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शरजील इमाम को कड़कड़डूमा कोर्ट से अंतरिम जमानत, 4-10 अक्टूबर तक चचेरे भाई की शादी में होंगे शामिल

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शरजील इमाम को कड़कड़डूमा कोर्ट से अंतरिम जमानत, 4-10 अक्टूबर तक चचेरे भाई की शादी में होंगे शामिल

सारांश

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को 4 से 10 अक्टूबर तक चचेरे भाई की शादी में शामिल होने की अनुमति दी। नियमित जमानत अभी भी लंबित है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में UAPA की धारा 43डी(5) के तहत दीर्घकालिक कारावास में जमानत के बड़े कानूनी सवाल पर बड़ी पीठ विचार करेगी।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को 4 से 10 अक्टूबर 2026 तक अंतरिम जमानत दी — चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए।
इमाम पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश में UAPA और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं।
सर्वोच्च न्यायालय ने एक बड़ी पीठ को भेजा है यह प्रश्न — क्या UAPA धारा 43डी(5) के बावजूद लंबे कारावास पर जमानत दी जा सकती है।
सह-आरोपी तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को हाल ही में 6 माह की अंतरिम जमानत मिली थी।
दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय में जमानत याचिकाओं का विरोध किया, दोनों को कथित साजिश का मास्टरमाइंड बताया।

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को जेल में बंद छात्र नेता शरजील इमाम को उनके चचेरे भाई की शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह जमानत 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक के लिए मंजूर की गई है। इमाम पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) सहित अन्य कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है।

अंतरिम जमानत का आधार

अदालत ने शरजील इमाम को यह राहत विशेष रूप से पारिवारिक कारण — चचेरे भाई के विवाह समारोह में सहभागिता — के आधार पर दी है। कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा दी गई यह जमानत सीमित अवधि की है और इसमें तय शर्तें लागू होंगी। गौरतलब है कि इमाम की नियमित जमानत याचिकाएं अभी तक स्वीकार नहीं हुई हैं।

न्यायालयों में मामले की स्थिति

दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने पहले इमाम की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा नियमित जमानत अस्वीकार किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने इमाम के साथ-साथ सह-आरोपी उमर खालिद की नियमित जमानत याचिकाएं भी खारिज की थीं।

ट्रायल कोर्ट ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के 5 जनवरी के उस आदेश का संदर्भ दिया था, जिसमें जमानत देने से इनकार करते हुए वे परिस्थितियाँ स्पष्ट की गई थीं जिनमें दोनों नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका और UAPA प्रश्न

इस साल की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय ने इमाम और खालिद को जमानत देने से यह कहते हुए इनकार किया था कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य से प्रथमदृष्टया ऐसे आधार मिलते हैं जिनसे UAPA की धारा 43डी(5) के तहत कानूनी रोक लागू होती है। उल्लेखनीय है कि उसी मामले में पाँच अन्य सह-आरोपियों को जमानत दी जा चुकी थी।

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने सह-आरोपी तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को छह माह की अंतरिम जमानत दी। साथ ही, एक बड़ी पीठ को यह संवैधानिक प्रश्न भेजा गया है कि क्या UAPA की धारा 43डी(5) के प्रतिबंधों के बावजूद लंबे समय तक कारावास और ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत दी जा सकती है। यह प्रश्न इस पूरे मामले में कानूनी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दिल्ली पुलिस का पक्ष

दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय में इमाम और खालिद की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है। पुलिस ने कथित तौर पर दोनों को साजिश का मास्टरमाइंड बताया है और तर्क दिया है कि सर्वोच्च न्यायालय के 5 जनवरी के आदेश को देखते हुए नई याचिकाएं विचारणीय नहीं हैं। पुलिस का यह रुख मामले की कार्यवाही में एक निर्णायक कारक बना हुआ है।

मामले की पृष्ठभूमि

शरजील इमाम उन कई आरोपियों में शामिल हैं जिन पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े आरोप में UAPA और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय में UAPA के तहत दीर्घकालिक कारावास और ट्रायल की धीमी प्रगति पर व्यापक बहस जारी है। अंतरिम जमानत की समाप्ति के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि पाँच सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है — यह असमानता ही वह केंद्रीय विरोधाभास है जिस पर व्यापक बहस आवश्यक है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर जमानत की तात्कालिक खबर पर रुक जाती है; लेकिन असली मुद्दा यह है कि UAPA के तहत ट्रायल कितनी धीमी गति से चल रहा है और इसका नागरिक स्वतंत्रता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरजील इमाम को अंतरिम जमानत क्यों मिली?
दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को उनके चचेरे भाई की शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर 2026 तक की अंतरिम जमानत दी है। यह जमानत केवल इस पारिवारिक कारण के आधार पर सीमित अवधि के लिए है।
शरजील इमाम पर क्या आरोप हैं?
शरजील इमाम पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और अन्य कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। दिल्ली पुलिस ने उन्हें इस कथित साजिश का मास्टरमाइंड बताया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने इमाम की जमानत क्यों खारिज की थी?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में यह कहते हुए जमानत देने से इनकार किया था कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य से प्रथमदृष्टया ऐसे आधार मिलते हैं जिनसे UAPA की धारा 43डी(5) के तहत कानूनी रोक लागू होती है। कोर्ट ने 5 जनवरी के अपने आदेश में वे परिस्थितियाँ भी स्पष्ट की थीं जिनमें नई याचिका दाखिल की जा सकती है।
UAPA धारा 43डी(5) पर सर्वोच्च न्यायालय का बड़ा सवाल क्या है?
सर्वोच्च न्यायालय ने एक बड़ी पीठ को यह संवैधानिक प्रश्न भेजा है कि क्या UAPA की धारा 43डी(5) के तहत प्रतिबंधों के बावजूद लंबे समय तक कारावास और ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत दी जा सकती है। यह प्रश्न इस मामले के अन्य आरोपियों की स्थिति पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
उमर खालिद और अन्य सह-आरोपियों की जमानत की स्थिति क्या है?
उमर खालिद की नियमित जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है और वे अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। हालाँकि सह-आरोपी तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में 6 माह की अंतरिम जमानत दी है, जबकि पाँच अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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