3 अगस्त 2026
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सावन के पहले सोमवार पर प्रयागराज-एटा के शिव मंदिरों में उमड़े लाखों श्रद्धालु, रात से लगीं कतारें

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सावन के पहले सोमवार पर प्रयागराज-एटा के शिव मंदिरों में उमड़े लाखों श्रद्धालु, रात से लगीं कतारें

सारांश

सावन के पहले सोमवार पर प्रयागराज और एटा के शिवालयों में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा। रात से लगी कतारें, 51 लीटर गंगाजल लेकर पहुँचे कांवड़िए और 150 साल पुराने कैलाश मंदिर में तड़के तीन बजे खुले कपाट — यह उत्तर प्रदेश में शिव-भक्ति की गहरी जड़ों का जीवंत प्रमाण है।

मुख्य बातें

3 अगस्त को सावन के पहले सोमवार पर उत्तर प्रदेश के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर में भोर से पहले ही लंबी कतारें लग गईं; मंदिर का उल्लेख पुराणों में कामेश्वर तीर्थ के रूप में मिलता है।
एटा के 150 वर्ष पुराने कैलाश मंदिर के कपाट सुबह तीन बजे खोले गए; सुबह चार बजे मंगला आरती के बाद जलाभिषेक शुरू हुआ।
कासगंज के लहरा गंगा घाट से कांवड़िए 51 लीटर गंगाजल लेकर पैदल एटा पहुँचे।
पूरे यात्रा मार्ग पर पुलिस तैनाती रही; प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए।

सावन के पवित्र महीने के पहले सोमवार, 3 अगस्त को उत्तर प्रदेश के शिवालयों में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। प्रयागराज और एटा सहित पूरे प्रदेश में श्रद्धालु देर रात से ही मंदिरों के बाहर कतारबद्ध होने लगे थे — गंगाजल, बेलपत्र और पुष्पों से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने की उत्कट चाह लिए।

मनकामेश्वर मंदिर में भक्तिमय वातावरण

प्रयागराज स्थित मनकामेश्वर मंदिर में भोर होने से पहले ही श्रद्धालुओं की लंबी पंक्तियाँ लग चुकी थीं। भक्त गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और फूल लेकर जलाभिषेक के लिए पहुँचे, जबकि मंदिर परिसर भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से गूँज उठा।

मंदिर के महंत ब्रह्मचारी धरानंद जी महाराज ने बताया कि यह अत्यंत प्राचीन तीर्थस्थल है, जिसका उल्लेख पुराणों में कामेश्वर तीर्थ के रूप में मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी यहाँ शिव-पूजन किया था। उन्होंने कहा, 'जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से यहाँ पूजा करता है, भगवान शिव उसकी मनोकामनाएँ अवश्य पूरी करते हैं।'

एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि सावन के पहले सोमवार का विशेष आध्यात्मिक महत्व होने के कारण वे सुबह से ही मंदिर पहुँच गईं। एक अन्य भक्त ने कहा कि वे सुबह लगभग चार बजे मंदिर पहुँचे और लंबी प्रतीक्षा के बाद दर्शन किए — 'इंतजार लंबा था, लेकिन भगवान के दर्शन के बाद सारी थकान जाती रही और मन को असीम शांति मिली।' एक श्रद्धालु ने यह भी बताया कि रातभर वर्षा होती रही, फिर भी उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई।

एटा के ऐतिहासिक कैलाश मंदिर में तड़के खुले कपाट

एटा के करीब 150 वर्ष पुराने कैलाश मंदिर में सुबह तीन बजे कपाट खोल दिए गए। सुबह चार बजे मंगला आरती के पश्चात जलाभिषेक का अनवरत सिलसिला शुरू हुआ।

मंदिर के मुख्य पुजारी धीरेंद्र झा ने बताया कि सावन के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु रुद्राभिषेक, विशेष पूजा और भंडारे के आयोजन के लिए यहाँ आते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे सावन भर भक्तों का यहाँ आना-जाना अनवरत जारी रहता है।

कांवड़ियों की पदयात्रा और प्रशासनिक व्यवस्था

कासगंज के लहरा गंगा घाट से कांवड़िए 51 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर पैदल एटा के कैलाश मंदिर पहुँचे। कांवड़िए गौरव, अरुण कुमार और नीरज ने बताया कि वे प्रतिवर्ष इस यात्रा पर निकलते हैं, क्योंकि सावन के पहले सोमवार पर जलाभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व है।

यात्रा मार्ग पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा अन्य व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गईं, जिससे यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हुई।

सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मंदिर परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए। पुलिस और प्रशासनिक दल लगातार व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे, ताकि दर्शन और जलाभिषेक शांतिपूर्वक संपन्न हो सकें।

यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह में शिव-भक्ति की परंपरा प्रतिवर्ष और अधिक व्यापक होती जा रही है। आने वाले सोमवारों पर भी प्रदेश भर के शिवालयों में इसी तरह की भीड़ उमड़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश में शिव-भक्ति की संस्थागत गहराई का संकेत है — जहाँ 150 साल पुराने मंदिर आज भी लाखों श्रद्धालुओं के लिए जीवंत केंद्र बने हुए हैं। गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा का दायरा और संगठन हर वर्ष विस्तृत होता जा रहा है, जो स्थानीय प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा की दृष्टि से एक बढ़ती चुनौती भी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर भावनात्मक दृश्यों तक सिमट जाती है, जबकि इन आयोजनों के पीछे की लॉजिस्टिक्स — जल-आपूर्ति, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा व्यवस्था — की पड़ताल उतनी ही जरूरी है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन के पहले सोमवार का क्या महत्व है?
सावन का पहला सोमवार शिव-भक्तों के लिए सर्वाधिक पवित्र दिनों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जलाभिषेक और पूजन से भगवान शिव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
प्रयागराज का मनकामेश्वर मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
मनकामेश्वर मंदिर एक अत्यंत प्राचीन शिव तीर्थ है, जिसका उल्लेख पुराणों में कामेश्वर तीर्थ के रूप में मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी यहाँ शिव-पूजन किया था।
एटा के कैलाश मंदिर में सावन पर क्या विशेष आयोजन होते हैं?
करीब 150 वर्ष पुराने इस मंदिर में सावन के दौरान रुद्राभिषेक, विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन होता है। इस वर्ष सुबह तीन बजे कपाट खोले गए और चार बजे मंगला आरती के बाद जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ।
कांवड़िए कहाँ से गंगाजल लेकर एटा पहुँचे?
कासगंज के लहरा गंगा घाट से कांवड़िए 51 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर पैदल एटा के कैलाश मंदिर पहुँचे। पूरे मार्ग पर पुलिस तैनाती रही, जिससे यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हुई।
सावन के शेष सोमवारों पर भी इसी तरह की भीड़ रहेगी?
प्रशासनिक अधिकारियों और मंदिर पुजारियों के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। आने वाले सोमवारों पर भी इसी तरह की भीड़ की संभावना है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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