शिवसेना (यूबीटी) ने राष्ट्रपति मुलाकात पर इंडिया ब्लॉक को दिया समर्थन, राउत ने खड़गे को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 9 अक्टूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक के उस प्रस्तावित कार्यक्रम के प्रति अपनी पूर्ण एकजुटता व्यक्त की, जिसमें गठबंधन के नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने जाने वाले हैं। पार्टी सांसद संजय राउत और अरविंद सावंत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर इस कदम के पीछे गठबंधन की मंशा — लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा — का समर्थन किया।
पत्र में क्या कहा गया
पत्र के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में चलाए जा रहे अभियान के साथ दृढ़ता से खड़ी है। पत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा केंद्र सरकार में जिम्मेदार व्यक्तियों पर संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने के आरोपों को उजागर करने और उनके विरुद्ध कार्रवाई की माँग से संबंधित गठबंधन के प्रयासों का समर्थन दोहराया गया है।
राउत और सावंत ने खड़गे से आग्रह किया है कि वे राष्ट्रपति को शिवसेना (यूबीटी) की ओर से इंडिया ब्लॉक के प्रति पूर्ण समर्थन की जानकारी दें, ताकि गठबंधन की एकता का संदेश स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति तक पहुँचे।
अनुपस्थिति की वजह और माफ़ी
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि महाराष्ट्र में आगामी विधान परिषद चुनावों से जुड़े पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों के कारण पार्टी के नेता शुक्रवार रात आठ बजे राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मिलने के लिए स्वयं उपस्थित नहीं हो सकेंगे। इस अनुपस्थिति के लिए खड़गे से क्षमा का अनुरोध भी किया गया है।
विपक्ष का आंदोलन और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि विपक्षी दल कई दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। आरोप है कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से अनुचित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए गए। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन लगातार जारी है और आगामी दिनों में भी विरोध-प्रदर्शन प्रस्तावित है।
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक चुनाव आयोग की स्वायत्तता के प्रश्न को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति से मुलाकात का यह कदम उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प
शिवसेना (यूबीटी) ने पत्र में इंडिया ब्लॉक के इस अभियान को 'लोकतंत्र और संविधान की रक्षा' से जुड़ा अहम प्रयास बताया और स्पष्ट किया कि पार्टी इस लड़ाई में गठबंधन के साथ अटल है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रदर्शन महाराष्ट्र के आगामी चुनावी माहौल में विपक्षी एकता की परीक्षा भी है।
आगे क्या होगा
विपक्षी नेताओं की राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात के बाद गठबंधन की आगामी रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों की नज़दीकी को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) की भागीदारी का स्वरूप निकट भविष्य में और स्पष्ट होगा।