सावन के पहले सोमवार पर प्रयागराज-एटा के शिव मंदिरों में उमड़े लाखों श्रद्धालु, रात से लगीं कतारें
सारांश
मुख्य बातें
सावन के पवित्र महीने के पहले सोमवार, 3 अगस्त को उत्तर प्रदेश के शिवालयों में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। प्रयागराज और एटा सहित पूरे प्रदेश में श्रद्धालु देर रात से ही मंदिरों के बाहर कतारबद्ध होने लगे थे — गंगाजल, बेलपत्र और पुष्पों से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने की उत्कट चाह लिए।
मनकामेश्वर मंदिर में भक्तिमय वातावरण
प्रयागराज स्थित मनकामेश्वर मंदिर में भोर होने से पहले ही श्रद्धालुओं की लंबी पंक्तियाँ लग चुकी थीं। भक्त गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और फूल लेकर जलाभिषेक के लिए पहुँचे, जबकि मंदिर परिसर भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से गूँज उठा।
मंदिर के महंत ब्रह्मचारी धरानंद जी महाराज ने बताया कि यह अत्यंत प्राचीन तीर्थस्थल है, जिसका उल्लेख पुराणों में कामेश्वर तीर्थ के रूप में मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी यहाँ शिव-पूजन किया था। उन्होंने कहा, 'जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से यहाँ पूजा करता है, भगवान शिव उसकी मनोकामनाएँ अवश्य पूरी करते हैं।'
एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि सावन के पहले सोमवार का विशेष आध्यात्मिक महत्व होने के कारण वे सुबह से ही मंदिर पहुँच गईं। एक अन्य भक्त ने कहा कि वे सुबह लगभग चार बजे मंदिर पहुँचे और लंबी प्रतीक्षा के बाद दर्शन किए — 'इंतजार लंबा था, लेकिन भगवान के दर्शन के बाद सारी थकान जाती रही और मन को असीम शांति मिली।' एक श्रद्धालु ने यह भी बताया कि रातभर वर्षा होती रही, फिर भी उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई।
एटा के ऐतिहासिक कैलाश मंदिर में तड़के खुले कपाट
एटा के करीब 150 वर्ष पुराने कैलाश मंदिर में सुबह तीन बजे कपाट खोल दिए गए। सुबह चार बजे मंगला आरती के पश्चात जलाभिषेक का अनवरत सिलसिला शुरू हुआ।
मंदिर के मुख्य पुजारी धीरेंद्र झा ने बताया कि सावन के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु रुद्राभिषेक, विशेष पूजा और भंडारे के आयोजन के लिए यहाँ आते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे सावन भर भक्तों का यहाँ आना-जाना अनवरत जारी रहता है।
कांवड़ियों की पदयात्रा और प्रशासनिक व्यवस्था
कासगंज के लहरा गंगा घाट से कांवड़िए 51 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर पैदल एटा के कैलाश मंदिर पहुँचे। कांवड़िए गौरव, अरुण कुमार और नीरज ने बताया कि वे प्रतिवर्ष इस यात्रा पर निकलते हैं, क्योंकि सावन के पहले सोमवार पर जलाभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व है।
यात्रा मार्ग पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा अन्य व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गईं, जिससे यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हुई।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मंदिर परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए। पुलिस और प्रशासनिक दल लगातार व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे, ताकि दर्शन और जलाभिषेक शांतिपूर्वक संपन्न हो सकें।
यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह में शिव-भक्ति की परंपरा प्रतिवर्ष और अधिक व्यापक होती जा रही है। आने वाले सोमवारों पर भी प्रदेश भर के शिवालयों में इसी तरह की भीड़ उमड़ने की संभावना है।