सेना एविएशन कोर का 41वां स्थापना दिवस: सियाचिन से आपदा राहत तक अटूट सेवा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना एविएशन कोर ने 1 नवंबर 2026 को अपना 41वां स्थापना दिवस मनाया। 1 नवंबर 1986 को स्थापित यह कोर चार दशकों से अधिक के सफर में भारतीय थलसेना की एक अपरिहार्य हवाई शक्ति के रूप में विकसित हुई है। टोही अभियानों से लेकर घायल सैनिकों की निकासी और दुर्गम क्षेत्रों में रसद आपूर्ति तक, इसकी भूमिका बहुआयामी और अत्यंत महत्वपूर्ण है।
स्थापना दिवस समारोह
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने इस अवसर पर एविएशन कोर के सभी कार्यरत एवं सेवानिवृत्त सैनिकों को शुभकामनाएं दीं। सेना एविएशन कोर के महानिदेशक और कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल विनोद नांबियार ने वीर जवानों को नमन किया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
दुर्गम इलाकों में अभियान क्षमता
सियाचिन जैसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण और ऊंचाई वाले इलाकों में भी कोर निरंतर अपनी ज़िम्मेदारी निभाती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालित इसके अभियान सेना की पहुंच और युद्धक्षेत्र में त्वरित कार्रवाई की क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। कोर के विमान और हेलीकॉप्टर दुश्मन की गतिविधियों की टोह लेने, निगरानी करने, सैनिकों की तेज़ आवाजाही सुनिश्चित करने और ज़रूरत पड़ने पर घायल जवानों को सुरक्षित क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
आधुनिकीकरण की दिशा में कदम
सेना के अनुसार, बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए कोर अपनी क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए आधुनिक हवाई प्लेटफॉर्म को शामिल किया जा रहा है। साथ ही, दूर से संचालित होने वाली विमान प्रणालियों — रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS) — को भी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया जा रहा है। इन तकनीकों से युद्धक्षेत्र की बेहतर जानकारी जुटाने, त्वरित निर्णय लेने और किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब देने की क्षमता सुदृढ़ हो रही है।
आपदा राहत में भूमिका
सेना एविएशन कोर केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में भी यह अग्रणी भूमिका निभाती है। मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के दौरान प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने और ज़रूरतमंदों को सुरक्षित स्थानों पर निकालने में इसके हवाई संसाधन अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो।
बलिदानियों को स्मरण
41वें स्थापना दिवस पर कोर ने उन वीर जवानों को भी याद किया, जिन्होंने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। पूर्व सैनिकों के योगदान और सैनिकों के परिजनों के निरंतर सहयोग को भी विशेष रूप से सराहा गया। 'सुवेग व सदृढ़' के ध्येय वाक्य के साथ कोर आधुनिक तकनीक और बेहतर हवाई क्षमताओं के जरिए देश की सुरक्षा में अपना योगदान जारी रखेगी।