19 अक्टूबर 2026
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भोजपुर मौत मामला: सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला से IPS अधिकारी के मानहानि नोटिस पर हस्तक्षेप माँगा

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भोजपुर मौत मामला: सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला से IPS अधिकारी के मानहानि नोटिस पर हस्तक्षेप माँगा

सारांश

बिहार के भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत का मामला अब संसद पहुँच गया है। बक्सर सांसद सुधाकर सिंह को IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से ₹5 करोड़ के मानहानि नोटिस के बाद लोकसभा अध्यक्ष बिरला से विशेषाधिकार समिति को मामला सौंपने की माँग की गई है।

मुख्य बातें

बक्सर सांसद सुधाकर सिंह (RJD) ने 19 अक्टूबर 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की।
IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन ने निजी वकील के ज़रिये ₹5 करोड़ हर्जाने और सार्वजनिक माफी की माँग वाला मानहानि नोटिस भेजा है।
विवाद की जड़ बिलौती गाँव, भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की कथित संदिग्ध मौत और फर्जी मुठभेड़ के आरोप हैं।
घटना में शामिल पुलिसकर्मी निलंबित; पीड़ित की माँ की शिकायत पर FIR दर्ज; राज्य सरकार की न्यायिक जाँच के निष्कर्ष अब तक सार्वजनिक नहीं।
सांसद ने संविधान के अनुच्छेद 105 और अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 17 का हवाला देते हुए संसदीय विशेषाधिकार उल्लंघन का सवाल उठाया।
घटना के समय कृष्णन कथित तौर पर बिहार STF के महानिदेशक के पद पर थे।

बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गाँव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ का मामला अब संसद की दहलीज़ तक पहुँच गया है। बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह को वरिष्ठ IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से मानहानि का नोटिस मिलने के बाद उन्होंने 19 अक्टूबर 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की है। सांसद ने यह भी अनुरोध किया है कि यदि संसदीय विशेषाधिकार के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला बनता है, तो इसे संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए।

मानहानि नोटिस का विवरण

सांसद सुधाकर सिंह के अनुसार, कुंदन कृष्णन ने अपने निजी वकील के माध्यम से यह कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में सार्वजनिक माफी की माँग के साथ-साथ ₹5 करोड़ हर्जाने का मानहानि मुकदमा दायर करने और संभावित आपराधिक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है। सांसद ने अध्यक्ष से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि कृष्णन ने किस हैसियत से यह नोटिस जारी किया — व्यक्तिगत रूप से या बिहार अथवा केंद्र सरकार के अधिकार से।

संसदीय विशेषाधिकार का प्रश्न

सुधाकर सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को संसद में सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने का मौलिक अधिकार है। उनकी चिंता है कि इस प्रकार का कानूनी नोटिस सांसदों को प्रशासनिक कार्यों पर सवाल उठाने से हतोत्साहित कर सकता है, हालाँकि नोटिस जारी करने के पीछे की मंशा की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। उन्होंने अध्यक्ष से यह भी जाँचने का अनुरोध किया है कि क्या अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का नियम 17 इस मामले में लागू होता है।

भोजपुर मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद बिलौती गाँव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ के आरोपों से जुड़ा है। सांसद के अनुसार, घटना में शामिल पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और पीड़ित की माँ की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। घटना के समय कुंदन कृष्णन कथित तौर पर बिहार विशेष कार्य बल (STF) के महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे। राज्य सरकार ने न्यायिक जाँच भी गठित की है, परंतु उसके निष्कर्ष अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

जाँच के दायरे पर सवाल

सुधाकर सिंह ने तर्क दिया है कि जाँच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने जारी किए गए आदेशों, अधिकारियों के बीच संचार, पुलिस मुख्यालय को दी गई सूचनाओं और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जाँच की माँग की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि नोटिस भेजने वाली निजी लॉ फर्म कृष्णन का व्यक्तिगत प्रतिनिधित्व कर रही थी या उसे सरकार की ओर से भी अधिकृत किया गया था।

आगे की राह

सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से पूरे मामले की जाँच शुरू करने और यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलें तो इसे विशेषाधिकार समिति को सौंपने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने माँग की है कि यदि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को संसदीय कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रतिशोध का सामना करने के प्रमाण मिलते हैं, तो उचित कार्रवाई अमल में लाई जाए। यह मामला संसद और राज्य प्रशासन के बीच जवाबदेही की एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कार्यपालिका और विधायिका के बीच की शक्ति-संरचना का एक गंभीर परीक्षण है। अनुच्छेद 105 की रक्षा का असली मतलब यही है कि निर्वाचित प्रतिनिधि बिना प्रतिशोध के जवाबदेही तय कर सकें। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में पुलिस की जवाबदेही पहले से ही सवालों के घेरे में है और न्यायिक जाँच के निष्कर्ष महीनों बाद भी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। लोकसभा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि संसदीय विशेषाधिकार का कवच वास्तव में कितना मज़बूत है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजपुर मौत मामला क्या है जिस पर सांसद सुधाकर सिंह ने आवाज़ उठाई?
बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गाँव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी और कथित फर्जी मुठभेड़ के आरोप लगाए गए हैं। घटना में शामिल पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं और पीड़ित की माँ की शिकायत पर FIR दर्ज है।
IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन ने सांसद को क्यों मानहानि नोटिस भेजा?
सांसद सुधाकर सिंह द्वारा भोजपुर मामले में उठाए गए सार्वजनिक सवालों के जवाब में कुंदन कृष्णन ने निजी वकील के ज़रिये यह नोटिस भेजा। नोटिस में सार्वजनिक माफी, ₹5 करोड़ हर्जाने का मानहानि मुकदमा और संभावित आपराधिक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।
लोकसभा विशेषाधिकार समिति क्या होती है और यह मामला उसे क्यों भेजा जाए?
संसद की विशेषाधिकार समिति उन मामलों की जाँच करती है जहाँ सांसदों के संसदीय अधिकारों के उल्लंघन का सवाल उठता है। सुधाकर सिंह का तर्क है कि यदि मानहानि नोटिस संसदीय कर्तव्यों के निर्वहन को बाधित करने की कोशिश है, तो यह अनुच्छेद 105 के तहत विशेषाधिकार का उल्लंघन बनता है।
घटना के समय कुंदन कृष्णन किस पद पर थे?
सांसद सुधाकर सिंह के पत्र के अनुसार, घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार विशेष कार्य बल (STF) के महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे। सांसद ने माँग की है कि जाँच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित न रहे बल्कि कमान शृंखला की भी समीक्षा हो।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे क्या होगा?
अब तक घटना में शामिल पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं, FIR दर्ज है और राज्य सरकार ने न्यायिक जाँच गठित की है, जिसके निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं हुए। अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले पर निगाहें टिकी हैं — वे मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजते हैं या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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