24 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीवान के आलमापुर गांव में पटाखा विस्फोट: 5 की मौत, 40 साल से चल रही अवैध फैक्ट्री पर सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीवान के आलमापुर गांव में पटाखा विस्फोट: 5 की मौत, 40 साल से चल रही अवैध फैक्ट्री पर सवाल

सारांश

बिहार के सीवान में 40 साल से चल रही कथित 'मौत की फैक्ट्री' ने एक बार फिर तबाही मचाई। आलमापुर गांव में पटाखा विस्फोट में 5 की मौत, 1 बच्ची घायल। थानाध्यक्ष और चौकीदार निलंबित — लेकिन सवाल यह है कि इतने साल तक प्रशासन की आँखें बंद क्यों रहीं।

मुख्य बातें

बिहार के सीवान जिले के आलमापुर गांव में 24 अक्टूबर 2026 को पटाखा बनाने के दौरान भीषण विस्फोट हुआ।
प्रशासन ने 5 शव बरामद किए; ग्रामीणों का दावा है कि 6 लोगों की मौत हुई है।
अमीरुद्दीन मियां के घर में कथित तौर पर 35-40 वर्षों से अवैध पटाखा निर्माण जारी था; 26 साल पहले भी यहाँ विस्फोट हो चुका था।
जामो थानाध्यक्ष धीरज कुमार और चौकीदार चंद्रिका मांझी को SP भरत सोनी ने निलंबित किया।
जाँच के लिए एसडीपीओ अमन के नेतृत्व में विशेष दल गठित; FSL, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड मौके पर।
खेतों से बारूद बरामद; मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका में तलाशी जारी।

बिहार के सीवान जिले के आलमापुर गांव में 24 अक्टूबर 2026 को पटाखा निर्माण के दौरान हुए भीषण विस्फोट में प्रशासन ने पाँच शव बरामद किए हैं, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि छह लोगों की जान गई है। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि जिस मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, वह पूरी तरह ध्वस्त हो गया। एक बच्ची घायल हुई है, जिसका फिलहाल अस्पताल में उपचार जारी है।

40 साल से चल रहा था अवैध कारोबार

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अमीरुद्दीन मियां के घर में पिछले 35 से 40 वर्षों से अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। गौरतलब है कि यह पहला हादसा नहीं है — ग्रामीणों के अनुसार, करीब 26 साल पहले भी इसी मकान में विस्फोट हुआ था, जिसमें अमीरुद्दीन के बेटे अमुरात और बिहारी महतो की मौत हो गई थी और अमीरुद्दीन खुद भी घायल हुए थे। उस त्रासदी के बावजूद यहाँ पटाखा निर्माण का काम बंद नहीं हुआ।

प्रशासनिक निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

स्थानीय मुखिया संघ के प्रतिनिधि जीव नारायण यादव ने बताया कि गांव में चार से पाँच घरों में पटाखा बनाने का कारोबार होता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शादी-विवाह, छठ पूजा और मुहर्रम जैसे अवसरों पर माँग के चलते यह कारोबार फलता-फूलता रहा। उनके अनुसार, करीब 10 वर्ष पहले प्रशासन ने छापेमारी कर गिरफ्तारी भी की थी और संबंधित मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है। इसके बावजूद दशकों तक निगरानी क्यों चूकती रही — यह सवाल अनुत्तरित है।

जाँच और बचाव अभियान जारी

घटना के बाद प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर सर्च अभियान शुरू कर दिया है। जेसीबी मशीन की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। तलाशी के दौरान अमीरुद्दीन मियां के मकान के पीछे धान के खेत से बारूद भी मिला है। आशंका जताई जा रही है कि कार्रवाई के भय से कुछ लोगों ने विस्फोटक सामग्री खेतों में फेंक दी — हालाँकि इसकी पुष्टि जाँच के बाद ही होगी।

अधिकारियों की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीवान के जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा ने जाँच के आदेश दिए हैं। मौके पर बम निरोधक दस्ता, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL), डॉग स्क्वायड, अग्निशमन विभाग और बिजली विभाग की टीमें साक्ष्य जुटा रही हैं। सीवान के पुलिस अधीक्षक भरत सोनी ने कार्रवाई करते हुए जामो थानाध्यक्ष धीरज कुमार और चौकीदार चंद्रिका मांझी को निलंबित कर दिया है। महराजगंज के एसडीपीओ अमन के नेतृत्व में विशेष जाँच दल भी गठित किया गया है।

आगे क्या

मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की आशंका को देखते हुए तलाशी अभियान जारी है। पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि उक्त मकान में पटाखा निर्माण का कोई वैध लाइसेंस था या नहीं और वहाँ कितनी विस्फोटक सामग्री संग्रहीत थी। जाँच पूरी होने के बाद ही विस्फोट के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दशकों की संरचनात्मक विफलता का प्रमाण है। थानाध्यक्ष और चौकीदार का निलंबन जरूरी कदम है, लेकिन जवाबदेही की जड़ें और गहरी हैं — लाइसेंस व्यवस्था की खामियाँ, स्थानीय माँग से उपजी आर्थिक निर्भरता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव मिलकर ऐसी 'मौत की फैक्ट्रियाँ' पोसते हैं। बिना प्रणालीगत सुधार के महज कार्मिक कार्रवाई अगली त्रासदी को नहीं रोकेगी।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीवान के आलमापुर गांव में पटाखा विस्फोट में कितने लोगों की मौत हुई?
प्रशासन ने अब तक 5 शव बरामद किए हैं, जबकि ग्रामीण 6 लोगों की मौत का दावा कर रहे हैं। एक बच्ची घायल हुई है जिसका अस्पताल में इलाज जारी है।
आलमापुर में पटाखा फैक्ट्री कब से चल रही थी?
स्थानीय लोगों के अनुसार, अमीरुद्दीन मियां के घर में पिछले 35 से 40 वर्षों से अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। करीब 26 साल पहले भी इसी मकान में विस्फोट हो चुका था जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी।
सीवान विस्फोट के बाद किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
पुलिस अधीक्षक भरत सोनी ने जामो थानाध्यक्ष धीरज कुमार और चौकीदार चंद्रिका मांझी को निलंबित कर दिया है। एसडीपीओ अमन के नेतृत्व में विशेष जाँच दल भी गठित किया गया है।
विस्फोट स्थल पर जाँच की क्या स्थिति है?
जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा के निर्देश पर मौके पर बम निरोधक दस्ता, FSL, डॉग स्क्वायड और अग्निशमन दल काम कर रहे हैं। खेतों से बारूद बरामद हुआ है और मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका में तलाशी जारी है।
क्या आलमापुर में पटाखा बनाने का वैध लाइसेंस था?
पुलिस इसी सवाल की जाँच कर रही है। अभी तक किसी वैध लाइसेंस की पुष्टि नहीं हुई है। यह भी जाँचा जा रहा है कि वहाँ कितनी विस्फोटक सामग्री संग्रहीत थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 17 घंटे पहले
  2. 18 घंटे पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले