शरजील इमाम को कड़कड़डूमा कोर्ट से अंतरिम जमानत, 4-10 अक्टूबर तक चचेरे भाई की शादी में होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को जेल में बंद छात्र नेता शरजील इमाम को उनके चचेरे भाई की शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह जमानत 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक के लिए मंजूर की गई है। इमाम पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) सहित अन्य कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है।
अंतरिम जमानत का आधार
अदालत ने शरजील इमाम को यह राहत विशेष रूप से पारिवारिक कारण — चचेरे भाई के विवाह समारोह में सहभागिता — के आधार पर दी है। कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा दी गई यह जमानत सीमित अवधि की है और इसमें तय शर्तें लागू होंगी। गौरतलब है कि इमाम की नियमित जमानत याचिकाएं अभी तक स्वीकार नहीं हुई हैं।
न्यायालयों में मामले की स्थिति
दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने पहले इमाम की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा नियमित जमानत अस्वीकार किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने इमाम के साथ-साथ सह-आरोपी उमर खालिद की नियमित जमानत याचिकाएं भी खारिज की थीं।
ट्रायल कोर्ट ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के 5 जनवरी के उस आदेश का संदर्भ दिया था, जिसमें जमानत देने से इनकार करते हुए वे परिस्थितियाँ स्पष्ट की गई थीं जिनमें दोनों नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका और UAPA प्रश्न
इस साल की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय ने इमाम और खालिद को जमानत देने से यह कहते हुए इनकार किया था कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य से प्रथमदृष्टया ऐसे आधार मिलते हैं जिनसे UAPA की धारा 43डी(5) के तहत कानूनी रोक लागू होती है। उल्लेखनीय है कि उसी मामले में पाँच अन्य सह-आरोपियों को जमानत दी जा चुकी थी।
हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने सह-आरोपी तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को छह माह की अंतरिम जमानत दी। साथ ही, एक बड़ी पीठ को यह संवैधानिक प्रश्न भेजा गया है कि क्या UAPA की धारा 43डी(5) के प्रतिबंधों के बावजूद लंबे समय तक कारावास और ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत दी जा सकती है। यह प्रश्न इस पूरे मामले में कानूनी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दिल्ली पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय में इमाम और खालिद की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है। पुलिस ने कथित तौर पर दोनों को साजिश का मास्टरमाइंड बताया है और तर्क दिया है कि सर्वोच्च न्यायालय के 5 जनवरी के आदेश को देखते हुए नई याचिकाएं विचारणीय नहीं हैं। पुलिस का यह रुख मामले की कार्यवाही में एक निर्णायक कारक बना हुआ है।
मामले की पृष्ठभूमि
शरजील इमाम उन कई आरोपियों में शामिल हैं जिन पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े आरोप में UAPA और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय में UAPA के तहत दीर्घकालिक कारावास और ट्रायल की धीमी प्रगति पर व्यापक बहस जारी है। अंतरिम जमानत की समाप्ति के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।