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शक्ति शर्मा बनीं पहली महिला एयर वाइस मार्शल (गैर-चिकित्सकीय), 1 सितंबर को संभाला पदभार

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शक्ति शर्मा बनीं पहली महिला एयर वाइस मार्शल (गैर-चिकित्सकीय), 1 सितंबर को संभाला पदभार

सारांश

शक्ति शर्मा ने 1 सितंबर को वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) का पदभार संभालकर इतिहास रच दिया — वह गैर-चिकित्सकीय शाखा से एयर वाइस मार्शल बनने वाली भारत की पहली महिला अधिकारी हैं। 1994 में कमीशन से शुरू हुआ यह सफर तीन दशकों की अटूट सेवा का प्रमाण है।

मुख्य बातें

एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा भारतीय रक्षा सेवाओं की गैर-चिकित्सकीय शाखा से एयर वाइस मार्शल रैंक तक पहुँचने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।
उन्होंने 1 सितंबर 2026 को वायुसेना मुख्यालय, नई दिल्ली में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) का पदभार ग्रहण किया।
शर्मा को 18 जून 1994 को वायुसेना की शिक्षा शाखा में कमीशन मिला था — तीन दशक से अधिक की सेवा के बाद यह उपलब्धि।
वह तीनों सेनाओं में सैनिक स्कूल कपूरथला की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी भी रह चुकी हैं।
आईआईटी कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में वायुसेना की 'चेयर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करना उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल।

भारतीय वायुसेना की एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने 1 सितंबर 2026 को वायुसेना मुख्यालय, नई दिल्ली में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) का पदभार ग्रहण कर इतिहास रच दिया। वह भारतीय रक्षा सेवाओं की गैर-चिकित्सकीय शाखा से एयर वाइस मार्शल की रैंक तक पहुँचने वाली देश की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। इससे पहले इस स्तर की रैंक पर महिला अधिकारियों की उपस्थिति मुख्यतः चिकित्सा शाखा तक ही सीमित रही थी।

तीन दशक की सेवा का सफर

शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था। तीन दशक से अधिक के अपने करियर में उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों, फील्ड स्टेशनों, कमान मुख्यालयों और वायुसेना मुख्यालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर दायित्व निभाए। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनके अनुभव का दायरा शिक्षा, प्रशिक्षण, संस्थागत विकास और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों तक फैला रहा।

शैक्षणिक संस्थानों से रणनीतिक सहयोग

एयर वाइस मार्शल शर्मा के करियर की एक उल्लेखनीय उपलब्धि आईआईटी कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में वायुसेना की 'चेयर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना रही। इन पहलों का उद्देश्य प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और रक्षा क्षेत्र के बीच शोध, शिक्षा और रणनीतिक विषयों पर सहयोग को बढ़ावा देना था। यह पहल वायुसेना की बौद्धिक और रणनीतिक क्षमता को मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जाती है।

सैनिक स्कूल की कमान संभालने वाली पहली महिला

यह पहली बार नहीं है जब शक्ति शर्मा ने कोई ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया हो। इससे पहले वह तीनों सेनाओं में से किसी भी शाखा की पहली महिला अधिकारी बनी थीं जिन्होंने किसी सैनिक स्कूल की कमान संभाली। उन्होंने सैनिक स्कूल कपूरथला की प्रधानाचार्य के रूप में यह ज़िम्मेदारी निभाई — एक ऐसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान का नेतृत्व जो परंपरागत रूप से पुरुष अधिकारियों के अधीन रहा है।

भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए नया मानदंड

एयर वाइस मार्शल शर्मा की यह पदोन्नति ऐसे समय में आई है जब भारतीय सशस्त्र बल महिलाओं की भूमिका को लगातार विस्तृत कर रहे हैं — लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर स्थायी कमीशन तक। गौरतलब है कि दो-स्टार रैंक तक पहुँचना भारतीय सैन्य ढाँचे में शीर्ष नेतृत्व का प्रतीक है, और गैर-चिकित्सकीय शाखा में यह उपलब्धि हासिल करना अपने आप में एक नज़ीर है। उनका करियर यह रेखांकित करता है कि महिला अधिकारी अब केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्थागत नेतृत्व और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भी शीर्ष स्थान ग्रहण कर रही हैं।

आगे की राह

सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) के रूप में एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा अब वायुसेना की शैक्षिक नीति, प्रशिक्षण ढाँचे और संस्थागत विकास की दिशा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगी। उनकी यह नियुक्ति भारतीय वायुसेना के आदर्श वाक्य 'नभः स्पृशं दीप्तम्' — अर्थात 'गौरव के साथ आकाश को छूना' — को एक नया अर्थ देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस संस्थागत बदलाव का संकेत है जो भारतीय सशस्त्र बलों में धीरे-धीरे आ रहा है — लेकिन अभी भी बेहद धीमी गति से। यह ध्यान देने योग्य है कि गैर-चिकित्सकीय शाखा में दो-स्टार रैंक तक पहुँचने में एक महिला अधिकारी को 32 वर्ष लग गए, जो यह भी बताता है कि संरचनात्मक बाधाएँ अभी पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं। स्थायी कमीशन और लड़ाकू भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती स्वीकार्यता के बावजूद, वरिष्ठ नेतृत्व में उनकी संख्या अभी भी सीमित है। असली प्रगति तब मानी जाएगी जब ऐसी नियुक्तियाँ 'पहली बार' की श्रेणी से निकलकर 'सामान्य' बन जाएँ।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शक्ति शर्मा कौन हैं और उन्होंने क्या इतिहास रचा है?
एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा की अधिकारी हैं, जो गैर-चिकित्सकीय शाखा से एयर वाइस मार्शल रैंक प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला अधिकारी बनी हैं। उन्होंने 1 सितंबर 2026 को वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) का पदभार संभाला।
गैर-चिकित्सकीय शाखा में यह उपलब्धि इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
इससे पहले भारतीय रक्षा सेवाओं में एयर वाइस मार्शल स्तर की रैंक पर महिला अधिकारियों की उपस्थिति केवल चिकित्सा शाखा (डॉक्टर) तक सीमित थी। गैर-चिकित्सकीय शाखा में यह रैंक हासिल करना एक संरचनात्मक बाधा को पार करना है, जो भारतीय सशस्त्र बलों में महिला नेतृत्व के लिए नया मानदंड स्थापित करता है।
शक्ति शर्मा ने इससे पहले कौन-सा ऐतिहासिक कदम उठाया था?
शक्ति शर्मा तीनों सेनाओं में से किसी भी शाखा की पहली महिला अधिकारी थीं जिन्होंने किसी सैनिक स्कूल की कमान संभाली। उन्होंने सैनिक स्कूल कपूरथला की प्रधानाचार्य के रूप में यह ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
शक्ति शर्मा का वायुसेना में करियर कब शुरू हुआ और उन्होंने क्या-क्या भूमिकाएँ निभाई हैं?
उन्हें 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा में कमीशन मिला था। तीन दशक से अधिक के करियर में उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों, फील्ड स्टेशनों, कमान मुख्यालयों और वायुसेना मुख्यालय में काम किया। इसके अलावा उन्होंने आईआईटी कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में वायुसेना की 'चेयर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना भी की।
सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) की भूमिका में शक्ति शर्मा क्या करेंगी?
इस पद पर वह भारतीय वायुसेना की शैक्षिक नीति, प्रशिक्षण ढाँचे और संस्थागत विकास की दिशा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पद शिक्षा, अनुसंधान और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कार्यों का समन्वय करता है।
राष्ट्र प्रेस
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