शिवराज सिंह चौहान का बयान: एक परिवार के नाम पर 600 योजनाएं, कांग्रेस का विरोध अनुचित
सारांश
Key Takeaways
- कृषि मंत्री ने 600 योजनाओं के नामकरण पर विचार किया।
- कांग्रेस का विरोध महापुरुषों के सम्मान पर आधारित है।
- सरकार ने मनरेगा के लिए बड़ा बजट प्रस्तावित किया है।
नई दिल्ली, १७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि लगभग ६०० सरकारी योजनाओं, संस्थानों और परियोजनाओं के नाम एक ही परिवार के सदस्यों पर रखे गए हैं, जिनमें जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि सैकड़ों योजनाएं, संस्थान, पुरस्कार और सड़कें इनके नाम पर हैं। कई हवाई अड्डे, संग्रहालय, अस्पताल और खेल प्रतियोगिताएं भी इन्हीं के नाम पर रखी गई हैं।
इस दौरान कांग्रेस के सांसदों ने आपत्ति जताई और कहा कि जो लोग इस देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं, वे हमारी महान विभूतियां हैं। ऐसे व्यक्तित्वों की स्मृति को सम्मान देने के लिए उनके नाम पर सरकारी योजनाएं और स्थानों का नामकरण होना चाहिए। इस पर संसद में योजनाओं के नामकरण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का सिद्धांत 'दरिद्र नारायण, जनता ही जनार्दन' है और वर्तमान सरकार उसी के अनुसार कार्य कर रही है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'एक देश में दो निशान, दो विधान, दो प्रधान नहीं चलेंगे।'
उन्होंने कहा कि इस संकल्प को मोदी सरकार ने पूरा किया है। उन्होंने सवाल किया कि सुभाषचंद्र बोस के नाम पर कितनी योजनाएं हैं। 'मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी' कहने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर कितनी योजनाएं हैं। राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर कितनी योजनाएं चलाई गई हैं।
उन्होंने देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल का जिक्र किया और पूछा कि उनके नाम पर कितनी योजनाएं हैं। हमारा देश महान विभूतियों से भरा हुआ है। यदि हमें सच में श्रद्धांजलि देनी है, तो हर महापुरुष को समान भाव से सम्मान देना होगा। सम्मान किसी एक पार्टी या परिवार तक सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने मनरेगा का नाम बदलकर 'वीबी जी राम जी' करने के विषय पर कहा कि कांग्रेस पार्टी इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है। पहले भी कई योजनाओं के नाम बदले गए हैं, जैसे 'काम के बदले अनाज योजना', 'संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना', जो बाद में 'नरेगा' और फिर 'मनरेगा' बन गईं।
उन्होंने कहा कि यदि नाम बदलना अपमान है, तो यह अपमान कांग्रेस ने ही किया है। जैसे ही 'विकसित भारत' जैसे नाम की बात सामने आई, विपक्ष ने तीव्र विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि ऐसा माहौल बनाया गया मानो कोई बड़ा संकट आने वाला हो।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि देश ने इस योजना को स्वीकार किया है और इसे मनरेगा से बेहतर बताया जा रहा है। पहले कई संसद सदस्यों ने आशंका जताई थी कि सरकार इस योजना को बंद कर देगी।
उन्होंने वित्त मंत्री का धन्यवाद किया कि केंद्रीय बजट में पहली बार 95,692 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए राज्यों को पर्याप्त बजटीय प्रावधान किया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि अधिकांश राज्यों ने बजट में प्रावधान कर दिया है, लेकिन कांग्रेस शासित कर्नाटक में अब तक ऐसा नहीं किया गया है।