे रहते थे, लेकिन अब काम करते हैं। पहले कुछ भी उपलब्ध नहीं था और हम बस घर पर बैठे रहते थे।' उन्होंने यह भी कहा कि अब वे अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा पा रही हैं — जो पहले संभव नहीं था।

गोपाल आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह की पहल

'गोपाल आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह' की सदस्याएँ सिल्क बैग निर्माण में लगी हैं। समूह की एक सदस्य ने बताया कि वे बैग बनाने का सामान घर भी ले जाती हैं, और जब भी NRLM के तहत गाँव में बैठक होती है या उन्हें कहीं बुलाया जाता है, तो वे वहाँ अपना स्टॉल लगाती हैं। यह मॉडल उन्हें न केवल आय देता है, बल्कि स्थानीय बाज़ार में अपनी पहचान बनाने का अवसर भी देता है।

ODOP और NRLM: बदलाव की असली कड़ी

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के अंतर्गत जरी-जरदोज़ी का काम चंदौली की पहचान बन रहा है। इस योजना के माध्यम से महिला समूहों को कच्चा माल, प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़ने की सुविधा मिली है। NRLM की बैठकों और प्रदर्शनियों के ज़रिए इन उत्पादों को व्यापक बाज़ार तक पहुँचाया जा रहा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का यह मॉडल देशभर में अनुकरणीय माना जा रहा है।

आम जनता पर असर

इन समूहों की सफलता का प्रभाव सिर्फ आय तक सीमित नहीं है। महिलाओं का कहना है कि अब वे अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर पा रही हैं और परिवार की आर्थिक ज़रूरतों में बराबर की हिस्सेदार बन गई हैं। यह सामाजिक बदलाव — आर्थिक स्वावलंबन से सामाजिक सशक्तीकरण तक — इन योजनाओं की दीर्घकालिक सफलता का सबसे बड़ा पैमाना है।

क्या होगा आगे

ODOP और NRLM के ढाँचे के तहत इन समूहों को डिजिटल बाज़ार और निर्यात से जोड़ने की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन महिला उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म और बैंक ऋण तक आसान पहुँच मिले, तो चंदौली जैसे ज़िले राष्ट्रीय हस्तशिल्प मानचित्र पर और मज़बूती से उभर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें नीति-सफलता का पैमाना मानने से पहले कुछ सवाल ज़रूरी हैं — इन समूहों की औसत मासिक आय क्या है, और क्या यह न्यूनतम मज़दूरी से ऊपर है? ODOP और NRLM जैसी योजनाओं की पहुँच अभी भी उन महिलाओं तक सीमित है जो पहले से जागरूक हैं या जिनके पास सामाजिक नेटवर्क है। असली चुनौती उन्हें डिजिटल बाज़ार, निर्यात चैनल और संस्थागत ऋण से जोड़ना है, जो अब तक बड़े पैमाने पर नहीं हो पाया है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंदौली में स्वयं सहायता समूह क्या काम करते हैं?
चंदौली में स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ मुख्य रूप से साड़ी निर्माण और सिल्क बैग तैयार करने का काम करती हैं। ODOP योजना के तहत जरी-जरदोज़ी उनकी प्रमुख आजीविका बनी है।
ODOP योजना से महिलाओं को क्या फायदा हुआ?
ODOP यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत चंदौली की महिलाओं को जरी-जरदोज़ी के काम के लिए कच्चा माल, प्रशिक्षण और बाज़ार से जुड़ाव मिला है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनी हैं और अपने परिवार की ज़रूरतें खुद पूरी कर पा रही हैं।
'गोपाल आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह' क्या करता है?
यह समूह सिल्क बैग निर्माण में लगा है। इसकी सदस्याएँ बैग बनाने का सामान घर ले जाकर भी काम करती हैं और NRLM की बैठकों व प्रदर्शनियों में अपना स्टॉल लगाकर उत्पाद बेचती हैं।
NRLM यानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन क्या है?
NRLM केंद्र सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जो ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है। यह मिशन समूहों को बैठकें, प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़ने की सुविधा देता है।
इन समूहों से कितने लोगों को रोज़गार मिला है?
चंदौली में एक साड़ी फैक्ट्री इकाई से कम से कम 11 लोग सीधे जुड़े हुए हैं। इसके अलावा महिलाएँ अन्य कारीगरों से भी काम करवाती हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रोज़गार का दायरा और व्यापक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले