बीआरएस नेता तलासनी श्रीनिवास यादव की माँग: चुनाव आयोग खुद पंजीकृत करे पात्र स्नातक मतदाताओं को
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री तलासनी श्रीनिवास यादव ने 26 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए माँग की कि प्रत्येक पात्र स्नातक को मतदाता सूची में शामिल करने की ज़िम्मेदारी आयोग स्वयं उठाए। उनके अनुसार ग्रेजुएट मतदाता पंजीकरण अभियान में व्यापक लापरवाही बरती जा रही है और आयोग अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रहा है।
प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात और ज्ञापन
सोमवार, 26 अक्टूबर को तलासनी श्रीनिवास यादव के नेतृत्व में बीआरएस के एक प्रतिनिधिमंडल ने बीआरके भवन में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) सुदर्शन रेड्डी से भेंट कर औपचारिक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पंजीकरण अभियान में हो रही देरी, बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की अनुपस्थिति और जागरूकता प्रयासों की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए। इस बैठक में एमएलसी दासोजू श्रवण, सुरभि वाणी देवी और विधायक कालेरु वेंकटेश भी मौजूद रहे।
पंजीकरण की स्थिति और आँकड़े
तलासनी ने बताया कि ग्रेजुएट मतदाता पंजीकरण की अंतिम तिथि 6 नवंबर निर्धारित है, किंतु अब तक बीएलओ की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि आयोग के अनुसार अब तक केवल 23 हज़ार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि पिछली ग्रेजुएट निर्वाचन प्रक्रिया में अकेले हैदराबाद शहर में 1.10 लाख मतदाता पंजीकृत थे। यह तुलना मौजूदा अभियान की निराशाजनक स्थिति को रेखांकित करती है।
उन्होंने यह भी बताया कि संयुक्त हैदराबाद, रंगारेड्डी और महबूबनगर जिलों में 5.27 लाख आवेदन प्राप्त होने की जानकारी आयोग ने दी है, लेकिन इन आवेदनों के सत्यापन की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है।
सामूहिक आवेदन और कार्यकर्ताओं की शिकायत
तलासनी ने आरोप लगाया कि बीआरएस कार्यकर्ताओं ने बड़ी मेहनत से आवेदन इकट्ठे किए, परंतु जब उन्हें अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया तो यह कहकर आपत्ति जताई गई कि आवेदकों को स्वयं उपस्थित होना अनिवार्य है और सामूहिक आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछली ग्रेजुएट निर्वाचन प्रक्रिया में मत डाल चुके लोगों को दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है, और इस पर आयोग के अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है।
चुनाव आयोग पर आरोप
पूर्व मंत्री ने कहा कि आयोग ने मतदाता पंजीकरण को लेकर न तो पर्याप्त प्रचार किया और न ही कोई जागरूकता अभियान संचालित किया, जो उसकी गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रमों में लाखों वोट हटाए जाने के मामलों में भी आयोग पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाता। उनके अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री ने भी स्वयं स्वीकार किया है कि पंजीकरण अभियान धीमी गति से चल रहा है — यह व्यवस्था की गहरी खामियों को उजागर करता है।
बीआरएस की माँगें और आगे की राह
तलासनी श्रीनिवास यादव ने माँग की कि आयोग तत्काल आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति करे, केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के समन्वय से अभियान संचालित करे, और पात्र स्नातकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए घर-घर जाकर अभियान चलाए। 6 नवंबर की समयसीमा को देखते हुए आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक दबाव और बढ़ने की संभावना है।