राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आईएमए पासिंग आउट परेड की समीक्षा की, एनडीए की पहली महिला बैच की 9 कैडेट बनीं अधिकारी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 14 जून 2025 को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की। यह परेड भारतीय सेना के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पहले महिला बैच की 9 कैडेट्स आज थलसेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त कर रही हैं।
ऐतिहासिक क्षण: एनडीए की पहली महिला बैच
गौरतलब है कि जून 2022 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद ही महिलाओं को एनडीए में प्रवेश का अधिकार मिला था — इससे पहले यह द्वार उनके लिए बंद था। उस फैसले के बाद कड़ी प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुज़रकर आज ये कैडेट देश की सेवा के लिए तैयार खड़ी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका को लेकर नीतिगत बदलाव की गति तेज़ हुई है।
आईएमए से 515 कैडेट पासआउट, 34 विदेशी कैडेट भी शामिल
इस वर्ष आईएमए से कुल 515 कैडेट पासआउट हो रहे हैं, जिनमें 16 देशों के 34 विदेशी कैडेट भी सम्मिलित हैं। एनडीए की पहली महिला बैच की 9 महिला कैडेट भारतीय थलसेना में अधिकारी के रूप में शामिल होंगी। इसके साथ ही हैदराबाद के डुंडीगल स्थित भारतीय वायुसेना अकादमी में 5 महिला कैडेट्स वायुसेना में कमीशन प्राप्त करेंगी।
वायुसेना अकादमी में रक्षा मंत्री की उपस्थिति
डुंडीगल वायुसेना अकादमी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय वायुसेना के 217वें कोर्स के तहत फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच के कुल 231 फ्लाइट कैडेट प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग पूरी कर रहे हैं। इनमें 194 पुरुष और 37 महिला कैडेट शामिल हैं, जिनमें से 5 एनडीए की पहली महिला बैच की हैं।
भव्य एयर शो रहा मुख्य आकर्षण
कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड के समापन अवसर पर सुखोई लड़ाकू विमानों, सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम के प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन सैन्य शक्ति और नारी सशक्तिकरण दोनों का प्रतीक बनकर उभरा।
आगे की राह
एनडीए से कमीशन प्राप्त इन महिला अधिकारियों की तैनाती अब विभिन्न रेजिमेंट और यूनिटों में होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहला बैच आने वाली पीढ़ियों की महिला कैडेट्स के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगा और सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक ठोस कदम है।