सीतापुर में आंधी-तूफान का कहर: दो की मौत, पिसावां और सदरपुर में भारी तबाही
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में 26 मई 2025 की देर रात आई भीषण आंधी-तूफान ने जनजीवन को बुरी तरह हिला दिया। इस प्राकृतिक आपदा में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए और हजारों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। जिले के पिसावां और सदरपुर थाना क्षेत्र इस तूफान से सर्वाधिक प्रभावित रहे।
पिसावां में निर्माणाधीन इमारत गिरी, एक महिला की मौत
जिले के पिसावां थाना क्षेत्र में तूफान का सबसे दर्दनाक मंजर देखने को मिला। यहाँ एक निर्माणाधीन इमारत एक ही परिवार के पाँच सदस्यों पर आ गिरी। इस हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि परिवार के चार अन्य सदस्य बुरी तरह घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है।
सदरपुर में दीवार गिरने से बुजुर्ग की मौत, महिला घायल
सदरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मजरा लच्छीपुर में तूफान के दौरान एक पक्की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे की चपेट में आने से भार्गव (65 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इसी घटना में एक अन्य महिला सुमन गंभीर रूप से घायल हो गईं। परिजन उन्हें फौरन अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है और उनकी हालत फिलहाल उपचाराधीन है।
पीड़ित परिवार की पीड़ा, मुआवजे की माँग
घायल भल्लू के बेटे ने अपना दुख साझा करते हुए बताया, 'मेरे पिताजी के ऊपर एक दीवार भरभराकर गिर गई। हम लोगों ने फौरन उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। राहत की बात यह है कि उनकी हालत अभी स्थिर है।' उन्होंने प्रशासन से माँग की कि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा और आवश्यक सहायता मुहैया कराई जाए। गाँव में इस समय शोक और सन्नाटे का माहौल है।
आम जनता पर असर
इस आंधी-तूफान ने सीतापुर जिले के कई गाँवों में हजारों रुपये की संपत्ति का नुकसान किया है। कच्चे मकान, खड़ी फसलें और बिजली के खंभे इस तूफान की चपेट में आए। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में गर्मी के मौसम में आंधी-तूफान की घटनाएँ बढ़ रही हैं और ग्रामीण इलाकों में पक्के निर्माण की कमी के कारण नुकसान और अधिक होता है।
क्या होगा आगे
प्रशासन से अपेक्षा है कि प्रभावित परिवारों को राहत राशि और पुनर्वास सहायता शीघ्र प्रदान की जाए। घायलों की स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। गौरतलब है कि ऐसी प्राकृतिक आपदाओं में समय पर सरकारी सहायता न मिलने की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं, इसलिए पीड़ित परिवारों की निगाहें अब जिला प्रशासन पर टिकी हैं।