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अंतरिक्ष में आंख धोना भी चुनौती: शुभांशु शक्ला ने बताया 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' का कमाल

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अंतरिक्ष में आंख धोना भी चुनौती: शुभांशु शक्ला ने बताया 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' का कमाल

सारांश

अंतरिक्ष में आंख धोना भी एक इंजीनियरिंग चुनौती है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शक्ला ने बताया कि माइक्रोग्रैविटी में पानी बूंदों में तैरता है, इसलिए 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' — एक क्लोज्ड-लूप सिस्टम — आंखों को सुरक्षित धोने का एकमात्र व्यावहारिक तरीका है।

मुख्य बातें

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शक्ला ने वीडियो में अंतरिक्ष में आंख धोने की चुनौती और उसके समाधान की जानकारी साझा की।
माइक्रोग्रैविटी में पानी गोलाकार बूंदों में तैरता है, जिससे सामान्य आईवॉश असंभव हो जाता है।
'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' एक क्लोज्ड-लूप सिस्टम है — एक ट्यूब स्टराइल सलाइन पहुंचाती है, दूसरी सक्शन से गंदा तरल बाहर खींचती है।
अंतरिक्ष में सबसे नज़दीकी अस्पताल धरती पर 400 किलोमीटर नीचे होता है, इसलिए मेडिकल तैयारी अनिवार्य है।
शक्ला भारतीय वायुसेना के पायलट और गगनयान मिशन से जुड़े रहे हैं।

अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शक्ला ने एक वीडियो में खुलासा किया कि माइक्रोग्रैविटी में आंख धोने जैसी सामान्य क्रिया भी किस तरह एक गंभीर चुनौती बन जाती है — और इसका समाधान है विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' सिस्टम। भारतीय वायुसेना के पायलट और गगनयान मिशन से जुड़े शक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष में सबसे नज़दीकी अस्पताल धरती पर 400 किलोमीटर नीचे होता है, इसलिए हर छोटी चिकित्सा समस्या को गंभीरता से लेना अनिवार्य है।

माइक्रोग्रैविटी में आंख धोना क्यों है असंभव

पृथ्वी पर आंख में कुछ चले जाने पर हम सहज ही पानी से धो लेते हैं। लेकिन अंतरिक्ष की माइक्रोग्रैविटी में पानी न बहता है, न एक जगह ठहरता है। वह छोटी-छोटी गोलाकार बूंदों में तैरने लगता है और पूरे स्पेसक्राफ्ट के केबिन में बिखर जाता है। यदि किसी अंतरिक्ष यात्री की आंख में धूल या कोई कण चला जाए, तो सामान्य तरीके से आईवॉश करना व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाता है।

शक्ला ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष में चंद्रमा की धूल या अन्य सूक्ष्म कण आंखों के लिए विशेष खतरा पैदा कर सकते हैं। यह ऐसे समय में और भी गंभीर हो जाता है जब चिकित्सा सहायता तुरंत उपलब्ध नहीं होती।

क्या है 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स'

इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' विकसित किए हैं। ये विशेष सीलबंद गॉगल्स देखने में साइंस फिक्शन फिल्मों के उपकरणों जैसे लगते हैं, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली अत्यंत व्यावहारिक है।

ये गॉगल्स आंखों पर पूरी तरह एयरटाइट तरीके से फिट बैठते हैं। इनमें दो ट्यूब लगी होती हैं — पहली ट्यूब स्टराइल सलाइन (शुद्ध खारा घोल) को अंदर पहुंचाती है और आंख को साफ करती है, जबकि दूसरी ट्यूब सक्शन तकनीक के ज़रिए इस्तेमाल किए गए तरल को तुरंत बाहर खींच लेती है। यह पूरी तरह 'क्लोज्ड-लूप सिस्टम' है, जिससे पानी की एक बूंद भी केबिन में नहीं फैलती।

