29 जुलाई 2026
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नीट विवाद: सांसद डॉ. वी सिवदासन ने राज्यसभा में नियम 267 नोटिस दिया, पुलिस कार्रवाई पर संसदीय चर्चा की मांग

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नीट विवाद: सांसद डॉ. वी सिवदासन ने राज्यसभा में नियम 267 नोटिस दिया, पुलिस कार्रवाई पर संसदीय चर्चा की मांग

सारांश

सीपीआई (एम) सांसद डॉ. वी सिवदासन ने नियम 267 के तहत राज्यसभा सभापति को नोटिस देकर नीट अनियमितताओं पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल पर संसदीय चर्चा माँगी है। साथ ही NTA की जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की भी अपेक्षा जताई गई है।

मुख्य बातें

वी सिवदासन (सीपीआई-एम, केरल) ने 29 जुलाई को नियम 267 के तहत राज्यसभा सभापति को नोटिस दिया।
नोटिस में सदन स्थगित कर नीट परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग।
दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर सीपीआई (एम) कार्यालय में जाकर छात्र नेताओं को गिरफ्तार करने का प्रयास किया था।
20 जून के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और NTA की जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की माँग।
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर पोस्ट कर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की अपील की।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता और केरल से राज्यसभा सांसद डॉ. वी सिवदासन ने 29 जुलाई को नियम 267 के तहत राज्यसभा के सभापति को औपचारिक नोटिस सौंपा है। नोटिस में मांग की गई है कि सदन की सामान्य कार्यवाही स्थगित कर नीट परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में उतरे छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल और संबंधित परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा की जाए।

मुख्य घटनाक्रम

नोटिस की पृष्ठभूमि में दिल्ली पुलिस की वह कार्रवाई है, जिसमें पुलिस ने कथित तौर पर सीपीआई (एम) के कार्यालय में पहुँचकर छात्र नेताओं को गिरफ्तार करने का प्रयास किया था। डॉ. सिवदासन ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार से संसद के भीतर जवाब माँगा है।

नोटिस में यह भी अपेक्षा जताई गई है कि 20 जून को हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जाँच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए।

सीजेपी का रुख और एक्स पर पोस्ट

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'प्रदर्शनकारियों के संबंध में देश के सामने एक स्पष्ट सार्वजनिक वादा किया गया था, जिसका सम्मान होना चाहिए। सरकार को शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेनी चाहिए और अपने आश्वासनों पर अमल करना चाहिए।'

सौरव दास ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए सर्वोच्च न्यायालय का उपयोग नहीं कर सकती और न ही अदालती आदेशों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाना उचित है।

कानूनी प्रक्रिया पर सवाल

सीजेपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यदि कोई वास्तविक आरोपी खुलेआम घूम रहा है, तो पुलिस को उसके पुराने मामलों में जमानत रद्द कराने के लिए न्यायालय का रुख करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति अब तक बिना किसी कार्रवाई के कैसे घूमते रहे।

सरकार पर दबाव और युवाओं में असंतोष की चेतावनी

सीजेपी प्रवक्ता ने सरकार से अपील की है कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों से किए गए सार्वजनिक वादों को पूरा करे और सभी एफआईआर वापस लेने सहित दिए गए आश्वासनों को लागू करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो देश के युवाओं में असंतोष और गहरा हो सकता है।

आगे क्या

यह मामला ऐसे समय में उठाया गया है जब नीट परीक्षा विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है और NTA की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस छिड़ी हुई है। राज्यसभा में नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस पर सभापति का निर्णय यह तय करेगा कि यह चर्चा सदन में होगी या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करता है। नीट विवाद अब केवल परीक्षा-सुधार का सवाल नहीं रहा; यह पुलिस की भूमिका, नागरिक स्वतंत्रता और न्यायिक निगरानी के सवालों से जुड़ गया है। गौरतलब है कि NTA की विश्वसनीयता पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के दायरे में है, और ऐसे में छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के प्रयास ने विपक्ष को एक और मोर्चा दे दिया है। सरकार के लिए असली चुनौती यह है कि वह एफआईआर वापसी और NTA सुधार पर ठोस कदम उठाए — अन्यथा यह असंतोष संसद की दीवारों से बाहर सड़कों पर और फैल सकता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. वी सिवदासन ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत नोटिस क्यों दिया?
डॉ. सिवदासन ने नीट परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस बल के इस्तेमाल और दिल्ली पुलिस द्वारा सीपीआई (एम) कार्यालय में छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के प्रयास पर संसद में चर्चा कराने के लिए यह नोटिस दिया। नियम 267 के तहत सदन की सामान्य कार्यवाही स्थगित कर किसी विशेष मुद्दे पर तत्काल चर्चा की जा सकती है।
नीट परीक्षा विवाद में NTA की जाँच की माँग क्या है?
नोटिस में माँग की गई है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जाँच सर्वोच्च न्यायालय की सीधी निगरानी में कराई जाए, ताकि प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। 20 जून को हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई की भी इस जाँच के दायरे में लाने की अपेक्षा जताई गई है।
सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों के मामले में क्या माँग रखी है?
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने माँग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों से जो सार्वजनिक वादे किए थे, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने सीपीआई (एम) कार्यालय में क्या किया?
रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने सीपीआई (एम) के कार्यालय में पहुँचकर छात्र नेताओं को गिरफ्तार करने का प्रयास किया था। इसी घटना को आधार बनाकर डॉ. सिवदासन ने केंद्र सरकार से संसद में जवाब माँगा है।
नीट विवाद में आगे क्या होने की संभावना है?
राज्यसभा सभापति तय करेंगे कि नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस पर सदन में चर्चा होगी या नहीं। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में NTA से जुड़ी सुनवाई जारी है, जिसके परिणाम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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