चंदौली में स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ साड़ी-सिल्क बैग से बनीं आत्मनिर्भर, ODOP योजना बनी बदलाव की कड़ी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाएँ अब केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं — वे साड़ी निर्माण और सिल्क बैग तैयार करके न सिर्फ खुद कमाई कर रही हैं, बल्कि दूसरों को भी रोज़गार दे रही हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। यह बदलाव 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर और भी चर्चा में आया, जब इन महिलाओं ने अपनी आत्मनिर्भरता की कहानियाँ साझा कीं।
साड़ी फैक्ट्री से जुड़ीं महिलाओं की कहानी
चंदौली की एक लाभार्थी महिला के अनुसार, साड़ी बनाने की इकाई से 11 लोग सीधे जुड़े हुए हैं — वे न सिर्फ खुद साड़ियाँ तैयार करती हैं, बल्कि अन्य कारीगरों से भी काम करवाती हैं। एक महिला ने बताया, 'पहले हम खाली बैठे रहते थे, लेकिन अब काम करते हैं। पहले कुछ भी उपलब्ध नहीं था और हम बस घर पर बैठे रहते थे।' उन्होंने यह भी कहा कि अब वे अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा पा रही हैं — जो पहले संभव नहीं था।
गोपाल आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह की पहल
'गोपाल आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह' की सदस्याएँ सिल्क बैग निर्माण में लगी हैं। समूह की एक सदस्य ने बताया कि वे बैग बनाने का सामान घर भी ले जाती हैं, और जब भी NRLM के तहत गाँव में बैठक होती है या उन्हें कहीं बुलाया जाता है, तो वे वहाँ अपना स्टॉल लगाती हैं। यह मॉडल उन्हें न केवल आय देता है, बल्कि स्थानीय बाज़ार में अपनी पहचान बनाने का अवसर भी देता है।
ODOP और NRLM: बदलाव की असली कड़ी
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के अंतर्गत जरी-जरदोज़ी का काम चंदौली की पहचान बन रहा है। इस योजना के माध्यम से महिला समूहों को कच्चा माल, प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़ने की सुविधा मिली है। NRLM की बैठकों और प्रदर्शनियों के ज़रिए इन उत्पादों को व्यापक बाज़ार तक पहुँचाया जा रहा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का यह मॉडल देशभर में अनुकरणीय माना जा रहा है।
आम जनता पर असर
इन समूहों की सफलता का प्रभाव सिर्फ आय तक सीमित नहीं है। महिलाओं का कहना है कि अब वे अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर पा रही हैं और परिवार की आर्थिक ज़रूरतों में बराबर की हिस्सेदार बन गई हैं। यह सामाजिक बदलाव — आर्थिक स्वावलंबन से सामाजिक सशक्तीकरण तक — इन योजनाओं की दीर्घकालिक सफलता का सबसे बड़ा पैमाना है।
क्या होगा आगे
ODOP और NRLM के ढाँचे के तहत इन समूहों को डिजिटल बाज़ार और निर्यात से जोड़ने की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन महिला उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म और बैंक ऋण तक आसान पहुँच मिले, तो चंदौली जैसे ज़िले राष्ट्रीय हस्तशिल्प मानचित्र पर और मज़बूती से उभर सकते हैं।