डिज़ाइन और तकनीक

इस उपकरण की संरचना स्विमिंग गॉगल्स से प्रेरित है, लेकिन इसे शून्य-गुरुत्वाकर्षण वातावरण की विशेष ज़रूरतों के अनुसार अनुकूलित किया गया है। 'क्लोज्ड सिस्टम' डिज़ाइन यह सुनिश्चित करता है कि उपचार के दौरान स्पेसक्राफ्ट के उपकरण या इलेक्ट्रॉनिक्स किसी तरल के संपर्क में न आएं — जो अंतरिक्ष में एक और संभावित खतरा है।

गौरतलब है कि अंतरिक्ष यात्री उड़ान से पहले ऐसे उपकरणों के उपयोग की बुनियादी मेडिकल ट्रेनिंग लेते हैं, ताकि किसी आपात स्थिति में वे स्वयं या साथी यात्री की सहायता कर सकें।

शुभांशु शक्ला का अनुभव

शक्ला ने वीडियो में बताया, 'खुशकिस्मती से मेरे मिशन के दौरान इसका इस्तेमाल नहीं करना पड़ा, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों को यही उम्मीद रहती है कि उन्हें इन उपकरणों की ज़रूरत ही न पड़े। अंतरिक्ष में चांद की धूल या अन्य कणों से आंखों को खतरा रहता है, इसलिए यह उपकरण बेहद उपयोगी साबित होता है।'

यह जानकारी न केवल अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों — जिनमें चंद्रमा और मंगल मिशन शामिल हैं — में चिकित्सा तैयारी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंतरिक्ष यात्रियों की चिकित्सा स्वायत्तता — यानी बिना ज़मीनी सहायता के खुद इलाज करने की क्षमता — एक रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है। 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' जैसे उपकरण दर्शाते हैं कि अंतरिक्ष इंजीनियरिंग केवल प्रणोदन और नेविगेशन तक सीमित नहीं है — मानव शरीर की हर बुनियादी ज़रूरत को शून्य-गुरुत्वाकर्षण के लिए नए सिरे से डिज़ाइन करना पड़ता है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' क्या होते हैं?
ये विशेष सीलबंद गॉगल्स हैं जो अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के दौरान आंखों को सुरक्षित तरीके से धोने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इनमें एक ट्यूब स्टराइल सलाइन अंदर पहुंचाती है और दूसरी सक्शन से गंदे तरल को बाहर खींच लेती है, जिससे पानी केबिन में नहीं फैलता।
अंतरिक्ष में आंख धोना इतना मुश्किल क्यों है?
माइक्रोग्रैविटी में पानी बहता नहीं, बल्कि गोलाकार बूंदों में तैरने लगता है और स्पेसक्राफ्ट के केबिन में बिखर जाता है। इससे सामान्य तरीके से आईवॉश करना व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाता है और उपकरणों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शक्ला कौन हैं?
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शक्ला भारतीय वायुसेना के पायलट हैं और भारत के गगनयान मिशन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो में अंतरिक्ष में चिकित्सा चुनौतियों और उनके समाधान की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
अंतरिक्ष यात्री मेडिकल इमरजेंसी के लिए कैसे तैयार होते हैं?
अंतरिक्ष यात्री उड़ान से पहले बुनियादी मेडिकल ट्रेनिंग लेते हैं क्योंकि अंतरिक्ष में सबसे नज़दीकी अस्पताल धरती पर 400 किलोमीटर नीचे होता है। वे 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' जैसे विशेष उपकरणों के उपयोग में प्रशिक्षित किए जाते हैं ताकि आपात स्थिति में स्वयं या साथी की सहायता कर सकें।
क्या इस गॉगल्स का उपयोग शुभांशु शक्ला के मिशन में हुआ?
शक्ला ने बताया कि उनके मिशन के दौरान इस उपकरण का उपयोग करने की ज़रूरत नहीं पड़ी। हालांकि, उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में चंद्रमा की धूल या अन्य कणों से आंखों को खतरा रहता है, इसलिए यह उपकरण हमेशा तैयार रखा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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