गाजा पर सोनिया गांधी की चुप्पी वोट बैंक राजनीति है, 1984 सिख दंगों पर मौन क्यों — भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आरपी सिंह ने 27 जून 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वे गाजा संघर्ष पर केवल वोट बैंक की दृष्टि से बोलती हैं, जबकि 1984 के सिख विरोधी दंगों पर वर्षों से मौन साधे हुई हैं। सिंह ने कहा कि यह 'चयनात्मक मानवाधिकार' का स्पष्ट उदाहरण है।
मुख्य आरोप: वोट बैंक और चयनात्मक संवेदना
आरपी सिंह ने सीधे शब्दों में कहा, 'सोनिया गांधी गाजा के बारे में बात करती हैं क्योंकि उन्हें वोट बैंक दिखते हैं। लेकिन दिल्ली में तीन हजार सिखों को उनके पति राजीव गांधी के समय में मरवाया गया, उसके बारे में वे कभी बात नहीं करतीं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पंजाब में बच्चों के गायब होने के मामले पर भी सोनिया गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती।
सिंह ने सतनामी बाई से जुड़े कथित बलात्कार प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस मामले में भी कांग्रेस नेतृत्व मौन रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि 'जब बात अपने लोगों पर आती है तो जवाब देने से बचती हैं।'
मोदी बनाम मनमोहन: लोकप्रियता का सवाल
आरपी सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से करते हुए कहा कि मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और जनता उनके नाम पर मतदान करती है। उन्होंने कहा, 'मनमोहन सिंह तो सोनिया गांधी द्वारा हैंडपिक किए गए थे — उन्हें कांग्रेस की कमेटी ने चुना था, देश की जनता ने नहीं।'
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक पर रुख
महाराष्ट्र में कथित टीईटी पेपर लीक मामले पर सिंह ने कहा कि जाँच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और 'कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा।'
राम मंदिर चंदा विवाद और धीरेंद्र शास्त्री का समर्थन
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के बयान का समर्थन करते हुए सिंह ने राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित घोटाले पर कहा कि सरकार 20 पेज की रिपोर्ट और 10 नए खुलासों के आधार पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा, 'चाहे कोई भी अधिकारी या कर्मचारी हो, उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।' यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर प्रशासन से जुड़े वित्तीय सवाल राष्ट्रीय चर्चा में हैं।
BJP के इस आक्रामक रुख से स्पष्ट है कि पार्टी कांग्रेस को विदेश नीति और अल्पसंख्यक राजनीति दोनों मोर्चों पर घेरने की रणनीति पर काम कर रही है — आने वाले दिनों में यह बहस और तीखी होने की संभावना है।