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सोनप्रयाग में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चट्टान गिरने से एक की मौत, दूसरा गंभीर

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सोनप्रयाग में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चट्टान गिरने से एक की मौत, दूसरा गंभीर

सारांश

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग में शुक्रवार सुबह अचानक चट्टान गिरने से एक तीर्थयात्री की मौत और दूसरा गंभीर रूप से घायल — जबकि प्रशासन दो दिन पहले ही चेतावनी दे चुका था। यह घटना संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

शुक्रवार, 22 मई को सुबह 8 बजे सोनप्रयाग मार्केट बैरियर के पास हनुमान मंदिर के समीप पहाड़ी से चट्टानें गिरीं।
उम्मेद सिंह नेगी (48) , निवासी बड़ेथ, की एमआरपी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
बम बहादुर (42) , निवासी नेपाल, गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि दो दिन पहले ही इस क्षेत्र में आवाजाही न करने की चेतावनी दी जा चुकी थी।
एसडीआरएफ , पुलिस और सेक्टर मजिस्ट्रेट मौके पर पहुँचे; यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग में शुक्रवार, 22 मई की सुबह 8 बजे हनुमान मंदिर के समीप अचानक पहाड़ी से ढीली चट्टानें और पत्थर गिरने से दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। रुद्रप्रयाग जिले में हुई इस दुर्घटना में उम्मेद सिंह नेगी (48), निवासी बड़ेथ, ने अस्पताल में दम तोड़ दिया, जबकि बम बहादुर (42), निवासी नेपाल, की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

मुख्य घटनाक्रम

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के अनुसार, घटना सोनप्रयाग मार्केट में बैरियर के पास हुई। अचानक हुई इस स्लाइडिंग में दोनों व्यक्ति चपेट में आ गए। उन्हें तत्काल सोनप्रयाग स्थित एमआरपी अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उम्मेद सिंह नेगी की मृत्यु हो गई।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस टीम और सेक्टर मजिस्ट्रेट मौके पर पहुँचे और घायलों को अस्पताल पहुँचाने में तत्परता दिखाई। नंदन सिंह रजवार ने कहा, 'शुक्रवार सुबह 8 बजे अचानक स्लाइडिंग हुई, जिसमें दो व्यक्ति चपेट में आ गए। हम दो दिन पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि इस क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही न करें। मैं खुद मौके पर गया था और लोगों को सचेत किया था।'

उन्होंने यह भी बताया कि संवेदनशील जगहों पर अतिक्रमण करने वालों को हटाने के लिए सेक्टर अधिकारी और पुलिस लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन कुछ लोग प्रशासन की अपीलों पर ध्यान नहीं दे रहे।

यात्रियों और स्थानीय लोगों पर असर

इस घटना के बाद प्रशासन ने सोनप्रयाग क्षेत्र में ढीली चट्टानों को हटाने का काम तेज कर दिया है। एसडीआरएफ और पुलिस की अतिरिक्त टीमें यात्रा मार्ग पर तैनात की गई हैं। अधिकारियों ने यात्रियों को निर्देशित मार्गों पर ही चलने और प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करने की अपील की है।

गौरतलब है कि केदारनाथ यात्रा के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थर गिरने की घटनाएँ हर वर्ष सामने आती हैं, विशेषकर मानसून-पूर्व और मानसून के दौरान जब भू-संरचना कमजोर हो जाती है।

क्या होगा आगे

जिला प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। मौसम और भू-संरचना की संवेदनशीलता को देखते हुए यात्रियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील जारी है। प्रशासन का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा ढाँचे की कमी बनी रहती है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन की अपीलें पर्याप्त हैं, या पहाड़ी यात्रा मार्गों पर तकनीकी निगरानी और भौतिक बाधाओं की ज़रूरत है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनप्रयाग में चट्टान गिरने की घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना शुक्रवार, 22 मई को सुबह 8 बजे सोनप्रयाग मार्केट में बैरियर के पास हनुमान मंदिर के समीप हुई। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर पहाड़ी से अचानक ढीली चट्टानें और पत्थर गिरे।
इस हादसे में कौन-कौन घायल हुए और क्या हुआ उनके साथ?
हादसे में उम्मेद सिंह नेगी (48), निवासी बड़ेथ, और बम बहादुर (42), निवासी नेपाल, गंभीर रूप से घायल हुए। उम्मेद सिंह नेगी की एमआरपी अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि बम बहादुर का उपचार जारी है।
क्या प्रशासन ने पहले कोई चेतावनी दी थी?
हाँ, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के अनुसार, घटना से दो दिन पहले ही उस क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही न करने की चेतावनी दी जा चुकी थी। अधिकारी खुद मौके पर गए थे और लोगों को सचेत किया था।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अब क्या सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं?
घटना के बाद एसडीआरएफ और पुलिस की अतिरिक्त टीमें यात्रा मार्ग पर तैनात की गई हैं। प्रशासन ने सोनप्रयाग क्षेत्र में ढीली चट्टानें हटाने का काम तेज कर दिया है और यात्रियों को निर्देशित मार्गों पर ही चलने की सलाह दी जा रही है।
केदारनाथ यात्रा के दौरान पत्थर गिरने की घटनाएँ कितनी सामान्य हैं?
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थर गिरने की घटनाएँ हर वर्ष, विशेषकर मानसून-पूर्व और मानसून के दौरान, सामने आती हैं। भू-संरचना की संवेदनशीलता और मौसम के कारण यह मार्ग जोखिमपूर्ण बना रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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