29 सितंबर 2026
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सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार: वित्त मंत्री सीतारमण ने दोहा में अल-जदान से की मुलाकात

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सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार: वित्त मंत्री सीतारमण ने दोहा में अल-जदान से की मुलाकात

सारांश

दोहा में AIIB की वार्षिक बैठक के इतर वित्त मंत्री सीतारमण ने सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और नेपाल के अपने समकक्षों से अलग-अलग मुलाकात कीं। भारत-सऊदी BIT वार्ता के समापन की घोषणा, NIIF को निवेश मंच के रूप में प्रस्तुत करना और UPI-NPI लिंकेज पर सहमति — ये तीनों मिलकर भारत की बढ़ती आर्थिक कूटनीति की तस्वीर बनाते हैं।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 सितंबर 2026 को दोहा में AIIB वार्षिक बैठक के दौरान सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और नेपाल के समकक्षों से द्विपक्षीय वार्ता की।
सीतारमण ने सऊदी अरब को रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में भारत का भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया।
दोनों देशों ने भारत-सऊदी द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर वार्ता के सफल समापन का स्वागत किया; सऊदी वित्त मंत्री ने जल्द लागू होने की उम्मीद जताई।
स्विस राजदूत पिएत्रो लाजेरी ने कहा कि भारत में स्विस FDI की वृद्धि वैश्विक FDI से तेज़ है; GIFT IFSC में निवेश पर विमर्श हुआ।
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के साथ बाढ़ पुनर्निर्माण सहायता और UPI-NPI लिंकेज जल्द शुरू करने पर सहमति बनी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 सितंबर 2026 को दोहा में आयोजित एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की 2026 वार्षिक बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और अहम रणनीतिक साझेदार है। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और जन-संपर्क सहित कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी को रेखांकित किया।

सीतारमण-अल-जदान मुलाकात: मुख्य घटनाक्रम

सीतारमण ने दोहा में सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान से द्विपक्षीय वार्ता की। अल-जदान ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और बेहतर होते निवेश माहौल के लिए सीतारमण को बधाई दी। साथ ही उन्होंने सऊदी अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और आगे की दिशा पर भी अपने विचार साझा किए।

भारत-सऊदी द्विपक्षीय निवेश संधि पर सहमति

वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने भारत-सऊदी अरब द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर वार्ता के सफल समापन का स्वागत किया। यह संधि द्विपक्षीय निवेश के लिए एक मजबूत और अधिक भरोसेमंद ढाँचा तैयार करेगी तथा निवेशकों का विश्वास और बढ़ाएगी। अल-जदान ने कहा कि सऊदी अरब इस संधि के जल्द लागू होने का इंतज़ार कर रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब की राजकीय यात्रा के दौरान निर्धारित सोच को आधार बनाकर दोनों मंत्रियों ने रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में चर्चा की।

स्विट्जरलैंड के साथ निवेश संवाद

सीतारमण ने स्विट्जरलैंड से AIIB गवर्नर और राजदूत पिएत्रो लाजेरी से भी मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) को भारत में मौके तलाश रहे विदेशी निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया, जो शासन और पारदर्शिता के उच्च मानकों का पालन करता है। वित्त मंत्री ने स्विस निवेशकों और वित्तीय सेवा कंपनियों को GIFT IFSC में उपलब्ध निवेश अवसरों की ओर ध्यान दिलाया, जहाँ कर लाभ और व्यापार-अनुकूल वातावरण उपलब्ध है।

राजदूत लाजेरी ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत में पोर्टफोलियो विविधीकरण और निवेश के लिए बड़े अवसर देखता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में स्विस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की वृद्धि वैश्विक FDI से तेज़ गति से हो रही है। उन्होंने भारत की आगामी राजकीय यात्रा और नई दिल्ली में होने वाले दूसरे यूरोपीय मुक्त व्यापार संगठन (EFTA) प्रॉस्पेरिटी समिट का भी उल्लेख किया।

नेपाल के साथ पुनर्निर्माण और UPI-NPI लिंकेज पर चर्चा

सीतारमण ने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले से भी मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने नई दिल्ली में पहले हुई बैठक में प्रारंभ किए गए प्रोजेक्ट्स की प्रगति और बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण व पुनर्प्राप्ति हेतु नेपाल की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया। वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, UPI-NPI लिंकेज को जल्द शुरू करने और विस्तार देने पर भी चर्चा हुई, जिसे दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी पहल बताया गया।

आगे की दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वैश्विक आर्थिक कूटनीति को नए आयाम दे रहा है — चाहे वह खाड़ी देशों से निवेश आकर्षित करना हो, यूरोपीय भागीदारों के साथ व्यापार संधियाँ मजबूत करना हो, या दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ डिजिटल भुगतान एकीकरण हो। AIIB की इस वार्षिक बैठक में सीतारमण की बहुस्तरीय बैठकें इस दिशा में भारत की रणनीतिक सक्रियता को रेखांकित करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी — संधियाँ निवेश प्रवाह की गारंटी नहीं होतीं, सिर्फ एक सक्षम ढाँचा देती हैं। सीतारमण की दोहा यात्रा यह भी दर्शाती है कि भारत एक साथ खाड़ी पूँजी, यूरोपीय फंड और दक्षिण एशियाई डिजिटल एकीकरण — तीनों मोर्चों पर सक्रिय है। NIIF को बार-बार वैश्विक मंचों पर 'भरोसेमंद माध्यम' के रूप में प्रस्तुत करना एक ठोस रणनीति है, बशर्ते घरेलू परियोजनाओं में गवर्नेंस मानक उसी ऊँचाई पर बने रहें जिसका दावा बाहर किया जा रहा है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त मंत्री सीतारमण ने दोहा में किन नेताओं से मुलाकात की?
सीतारमण ने दोहा में AIIB की 2026 वार्षिक बैठक के दौरान सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान, स्विट्जरलैंड के AIIB गवर्नर व राजदूत पिएत्रो लाजेरी और नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले से अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत-सऊदी द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) क्या है और इसका क्या महत्व है?
यह भारत और सऊदी अरब के बीच निवेश सुरक्षा का एक कानूनी ढाँचा है, जिस पर वार्ता 29 सितंबर 2026 को दोहा में सफलतापूर्वक पूरी हुई। वित्त मंत्रालय के अनुसार इससे दोनों देशों के बीच निवेश को मजबूत आधार मिलेगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
NIIF को वैश्विक निवेशकों के सामने किस रूप में प्रस्तुत किया गया?
वित्त मंत्री सीतारमण ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) को भारत में निवेश के इच्छुक विदेशी निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि NIIF उच्च गवर्नेंस और पारदर्शिता मानकों का पालन करता है और NIIF इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के ज़रिये स्विस निवेशक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में प्रवेश कर सकते हैं।
UPI-NPI लिंकेज पर नेपाल के साथ क्या चर्चा हुई?
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, सीतारमण और नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने UPI-NPI लिंकेज को जल्द शुरू करने और इसके उपयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई। इसे दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी पहल बताया गया।
AIIB की 2026 वार्षिक बैठक कहाँ और कब हुई?
एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की 2026 वार्षिक बैठक दोहा, कतर में आयोजित हुई। वित्त मंत्री सीतारमण ने 29 सितंबर 2026 को इस बैठक के इतर कई देशों के अपने समकक्षों से द्विपक्षीय वार्ता की।
राष्ट्र प्रेस
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