सावन के दूसरे सोमवार पर तुंगारेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, वसई-विरार में कुंभ जैसा नज़ारा
सारांश
मुख्य बातें
सावन के दूसरे सोमवार पर 10 अगस्त को मुंबई के निकट वसई स्थित प्रसिद्ध तुंगारेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। भोर से ही 'हर-हर महादेव' और 'ॐ नमः शिवाय' के उद्घोष से पूरा तुंगारेश्वर क्षेत्र भक्तिमय हो उठा और मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग गईं।
मुख्य घटनाक्रम
पहाड़ी पर स्थित तुंगारेश्वर महादेव मंदिर में वसई-विरार के अलावा आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचे। कई भक्त सुबह लगभग 4 बजे से ही मंदिर के द्वार पर एकत्रित होने लगे थे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया, पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि व कल्याण की मनोकामना माँगी।
यह ऐसे समय में आया है जब सावन का पवित्र महीना पूरे महाराष्ट्र में शिवभक्ति की लहर लेकर आया है। गौरतलब है कि तुंगारेश्वर मंदिर वर्षभर तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, किंतु सावन के सोमवारों पर यहाँ की भीड़ कई गुना बढ़ जाती है।
सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों पर विशेष सुरक्षा एवं भीड़ नियंत्रण के इंतज़ाम किए। सुरक्षाकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी लगातार भीड़ को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराने में तैनात रहे।
वसई-विरार के छोटे-बड़े सभी शिव मंदिरों में भी सुबह से भक्तों की भारी उपस्थिति दर्ज की गई। पूरे क्षेत्र में शिवभक्ति का वातावरण छाया रहा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
इस अवसर पर विजयानंद जी महाराज सारस्वत ने कहा, 'सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। सोमवार के दिन सनातन धर्म के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है और आज बड़े से छोटे सभी शिव मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'श्री तुंगारेश्वर महादेव मंदिर में तो कुंभ जैसा नज़ारा दिखाई दे रहा है। शिव का अर्थ ही कल्याण है और जो सभी के कल्याण की कामना करता है, वही शिव है।'
विजयानंद जी महाराज ने कांवड़ परंपरा का महत्त्व समझाते हुए कहा, 'श्रद्धालु कांवड़ और जल लेकर कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर भगवान शिव के दरबार में पहुँचते हैं। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी आस्था और भक्ति का प्रतीक है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने का आध्यात्मिक अर्थ केवल अभिषेक करना नहीं — भक्त अपने अहंकार, द्वेष और नकारात्मक विचारों को भी भगवान शिव को समर्पित करते हैं।'
उन्होंने 'सत्यम् शिवम् सुंदरम्' के भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि शिव प्रकाश, ज्योति और निराकार स्वरूप के प्रतीक हैं और सनातन धर्म में साकार व निराकार दोनों स्वरूपों की उपासना की जाती है।
आम जनता पर असर
सावन के इस पर्व ने वसई-विरार के व्यापारिक और सामाजिक जीवन पर भी असर डाला। मंदिर के आसपास प्रसाद, फूल-माला और धार्मिक सामग्री की दुकानों पर भी विशेष रौनक देखी गई। स्थानीय परिवहन पर अतिरिक्त दबाव को देखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग भी सुझाए।
क्या होगा आगे
सावन माह में अभी और सोमवार शेष हैं और अनुमान है कि आने वाले सप्ताहों में भी तुंगारेश्वर महादेव मंदिर सहित वसई-विरार के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ इसी प्रकार उमड़ती रहेगी। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य के सोमवारों पर भी विशेष व्यवस्थाएँ जारी रहेंगी।