श्रावस्ती एयरपोर्ट निर्माण में गड़बड़ी: BJP विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने CM योगी से माँगी उच्चस्तरीय जाँच
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती हवाई अड्डे पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था और विमान परिचालन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गोंडा सदर से विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने 7 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर हवाई अड्डे के निर्माण, मरम्मत और नवीनीकरण कार्यों की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है। विधायक का आरोप है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), रुड़की की संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट में भी कई गंभीर खामियाँ उजागर हुई हैं।
मुख्य खामियाँ क्या हैं
विधायक के अनुसार, उनके प्रतिनिधि ने स्थल का निरीक्षण किया और हवाई अड्डे के परिसर में बड़े पैमाने पर जलभराव, निष्क्रिय जल निकासी व्यवस्था, भवनों में सीलन और दरारें देखीं। कई स्थानों पर नालियों की दीवारें झुककर आपस में मिल गई हैं, जिससे जल निकासी बाधित हो रही है। परिसर में ऊँची घास और जमा पानी की स्थिति भी सामने आई है।
IIT रुड़की की 17 दिसंबर 2025 की तृतीय पक्ष संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट — जो शासन को भेजी जा चुकी है — के अनुसार, वर्ष 2019 में निर्मित कुछ भवनों में समग्र संरचनात्मक अस्थिरता न होने के बावजूद गंभीर निर्माण संबंधी खामियाँ दर्ज हैं। अग्निशमन केंद्र और विद्युत उपकेंद्र में निर्माण के महज छह साल के भीतर कंक्रीट के कार्बोनेशन का असर सरियों तक पहुँचने और उनमें जंग लगने की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है।
तकनीकी त्रुटियाँ और सुरक्षा जोखिम
पत्र में उल्लेख किया गया है कि अग्निशमन केंद्र के कॉलमों में निर्धारित 40 मिलीमीटर के बजाय केवल 10 से 15 मिलीमीटर कंक्रीट आवरण पाया गया — जो निर्धारित मानक का एक-चौथाई से भी कम है। टर्मिनल और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) भवन में कंक्रीट की गुणवत्ता संबंधी खामियों, खुले सरियों में जंग और वॉटरप्रूफिंग में दरारों के कारण रिसाव की शिकायत भी की गई है।
विधायक ने सबसे गंभीर सवाल स्वीकृत निर्माण अभिलेखों को लेकर उठाया है। उन्होंने कहा कि बार-बार माँगने के बावजूद IIT रुड़की को स्वीकृत संरचनात्मक ड्रॉइंग, डिज़ाइन बेसिस रिपोर्ट और गणना संबंधी दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराए गए। जो अभिलेख दिए गए, वे निर्मित भवनों से मेल नहीं खाते थे, जिससे डिज़ाइन की समुचित जाँच संभव नहीं हो सकी।
वन्यजीव और अन्य परिचालन खतरे
पत्र में लगभग पाँच किलोमीटर लंबी परिधि दीवार के नीचे से नीलगाय, गाय और सियार जैसे पशुओं के रनवे क्षेत्र तक पहुँचने का उल्लेख करते हुए वन्यजीवों से विमान के टकराने की गंभीर आशंका जताई गई है। इसके अलावा अग्निशमन भवन पर हाल में बना वॉच टावर तेज आँधी में क्षतिग्रस्त होने, भवन की दीवारों में दरारें आने और छत से पानी रिसने की शिकायत भी की गई है।
विधायक ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में व्यापक नवीनीकरण के बावजूद टर्मिनल भवन के लगभग सभी कक्षों की छतें टपकती हैं — इनमें सुरक्षा, संचार और निगरानी से जुड़े संवेदनशील कक्ष भी शामिल हैं, जिससे वहाँ स्थापित उपकरणों को नुकसान पहुँचने का खतरा है।
विधायक की माँगें
मुख्यमंत्री से की गई माँगों में नागरिक उड्डयन विभाग से इतर अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक समिति गठित करना प्रमुख है। इसमें स्वतंत्र संरचनात्मक विशेषज्ञों, लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं और वित्त अधिकारियों को शामिल करते हुए 30 दिनों में जाँच रिपोर्ट देने का सुझाव दिया गया है।
विधायक ने निर्माण से जुड़े अभिलेख सुरक्षित रखने, मरम्मत से पहले स्थलीय साक्ष्य दर्ज करने और जाँच के दौरान कार्यदायी संस्था के बकाया भुगतान तथा प्रतिभूति राशि पर रोक लगाने की भी माँग की है। प्रथमदृष्टया वित्तीय अनियमितता सामने आने पर मामला सतर्कता जाँच के लिए भेजने, दोषी अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई, ठेकेदार को काली सूची में डालने और सरकारी धन की वसूली के साथ-साथ विमान परिचालन की सुरक्षा से जुड़े जरूरी सुधार तत्काल कराने की माँग की गई है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस पत्र पर कितनी तेज़ी से संज्ञान लेता है।