माइक्रोग्रैविटी में पानी गोले में क्यों बदल जाता है? शुभांशु शुक्ला ने समझाया अंतरिक्ष विज्ञान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना के अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव में पानी और अन्य तरल पदार्थों के असामान्य व्यवहार को एक वीडियो प्रयोग के ज़रिए सरल भाषा में समझाया है। उनके अनुसार, पृथ्वी पर जो चीज़ें बिल्कुल सामान्य लगती हैं — जैसे पानी का नीचे बहना — वे अंतरिक्ष में पूरी तरह बदल जाती हैं। यह प्रदर्शन भविष्य के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी के लिहाज़ से वैज्ञानिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति में क्या होता है
शुभांशु शुक्ला ने बताया कि पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच सबसे मूलभूत अंतर गुरुत्वाकर्षण का है। पृथ्वी पर कोई भी तरल पदार्थ गुरुत्वाकर्षण के कारण हमेशा नीचे की ओर खिंचता है, लेकिन अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी की स्थिति में यह खिंचाव लगभग नगण्य हो जाता है। इसीलिए वैज्ञानिक अंतरिक्ष में तरल पदार्थों के व्यवहार पर विशेष अध्ययन करते हैं।
उन्होंने प्रयोग के दौरान दिखाया कि माइक्रोग्रैविटी में पानी नीचे गिरने की बजाय हवा में तैरते हुए एक गोलाकार बुलबुले का रूप ले लेता है। यह इसलिए होता है क्योंकि पानी के अणुओं के बीच की सतह तनाव (सर्फेस टेंशन) की शक्ति गुरुत्वाकर्षण के अभाव में हावी हो जाती है और पानी को एक स्थिर गोले की आकृति देती है।
फ्यूल टैंक डिज़ाइन की चुनौती
शुक्ला ने एक व्यावहारिक उदाहरण देते हुए समझाया कि पृथ्वी पर किसी भी वाहन के फ्यूल टैंक में ईंधन गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे जमा रहता है। लेकिन अंतरिक्ष में ऐसा नहीं होता — वहाँ ईंधन थोड़े से धक्के या गति के प्रभाव से टैंक के किसी भी कोने में पहुँच सकता है।
गौरतलब है कि जब अंतरिक्ष यान के इंजन को दोबारा चालू करना होता है, तब ईंधन का सही स्थान पर होना अनिवार्य होता है। यही कारण है कि अंतरिक्ष यानों के फ्यूल टैंक का अभिकल्प (डिज़ाइन) इंजीनियरिंग की एक बड़ी चुनौती मानी जाती है।
घूर्णन और फ्लूइड डायनामिक्स का प्रयोग
प्रयोग के दौरान शुभांशु शुक्ला ने पानी के उस गोलाकार बुलबुले को धीरे-धीरे घुमाकर दिखाया और बताया कि वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करते हैं कि घूर्णन बल (रोटेशनल फोर्स) का तरल पदार्थों पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस तरह के अध्ययन को फ्लूइड डायनामिक्स कहा जाता है और यह अंतरिक्ष विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है, और इस तरह के प्रयोगों से मिले डेटा भविष्य के मिशनों की सुरक्षा और दक्षता में सीधा योगदान देंगे।
भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों पर असर
शुक्ला ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष में तरल पदार्थों के व्यवहार को समझना दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों — जैसे चंद्रमा या मंगल की यात्राओं — के लिए बेहद ज़रूरी है। इससे फ्यूल स्टोरेज, फ्लूइड मैनेजमेंट सिस्टम और जीवन-रक्षक प्रणालियों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है।
आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे मानव अंतरिक्ष अभियान लंबे होते जाएंगे, इस तरह के प्रयोगों से मिली जानकारी अंतरिक्ष यान की संरचना और यात्रियों की सुरक्षा दोनों के लिए निर्णायक साबित होगी।