शौर्य दीप डॉक्यूमेंट्री का पुणे में प्रीमियर, पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल पीवी नाइक रहे मुख्य अतिथि
सारांश
मुख्य बातें
शहीद मेजर प्रदीप आर ताथावड़े, कीर्ति चक्र की वीरगाथा को परदे पर जीवंत करने वाली डॉक्यूमेंट्री 'शौर्य दीप शहीद मेजर प्रदीप ताथावड़े, कीर्ति चक्र' का विशेष प्रीमियर 21 जून 2025 को पुणे के कोथरूड स्थित सिटी प्राइड थिएटर में आयोजित किया गया। भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल पीवी नाइक (सेवानिवृत्त) इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मेजर ताथावड़े के परिजन, सैनिक स्कूल सतारा के पूर्व छात्र और बड़ी संख्या में नागरिक सम्मिलित हुए।
शहीद मेजर ताथावड़े का बलिदान और सम्मान
सैनिक स्कूल सतारा के पूर्व छात्र मेजर प्रदीप ताथावड़े ने 17 जून 2000 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में आतंकवादियों के विरुद्ध सैन्य अभियान के दौरान असाधारण वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उस समय उनकी आयु मात्र 37 वर्ष थी। उनके इस सर्वोच्च बलिदान और अदम्य साहस के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया — जो शांतिकाल में प्रदान किया जाने वाला देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। वे सैनिक स्कूल सतारा से वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले सर्वोच्च सम्मानित पूर्व छात्र हैं।
डॉक्यूमेंट्री की विशेषताएँ
निर्देशक शेखर नाइक द्वारा निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री 2 घंटे 33 मिनट की है और मेजर ताथावड़े के जीवन, व्यक्तित्व, शिक्षा तथा सैन्य करियर की विस्तृत झलक प्रस्तुत करती है। इस परियोजना की पहल सैनिक स्कूल सतारा के 1981 बैच के उनके सहपाठियों ने की थी। फिल्म में उनके परिवार, सैनिक स्कूल, नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के मित्रों और 8 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के साथियों के साक्षात्कार शामिल हैं।
फिल्मांकन के स्थान और साक्षात्कार
इस डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग भारतीय सेना की आधिकारिक अनुमति से देश के अनेक महत्वपूर्ण सैन्य और ऐतिहासिक स्थलों पर की गई। पुंछ, जम्मू, श्रीनगर, कुपवाड़ा, लेह-लद्दाख, सियाचिन बेस कैंप, नई दिल्ली, हैदराबाद, नासिक, पुणे, सतारा, बेलगाम, कोलकाता और आगरा सहित अनेक स्थानों पर फिल्मांकन हुआ। मेजर ताथावड़े को करीब से जानने वाले लोगों की स्मृतियों को संजोने के लिए लगभग 60 विस्तृत साक्षात्कार रिकॉर्ड किए गए।
निर्देशक का दृष्टिकोण
निर्देशक शेखर नाइक ने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री एक सैनिक को समझने की उनकी व्यक्तिगत यात्रा रही है। उन्होंने बताया कि फिल्म के माध्यम से दर्शकों को न केवल मेजर ताथावड़े के जीवन और कर्तव्यनिष्ठा की झलक मिलेगी, बल्कि भारतीय सेना के अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति को भी करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
आगे का कार्यक्रम
अब इस डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन देशभर के विभिन्न शहरों में किया जाएगा। कई स्थानों पर निःशुल्क विशेष शो आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य युवाओं को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की भावना से प्रेरित करना है। यह फिल्म उन अनगिनत परिवारों की भावनाओं का भी प्रतिनिधित्व करती है जिन्होंने देश के लिए अपने प्रियजन खोए हैं।