नालंदा मंदिर में भगदड़ पर सीमा मलिक का बयान: कठोर जांच और जिम्मेदारी की मांग
सारांश
Key Takeaways
- नालंदा मंदिर में भगदड़ एक दुखद घटना है।
- सीमा मलिक ने कड़ी जांच की मांग की है।
- कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं हैं।
- घुसपैठ पर आंकड़ों का विन्दु।
- नक्सलवाद के मुद्दे पर सवाल उठाए गए।
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एनसीपी (शरद पवार) की प्रमुख सीमा मलिक ने नालंदा मंदिर में हुई भगदड़ को लेकर राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए इसे एक दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि इस देश में नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं है।
मलिक ने कहा कि पहले भी हमने ऐसे हादसे देखे हैं, जैसे कुंभ मेले में भगदड़, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर, और कर्नाटक में आईपीएल जीत के जश्न के दौरान। इन घटनाओं में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई। लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन घटनाओं के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं ली जाती। ऐसे हादसे दोबारा नहीं होने चाहिए और इनकी कड़ी जांच होनी चाहिए, साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
देहरादून में एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर की हत्या पर उन्होंने कहा कि यह एक और दुखद घटना है। हत्या के कारणों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं हैं। हत्या और दुष्कर्म की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और इसके लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। पारदर्शी जांच जरूरी है।
नक्सलवाद पर संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर मलिक ने सवाल उठाया कि नक्सलमुक्त भारत के लिए आपने क्या कदम उठाए हैं? उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इंदिरा गांधी और नेहरू पर आरोप लगाने से समस्याएं हल नहीं होंगी। अर्बन नक्सली के नाम पर विपक्ष को निशाना बनाना उचित नहीं है। यदि आप देशभक्त हैं तो राहुल गांधी भी आपसे अधिक देशभक्त हैं।
घुसपैठ को लेकर सीमा मलिक ने कहा कि असम में एनआरसी किया गया था, लेकिन जिनकी पहचान की गई है, उन्हें वापस क्यों नहीं भेजा गया? यूपीए सरकार के दौरान 2005 से 2014 तक लगभग 88,700 लोगों को डिपोर्ट किया गया था, लेकिन 2014 से 2024 तक केवल तीन हजार के आसपास लोगों को ही डिपोर्ट किया गया है।