आईएमए देहरादून से निकलेंगे केन्या-लेसोथो के भावी सैन्य अधिकारी, 13 जून को पासिंग आउट परेड
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून का ऐतिहासिक परिसर 13 जून 2026 को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग का जीवंत प्रमाण बनने जा रहा है। इस दिन होने वाली पासिंग आउट परेड में भारतीय कैडेटों के साथ-साथ अफ्रीकी देशों केन्या और लेसोथो से आए विदेशी अधिकारी कैडेट भी अपने-अपने देशों में सैन्य नेतृत्व की नई जिम्मेदारियाँ संभालने के लिए कदम बढ़ाएंगे। यह परेड केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि भारत और मित्र राष्ट्रों के बीच गहराते रक्षा संबंधों का प्रतीक है।
कैडेटों का परिवर्तनकारी अनुभव
लेसोथो से आए अधिकारी कैडेट ने पासिंग आउट परेड से पूर्व अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आईएमए में बिताया गया समय उनके जीवन का सबसे परिवर्तनकारी दौर रहा। उनके अनुसार, कठोर सैन्य प्रशिक्षण, चुनौतीपूर्ण अभ्यास और नेतृत्व विकास के अवसरों ने उन्हें एक बेहतर सैनिक और जिम्मेदार अधिकारी बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि आईएमए ने यह सिखाया कि एक सफल सैन्य अधिकारी की पहचान केवल युद्ध कौशल से नहीं, बल्कि चरित्र, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता से होती है।
विभिन्न राज्यों, संस्कृतियों और देशों के कैडेटों के साथ प्रशिक्षण ने उनके सैन्य ज्ञान के साथ-साथ वैश्विक दृष्टिकोण को भी विस्तार दिया। यह बहुसांस्कृतिक वातावरण आईएमए की उन विशेषताओं में से एक है जो इसे दुनिया की प्रतिष्ठित सैन्य अकादमियों से अलग करती है।
केन्याई कैडेट की दृष्टि में आईएमए
केन्या से आए अधिकारी कैडेट ने कहा कि अकादमी में हर दिन नई चुनौतियाँ लेकर आता था, लेकिन इन्हीं चुनौतियों ने उन्हें अधिक आत्मविश्वासी, सक्षम और जिम्मेदार बनाया। कठिन प्रशिक्षण, सामूहिक अभ्यास और साथी कैडेटों के साथ बिताए गए क्षणों ने उनके भीतर भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत किया। उनके अनुसार, भारत में प्राप्त नेतृत्व, अनुशासन और पेशेवर उत्कृष्टता के सिद्धांत भविष्य में उनकी सैन्य सेवा में अमूल्य साबित होंगे।
भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग का प्रतीक
विदेशी कैडेटों की ये यात्राएँ केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों की कहानी नहीं हैं — ये भारत और अफ्रीकी देशों के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों का भी प्रमाण हैं। केन्या और भारत के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से विश्वास, सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहा है। आईएमए में प्रशिक्षित केन्याई कैडेट इस सहयोग को और सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी प्रकार, लेसोथो जैसे मित्र देशों के सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान कर भारत न केवल अपनी सैन्य विशेषज्ञता साझा कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर पेशेवर सैन्य नेतृत्व के विकास में भी योगदान दे रहा है। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण है जब भारत अपनी 'ग्लोबल साउथ' नीति के तहत अफ्रीकी देशों के साथ संबंध प्रगाढ़ कर रहा है।
चेतवुड भवन: परंपरा और गौरव का संगम
13 जून को चेतवुड भवन की भव्य पृष्ठभूमि में जब पासिंग आउट परेड का आयोजन होगा, तब 'द वर्ड ऑफ एन ऑफिसर इज़ हिज़ बॉन्ड' की उद्घोषणा के साथ कैडेट अंतिम पग भरकर अधिकारी बनने की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आईएमए में केवल अधिकारी नहीं गढ़े जाते — यहाँ ऐसे नेता तैयार किए जाते हैं जो सीमाओं से परे मित्रता, सहयोग और पेशेवर उत्कृष्टता की भावना को आगे बढ़ाते हैं।
वर्षों से आईएमए दुनिया के अनेक देशों के कैडेटों को प्रशिक्षित करता रहा है, और इसने अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग का एक सशक्त मंच तैयार किया है। केन्या और लेसोथो के इन युवा सैन्य नेताओं की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सैन्य प्रशिक्षण केवल कौशल निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्रों को जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु भी है।