स्पेस में हेयरवॉश का तरीका: ESA एस्ट्रोनॉट सोफी अडेंनॉट ने बताया 250ml पानी से बाल धोने का पूरा तरीका
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) की एस्ट्रोनॉट सोफी अडेंनॉट ने हाल ही में खुलासा किया कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बाल धोना पृथ्वी की तुलना में एक बिल्कुल अलग अनुभव है — जहाँ न शॉवर है, न हेयर ड्रायर, और सिर्फ 250 मिलीलीटर पानी में पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। माइक्रोग्रैविटी में रोज़मर्रा के काम भी विशेष तकनीक माँगते हैं, और हेयरवॉश इसका सबसे दिलचस्प उदाहरण है।
माइक्रोग्रैविटी में हेयरवॉश की शुरुआत कैसे होती है
सोफी अडेंनॉट के अनुसार, बाल धोने की प्रक्रिया सबसे पहले हेयरब्रश से बालों को सुलझाने से शुरू होती है। इसके बाद एक छोटे पानी के बैग की सहायता से बालों और सिर की त्वचा पर धीरे-धीरे पानी लगाया जाता है। पानी को समान रूप से फैलाने के लिए अच्छी तरह मालिश की जाती है, ताकि हर हिस्से तक नमी पहुँच सके।
नो-रिंस शैम्पू और साबुन की टिकिया का इस्तेमाल
अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विशेष रूप से तैयार 'नो-रिंस' शैम्पू उपलब्ध कराया जाता है, जिसे इस्तेमाल के बाद अधिक पानी से धोने की आवश्यकता नहीं होती। हालाँकि, सोफी ने बताया कि उन्हें एक विशेष साबुन की टिकिया का उपयोग करना पसंद है, जिससे उन्हें अतिरिक्त सफाई का एहसास होता है। वह शैम्पू और साबुन दोनों को बालों की जड़ों तक अच्छी तरह पहुँचाने के लिए मालिश करती हैं।
तौलिए से नमी सोखना और जल पुनर्चक्रण
बाल साफ करने के बाद तौलिए की मदद से अतिरिक्त शैम्पू और नमी को सोख लिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 250 मिलीलीटर पानी की ही आवश्यकता होती है — पृथ्वी पर हेयरवॉश में इस्तेमाल होने वाले पानी की तुलना में यह बेहद कम है। गौरतलब है कि इस्तेमाल किए गए तौलिए को सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है, और उसमें मौजूद नमी को अंतरिक्ष स्टेशन की जल पुनर्चक्रण प्रणाली के ज़रिए शुद्ध करके दोबारा पीने योग्य पानी में बदल दिया जाता है।
हेयर ड्रायर नहीं — प्राकृतिक रूप से सूखते हैं बाल
अंतरिक्ष स्टेशन पर हेयर ड्रायर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं, इसलिए बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। यह ऐसे वातावरण में होता है जहाँ हवा का प्रवाह पृथ्वी जैसा नहीं है, लेकिन स्टेशन के वेंटिलेशन सिस्टम से हल्की हवा बहती रहती है।
सोफी का अनुभव और निष्कर्ष
सोफी अडेंनॉट ने कहा कि पहली नज़र में यह प्रक्रिया पृथ्वी जैसी ही लग सकती है — पानी लगाना, शैम्पू करना, सुखाना — लेकिन माइक्रोग्रैविटी में यह पूरी तरह अलग अनुभव बन जाती है। उनके अनुसार, सही तकनीक और सीमित संसाधनों के साथ यह प्रक्रिया आसानी से पूरी की जा सकती है। यह अनुभव अंतरिक्ष में जीवन की उस वास्तविकता को दर्शाता है जहाँ हर काम के लिए नई सोच और अनुकूलन ज़रूरी है।