एआईआईबी की 11वीं वार्षिक बैठक में वित्त मंत्री सीतारमण दोहा पहुंचीं, जॉर्डन-सऊदी समेत 5 देशों से द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 28 सितंबर 2026 को दोहा, कतर पहुंचीं, जहाँ वे एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक और एआईआईबी इन्वेस्टर्स डायलॉग 2026 में भारत के गवर्नर के रूप में भाग लेंगी। हमद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कतर में भारत के राजदूत श्रीकर रेड्डी कोप्पुला ने उनका औपचारिक स्वागत किया।
यात्रा का उद्देश्य और कार्यक्रम
वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में पुष्टि की कि सीतारमण अगले दो दिनों के दौरान दोहा में एआईआईबी की वार्षिक बैठक में सक्रिय रूप से भाग लेंगी। इस दौरान वे एआईआईबी के अध्यक्ष के साथ भी मुलाकात करेंगी।
इसके अतिरिक्त, वे जॉर्डन, स्विट्जरलैंड, अल्जीरिया, सऊदी अरब और नेपाल के अपने समकक्ष वित्त मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करेंगी। यह बैठकें भारत की बहुआयामी कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारियों को और मज़बूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
कतर सरकार और कारोबारी जगत से संवाद
आधिकारिक यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कतर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगी। साथ ही, वे कतर के कारोबारी नेताओं और निवेशकों के साथ भी संवाद करेंगी, जिससे भारत में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि भारत और कतर के बीच ऊर्जा क्षेत्र में गहरे द्विपक्षीय संबंध हैं। पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी के बीच एक 20 वर्षीय एलएनजी समझौता पहले से लागू है, जिसके तहत 2028 से 2048 तक प्रतिवर्ष 75 लाख टन एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
एआईआईबी में भारत की भूमिका
भारत एआईआईबी का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है, जो इस बहुपक्षीय मंच पर उसकी रणनीतिक महत्ता को रेखांकित करता है। एआईआईबी एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जिसका मुख्यालय बीजिंग में है और जिसने जनवरी 2016 में 100 अरब डॉलर की अधिकृत पूंजी के साथ परिचालन शुरू किया था।
वर्तमान में बैंक के 111 स्वीकृत सदस्य देश हैं। बैंक एशिया और विश्व भर में सड़क, स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रणाली और डिजिटल नेटवर्क जैसी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के वित्तपोषण पर केंद्रित है।
एआईआईबी के प्रमुख कार्यक्षेत्र
बैंक की प्राथमिकताओं में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली परियोजनाएँ, परिवहन एवं डिजिटल नेटवर्क का विकास और देशों के बीच जल संबंधी बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना शामिल है। बैंक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक एवं निजी विकास परियोजनाओं के लिए निजी निवेशकों के साथ भी मिलकर काम करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी बहुपक्षीय वित्तीय कूटनीति को नई ऊँचाई देने में जुटा है और वैश्विक विकास बैंकों में अपनी भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में इस यात्रा के परिणाम भारत की अवसंरचना वित्तपोषण रणनीति पर असर डाल सकते हैं।